भगवंत मान को फ्रांस जाने की हाई कोर्ट से मिली मंजूरी, केंद्र के फैसले पर उठाए सवाल
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को फ्रांस यात्रा के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। 16 अक्टूबर 2026 को अदालत ने राज्य सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार की ओर से राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार करने के फैसले को रद्द कर दिया। इसके बाद भगवंत मान के 17 से 21 अक्टूबर तक पेरिस में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय खाद्य व्यापार मेले में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया। मुख्यमंत्री ने इस फैसले पर अदालत का आभार जताया और विदेश यात्राओं की अनुमति को लेकर केंद्र सरकार की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
भगवंत मान क्यों जा रहे हैं फ्रांस?
भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल पेरिस में आयोजित SIAL Paris 2026 में हिस्सा लेने वाला है। यह अंतरराष्ट्रीय खाद्य उद्योग और व्यापार से जुड़ा प्रमुख आयोजन है, जहां खाद्य उत्पादों, प्रसंस्करण और नए बाजारों से संबंधित कारोबारी अवसरों पर ध्यान दिया जाता है।
पंजाब सरकार के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य राज्य के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा देना है। पंजाब की सहकारी विपणन संस्था मार्कफेड ने भी इस प्रदर्शनी में अपना स्टॉल लगाया है। सरकार को उम्मीद है कि इस भागीदारी से राज्य के उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों में नए अवसर तलाशे जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री के साथ मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रवि भगत के भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की योजना थी।
केंद्र ने यात्रा की अनुमति क्यों नहीं दी थी?
विदेश मंत्रालय ने भगवंत मान की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा के लिए राजनीतिक मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के बाद पंजाब सरकार ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की।
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि मंजूरी के लिए आवेदन को पोर्टल पर केवल ‘Denied’ चिह्नित कर दिया गया और अस्वीकृति के पर्याप्त कारण नहीं बताए गए। पंजाब सरकार ने इस फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि इससे राज्य के व्यापारिक हित प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने अदालत में सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया। रिपोर्टों के अनुसार, संभावित खालिस्तानी तत्वों से खतरे और फ्रांस सरकार की ओर से औपचारिक निमंत्रण नहीं मिलने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
इस तरह मामला केवल विदेश यात्रा की अनुमति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारों तथा आधिकारिक यात्राओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया पर भी बहस का विषय बन गया।
हाई कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
16 अक्टूबर को न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया ने पंजाब सरकार की याचिका स्वीकार कर ली और केंद्र की ओर से राजनीतिक मंजूरी रोकने के फैसले को रद्द कर दिया। इस आदेश से भगवंत मान की प्रस्तावित फ्रांस यात्रा का रास्ता साफ हुआ।
हालांकि, सुनवाई के बाद विस्तृत लिखित आदेश जारी होने की प्रतीक्षा थी। इसलिए फैसले की कानूनी शर्तों और उसके व्यापक प्रभाव के बारे में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत आदेश के अध्ययन के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
भगवंत मान ने अदालत के फैसले के बाद कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि ऐसी यात्राओं के लिए बार-बार अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ता है। उन्होंने पंजाब के व्यापारिक हितों को बढ़ावा देने के लिए यात्रा के महत्व पर भी जोर दिया।
विपक्ष ने भगवंत मान के दौरे पर क्या सवाल उठाए?
मुख्यमंत्री की फ्रांस यात्रा को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए हैं। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल से जुड़े नेताओं ने पंजाब में कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या का हवाला देते हुए विदेश दौरे के समय पर आपत्ति जताई।
यह आलोचना राज्य में हालिया आपराधिक घटनाओं और नशा विरोधी कार्रवाई को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आई है। दूसरी ओर, पंजाब सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कार्यक्रम में भागीदारी राज्य के आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, भगवंत मान की फ्रांस यात्रा को हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद अब ध्यान पेरिस में होने वाली व्यापारिक बैठकों और पंजाब के उत्पादों के प्रचार पर रहेगा। साथ ही, यह मामला केंद्र और राज्य सरकार के बीच आधिकारिक विदेशी यात्राओं की मंजूरी को लेकर जारी मतभेदों को भी सामने लाता है।


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