Army Subedar Court Martial: नागरिकों से ₹51.44 लाख की कथित ठगी, ईएमई कोर के सूबेदार पर 6 आरोप
भारतीय सेना की Corps of Electronics and Mechanical Engineers (EME) के एक सूबेदार को नागरिकों से करीब ₹51.44 लाख की कथित धोखाधड़ी के मामले में General Court Martial का सामना करना पड़ेगा। सितंबर 2026 में उन्हें दी गई चार्जशीट में उनके खिलाफ छह अलग-अलग धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। यह मामला भारतीय सेना में वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े हालिया कोर्ट मार्शल मामलों के बीच सामने आया है।
महत्वपूर्ण है कि फिलहाल ये सभी आरोप हैं। General Court Martial की कार्यवाही में आरोपों की सुनवाई होगी और इसके बाद ही यह तय होगा कि आरोप साबित होते हैं या नहीं।
किस पद पर तैनात थे सूबेदार?
संबंधित जूनियर कमीशंड ऑफिसर यानी JCO, 304 Field Workshop Company, 671 EME Battalion में Subedar Clerk (Inventory Management) के पद पर तैनात थे। यह यूनिट Headquarters 106 Infantry Brigade से संबद्ध थी।
चार्जशीट में बताया गया है कि कथित घटनाओं के समय वह 304 Field Workshop Company के Technical Store Section के Section In-charge के तौर पर काम कर रहे थे।
मामले से जुड़ी कथित गतिविधियां 2023 से फरवरी 2024 के बीच हुईं और सक्षम प्राधिकारी के संज्ञान में यह मामला 28 सितंबर 2024 को आया।
₹51.44 लाख की कथित धोखाधड़ी कैसे हुई?
चार्जशीट में छह अलग-अलग रकम प्राप्त करने के आरोप दर्ज हैं। इनमें अप्रैल से मई 2023 के बीच ₹3 लाख, मई 2023 में गुवाहाटी में ₹15 लाख, अगस्त से दिसंबर 2023 के बीच ₹5.60 लाख, सितंबर से दिसंबर 2023 के बीच ₹10.13 लाख, अगस्त से सितंबर 2023 के बीच ₹3.50 लाख और दिसंबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच ₹14.19 लाख शामिल हैं।
इन छह रकमों को जोड़ा जाए तो कुल राशि ₹51.42 लाख बनती है, जबकि मामले की कुल कथित रकम करीब ₹51.44 लाख बताई गई है। यानी प्रकाशित विवरण में लगभग ₹2,000 का अंतर दिखाई देता है।
सभी छह आरोप किस कानून के तहत?
सूबेदार के खिलाफ सभी छह आरोप Army Act, 1950 की धारा 69 के तहत लगाए गए हैं। यह प्रावधान सेना के ऐसे कर्मियों पर लागू होता है जिन पर किसी नागरिक अपराध में शामिल होने का आरोप हो और उस अपराध के लिए उन्हें सैन्य न्याय प्रणाली के तहत भी मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है।
इस मामले में संबंधित नागरिक अपराध cheating यानी धोखाधड़ी बताया गया है। इसका मतलब है कि आरोप सैन्य सेवा से सीधे जुड़े अपराध तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कथित नागरिक अपराध को Army Act के तहत कोर्ट मार्शल की कार्यवाही में लाया गया है।
General Court Martial क्या होता है?
Army Act में विभिन्न प्रकार के कोर्ट मार्शल का प्रावधान है। General Court Martial उनमें से एक है और इसे निर्धारित सक्षम सैन्य प्राधिकारी द्वारा गठित किया जा सकता है।
इस मामले में संबंधित सूबेदार के General Court Martial में ट्रायल के निर्देश Major General N. S. Sohal, General Officer Commanding, 71 Infantry Division द्वारा अनुमोदित किए गए हैं।
कार्यवाही के दौरान आरोपों, दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी। इसके बाद सैन्य अदालत अपना निष्कर्ष देगी।
क्या अभी उन्हें दोषी माना जा सकता है?
नहीं। फिलहाल मामला आरोप और सुनवाई के चरण में है। किसी चार्जशीट का जारी होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता।
General Court Martial में आरोप साबित होने के बाद ही दोषसिद्धि और संभावित सजा का सवाल आएगा। इसलिए मामले को रिपोर्ट करते समय “कथित धोखाधड़ी” और “आरोप” जैसे शब्दों का इस्तेमाल जरूरी है।
सेना में वित्तीय अनियमितताओं के अन्य मामले भी चर्चा में
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब 2026 में सेना के कुछ अन्य अधिकारियों और जवानों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कोर्ट मार्शल के मामले भी सामने आए हैं।
अक्टूबर 2025 में एक Army Medical Corps Subedar को अनुपातहीन संपत्ति और अन्य आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद सात साल के कठोर कारावास और सेवा से बर्खास्तगी की सजा सुनाई गई थी। 2026 में भी चिकित्सा सामग्री की कथित अनियमित खरीद और अन्य वित्तीय मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई हुई है।
सेना के लिए मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
सैन्य संस्थानों में वित्तीय अनुशासन और व्यक्तिगत ईमानदारी का महत्व सामान्य प्रशासनिक संस्थानों से भी अधिक होता है। सेना के पद और संसाधनों से जुड़ी किसी कथित धोखाधड़ी का असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि इससे संस्था पर भरोसे का सवाल भी उठ सकता है।
ऐसे मामलों में कोर्ट मार्शल प्रक्रिया का उद्देश्य आरोपों की जांच कर जवाबदेही तय करना है। साथ ही निष्पक्ष प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर हो।
आगे क्या होगा?
अब संबंधित सूबेदार के खिलाफ General Court Martial में छह आरोपों पर सुनवाई होगी। अदालत यह देखेगी कि चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं।
जब तक सैन्य अदालत की ओर से अंतिम निष्कर्ष नहीं आता, तब तक इसे ₹51.44 लाख की कथित धोखाधड़ी का मामला ही माना जाएगा। आने वाली कार्यवाही इस मामले की वास्तविक स्थिति और संभावित परिणाम को स्पष्ट करेगी।

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