डिजिटल क्रांति से बदलती भारत की शेती: 11 करोड़ किसानों को मिलेगी यूनिक ‘किसान आईडी’, एआई और ड्रोन से बढ़ेगी पैदावार
र्ष 2026 में भारत का कृषि क्षेत्र एक ऐतिहासिक तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। केंद्र सरकार के 2,817 करोड़ रुपये के ‘डिजिटल कृषि मिशन’ के तहत देशभर के 11 करोड़ से अधिक किसानों के लिए आधार की तर्ज पर डिजिटल ‘किसान आईडी’ (एग्रीस्टैक) बनाने की प्रक्रिया में तेजी आई है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय शेती को अधिक पारदर्शी, कुशल और तकनीक-संचालित बनाना है।
यह डिजिटल सुधार पारंपरिक शेती को आंकड़ों और अत्याधुनिक तकनीकों पर आधारित एक आधुनिक और टिकाऊ मॉडल में बदल रहा है। एग्रीस्टैक प्रणाली से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), पीएम-किसान सम्मान निधि, फसल बीमा (पीएमएफबीवाई) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपज खरीद की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और किसानों तक लाभ तेजी से पहुंचेगा।
1. एग्रीस्टैक और डिजिटल पहचान: क्या है ‘किसान रजिस्ट्री’?
डिजिटल कृषि मिशन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) है। राज्य सरकारों के सहयोग से तैयार किए जा रहे इस डिजिटल ढांचे में मुख्य रूप से तीन रजिस्टर शामिल हैं:
- किसान रजिस्ट्री (Farmers’ Registry): प्रत्येक किसान की सत्यापित पहचान।
- भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र (Geo-Referenced Village Maps): जमीनों का सटीक डिजिटल नक्शा।
- फसल बोआई रजिस्ट्री (Crop Sown Registry): खेत में बोई गई फसल का वास्तविक समय का विवरण।
इस प्रणाली से बनने वाली ‘डिजिटल किसान आईडी’ के जरिए किसान घर बैठे आसान ऋण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मौसम आधारित कृषि परामर्श प्राप्त कर सकेंगे।
2. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कृषि ड्रोन: पैदावार में बढ़ोतरी की नई राह
2026 के आंकड़ों के अनुसार, शेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उपग्रह आंकड़ों के उपयोग से देश की कृषि अर्थव्यवस्था में लगभग 70,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त योगदान होने का अनुमान है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत ‘नमो ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ड्रोन तकनीक से कीटनाशकों और उर्वरकों का सटीक छिड़काव संभव हुआ है, जिससे लागत में कमी और पानी की बचत हो रही है। साथ ही, ‘डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम’ (DGCES) के माध्यम से फसलों की पैदावार का सटीक आकलन किया जा रहा है।
3. जलवायु अनुकूल शेती और बीज प्रमाणिकता
बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के जोखिमों से शेती को बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को प्राथमिकता दी जा रही है। बीजों की गुणवत्ता और कालाबजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने ‘साथी’ (SATHI) नामक राष्ट्रीय डिजिटल बीज ग्रिड स्थापित किया है, जिससे किसान को बोरी पर लगे क्यूआर कोड से प्रामाणिक बीजों की जानकारी मिलती है।
निष्कर्ष
शेती में डिजिटल तकनीक, एआई और ड्रोन का यह संगम न केवल किसानों की परिचालन लागत घटा रहा है, बल्कि उत्पादन बढ़ाकर कृषि को एक आकर्षक और लाभदायक उद्यम बना रहा है। 2026 की यह कृषि क्रांति भारत को खाद्य सुरक्षा और कृषि निर्यात में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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