बिहार में गंडक नदी का विकराल रूप: बगहा में 91.25 मीटर का बना ऑल-टाइम रिकॉर्ड जलस्तर; 5.43 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज से तटबंध टूटा, 6 जिलों में अलर्ट
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश के बाद उफनाई गंडक नदी; वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े गए पानी से चंपारण तटबंध क्षतिग्रस्त, NDRF और राहत कार्य तेज।
नेपाल के तराई क्षेत्रों में हुई भारी और मूसलाधार बारिश के कारण बिहार की गंडक नदी (Gandak River) ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। 28-29 सितंबर 2026 को गंडक नदी ने बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा गेज स्थल पर 91.25 मीटर का ऑल-टाइम रिकॉर्ड जलस्तर दर्ज किया है, जो 2024 के पिछले उच्चतम स्तर (90.90 मीटर) से 0.35 मीटर अधिक है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बराज से 5,43,500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे नदी के किनारे बसे पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों में तबाही और बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
दैनिक जागरण और हिंदुस्तान टाइम्स की जल संसाधन विभाग (Water Resources Department) की रिपोर्टों के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराज से पानी का बहाव लगातार 13 घंटों तक 5 लाख क्यूसेक से अधिक और 32 घंटों तक 4 लाख क्यूसेक से ऊपर बना रहा। जल के इस प्रचंड वेग के कारण पश्चिम चंपारण के बगहा-1 के खैराटवा और बैरिया के फुलियाखाड़ में चंपारण तटबंध (Champaran Embankment) के दो हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे दियारा और मैदानी इलाकों के दर्जनों गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। राज्य सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए आपातकालीन मरम्मत के साथ बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज में आपदा मोचन बलों (NDRF/SDRF) की टुकड़ियां रवाना कर दी हैं।
1. गंडक नदी का नया रिकॉर्ड और नेपाल में हुई बारिश
गंडक नदी के जलस्तर में आए अचानक उछाल का मुख्य कारण नेपाल के निचले इलाकों में हुई अतिवृष्टि है:
- 2024 का रिकॉर्ड टूटा: हालांकि 2024 में वाल्मीकिनगर बराज से 5.62 लाख क्यूसेक का जलस्राव हुआ था, लेकिन इस बार निचले मैदानी इलाकों में पहले से पानी भरा होने के कारण जलस्तर ने 91.25 मीटर का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बना दिया।
- 32 घंटे तक उफान पर रहा बराज: बराज से लगातार 5.43 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के कारण नदी के निचले तटीय क्षेत्रों पर भारी दबाव बना हुआ है।
- तटबंधों पर 169 सीपेज पॉइंट्स की मरम्मत: जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने तटबंधों में दिखे 169 सेपेज (रिसाव) स्थलों की युद्धस्तर पर मरम्मत की है ताकि बड़े कटाव को रोका जा सके।
2. कौन-कौन से जिले प्रभावित हैं और क्या हैं प्रशासनिक इंतजाम?
गंडक नदी का उफान बिहार के साथ-साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के तटीय जिलों के लिए भी चुनौती बन गया है:
- बिहार के 6 प्रमुख जिले प्रभावित: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण (छपरा), मुजफ्फरपुर और वैशाली जिलों के दियारा इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में सतर्कता: गंडक नदी का पानी सीमावर्ती यूपी के कुशीनगर और देवरिया जिलों के निचले गांवों में भी फैलने लगा है।
- राहत और बचाव कार्य: राज्य सरकार ने नावों की व्यवस्था, राहत शिविर और सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) शुरू कर दी हैं। एनडीआरएफ की टीमें पानी में फंसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं।
3. तिरहुत नहर और मुख्य बांधों पर दबाव
बाढ़ के इस संकट ने क्षेत्र के सिंचाई और प्रशासनिक ढांचे पर भी भारी दबाव डाला है:
- तिरहुत नहर का बांध टूटा: मुजफ्फरपुर के पनापुर करियात क्षेत्र के रक्षा गांव के पास अतिप्रवाह के कारण तिरहुत नहर का बांध टूट गया, जिससे सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है।
- सड़क संपर्क बाधित: पश्चिम चंपारण और गोपालगंज को जोड़ने वाले कई राज्य राजमार्गों (State Highways) और पुलिया के ऊपर से 2 से 3 फीट पानी बह रहा है, जिससे यातायात ठप हो गया है।
- मुख्य राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग: बिहार के मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
बिहार में गंडक नदी के रिकॉर्ड जलस्तर और वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े गए 5.43 लाख क्यूसेक पानी ने एक बार फिर उत्तर बिहार में बाढ़ की विभीषिका खड़ी कर दी है। नेपाल में बारिश और गंडक का ऑल-टाइम हाई लेवल यह चेतावनी देता है कि आपदा प्रबंधन और तटबंधों की सुरक्षा को और पुख्ता करने की आवश्यकता है। आने वाले 48 घंटे निचले जिलों के लिए बेहद संवेदनशील हैं, जहां प्रशासन और राहत बलों की मुस्तैदी ही जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है।
