मूसलाधार बारिश और मिट्टी के संतृप्ति से भारत में ‘Flash Flood‘ का खतरा तेज: IMD ने कई राज्यों के लिए जारी किया अलर्ट
सामान्य बाढ़ से अधिक विनाशकारी साबित हो रही है ‘फ्लैश फ्लड’; मौसम विभाग (IMD) ने फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम से ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के जिलों को किया सतर्क।
भारत में मानसून के दौरान बारिश के बदलते ढर्रे और जलवायु परिवर्तन के असर से आकस्मिक बाढ़ (Flash Flood) का खतरा गंभीर रूप ले चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा सितंबर 2026 में जारी फ्लैश फ्लड गाइडेंस बुलेटिन (Flash Flood Guidance Bulletin) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मौसम प्रणालियों और अत्यधिक बारिश के कारण ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के दर्जनों जिलों में मध्यम से उच्च स्तर की आकस्मिक बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया है।
आकस्मिक बाढ़ (Flash Flood) सामान्य नदियां उफनाने वाली बाढ़ (Riverine Flood) से काफी भिन्न और अधिक खतरनाक होती है। जहां नदियों का जलस्तर बढ़ने में कुछ घंटों या दिनों का समय लगता है, वहीं फ्लैश फ्लड मूसलाधार बारिश के महज 3 से 6 घंटे के भीतर अचानक उफान पर आ जाती है। जब मिट्टी की जलधारण क्षमता (Soil Saturation) 90 से 98 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, तब जल निकासी तंत्र (Drainage System) पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है और सतह पर पानी तेजी से नदियों, सड़कों और निचले इलाकों में फैल जाता है।
1. फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम (FFGS) और प्रभावित जिले
IMD का ‘फ्लैश फ्लड गाइडेंस सिस्टम’ (FFGS) उपग्रहों और रडार की मदद से वास्तविक समय (Real-time) में मिट्टी की नमी और जल क्षेत्रों की निगरानी करता है:
- उच्च जोखिम वाले राज्य: ओडिशा के 9 जिले (कोरापुट, मलकानगिरी, गंजम आदि), आंध्र प्रदेश के 14 तटीय जिले (विशाखापट्टनम, श्रीकाकुलम, कृष्णा आदि), छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 4 जिले और तेलंगाना के 6 जिले उच्च फ्लैश फ्लड जोन में हैं।
- त्वरित जल बहाव: जब किसी जलग्रहण क्षेत्र (Watershed) में कम समय में 100 मिमी से अधिक वर्षा होती है, तो बहता पानी छोटे नालों और सड़कों को खतरनाक नदियों में बदल देता है।
2. जलवायु परिवर्तन और बेतरतीब शहरीकरण: खतरे के मुख्य कारण
वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में फ्लैश फ्लड की आवृत्ति बढ़ने के दो प्रमुख कारण हैं:
- अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का तापमान: समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जिससे एक ही स्थान पर बहुत कम समय में भारी बारिश (Cloudburst-like events) होती है।
- शहरी ड्रेनेज और कंक्रीट का जाल: शहरों में प्राकृतिक जल स्रोतों, झीलों और नालों पर कंक्रीट के निर्माण से बारिश का पानी जमीन के भीतर नहीं जा पाता, जिससे मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में ‘अर्बन फ्लैश फ्लड’ का खतरा बना रहता है।
3. NDMA और IMD के सुरक्षा दिशानिर्देश: कैसे सुरक्षित रहें?
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने अपने ‘सचेत’ (SACHET) पोर्टल के माध्यम से नागरिकों के लिए आपातकालीन अलर्ट और सुरक्षा उपाय जारी किए हैं:
- जलधाराओं से दूर रहें: बारिश के दौरान अचानक पानी का स्तर बढ़ सकता है, इसलिए छोटे नालों, कम ऊंचाई वाले पुलों और अंडरपास को पार करने की कोशिश न करें।
- अलर्ट मैसेज का पालन करें: स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के मैसेज व अलर्ट पर लगातार नजर रखें और निचले इलाकों में पानी भरने से पहले सुरक्षित स्थानों की ओर प्रस्थान करें।
निष्कर्ष
आकस्मिक बाढ़ केवल प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन और अपर्याप्त शहरी नियोजन का मिला-जुला परिणाम है। भारत को अपने आपदा प्रबंधन तंत्र को पारंपरिक ‘राहत कार्य’ से आगे बढ़ाकर ‘जलवायु-संवेदनशील पूर्व चेतावनी प्रणाली’ और शहरी बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण पर केंद्रित करना होगा, ताकि समय रहते जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

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