पैदल यात्रियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: पूरे देश में IRC 103:2022 मानकों का पालन जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने पैदल चलने वालों के अधिकारों पर अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली प्रशासन को दिल्ली हाई कोर्ट के आसपास जरूरी फुटपाथ और पैदल क्रॉसिंग 25 नवंबर 2026 तक पूरे करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पैदल यात्री सुविधाओं के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानक IRC 103:2022 का सख्ती से पालन करने को कहा है। इस आदेश का असर देश के हर शहर की सड़कों पर दिख सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
रिपोर्ट्स के अनुसार न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विनोद चंद्रन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि सुरक्षित फुटपाथ और पैदल चलने की जगह का न होना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(d) (देश में स्वतंत्र रूप से आने-जाने की आजादी) से जोड़ा।
कोर्ट ने चेतावनी भी दी कि तय समय में काम पूरा न होने पर आगे न्यायिक कार्रवाई हो सकती है। जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को तलब भी किया जा सकता है।
क्या है IRC 103:2022?
IRC 103:2022 भारतीय सड़क कांग्रेस के वे दिशानिर्देश हैं, जो पैदल यात्री सुविधाओं की बनावट तय करते हैं। इनमें मुख्य रूप से ये बातें आती हैं:
- फिसलन-रोधी (एंटी-स्किड) सतह वाले फुटपाथ
- व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वालों के लिए सुगम रास्ते
- साफ और बाधा-रहित पैदल मार्ग की डिजाइन
कोर्ट के आदेश के बाद ये मानक सुझाव नहीं, बल्कि अनिवार्य पालन की कसौटी बन गए हैं। इससे शहरी विकास की सोच कारों के बजाय पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने की ओर बढ़ेगी।
शिकायत पोर्टल, निगरानी और पायलट प्रोजेक्ट
आदेश के मुताबिक कोर्ट ने सार्वजनिक शिकायत पोर्टल बनाने की बात कही है। इसके जरिए अवैध पार्किंग और अनधिकृत ठेले-खोमचों जैसी रुकावटों की शिकायत की जा सकेगी। केंद्र सरकार से कहा गया है कि इन मानकों के पालन पर नजर रखने के लिए एक प्राधिकरण बनाया जाए। साथ ही पांच बड़े शहरों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सड़क हादसों में पैदल यात्रियों की स्थिति
यह आदेश इसलिए भी अहम है कि देश में सड़क हादसों का बड़ा हिस्सा पैदल यात्रियों का है। रिपोर्ट्स के अनुसार 2023 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में कुल 1,72,890 लोगों की मौत हुई। इनमें 35,221 पैदल यात्री थे, यानी कुल मौतों का करीब 20.4 प्रतिशत।
कुछ राज्य इस दिशा में पहले से कदम उठा रहे हैं। आंध्र प्रदेश ने ‘पैदल यात्री सुरक्षा और सार्वभौमिक सुगम्यता नीति 2026’ अधिसूचित की है, जिसे इस तरह की देश की पहली एकीकृत नीति बताया गया है। बेंगलुरु में भी बसें बढ़ाने के साथ चौड़े फुटपाथों और बेहतर पैदल पहुंच को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
निर्माण क्षेत्र और आम लोगों पर असर
इस आदेश का सीधा असर सड़क और शहरी विकास की परियोजनाओं पर पड़ेगा। आने वाले सरकारी टेंडरों में पैदल यात्री सुविधाओं की गुणवत्ता और तय मानकों का पालन अनिवार्य शर्त बन सकता है। आम नागरिकों, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों के लिए इसका मतलब सुरक्षित और सुगम रास्ते हो सकता है। असली परीक्षा यह होगी कि राज्य और स्थानीय निकाय आदेश को जमीन पर कितनी तेजी से उतारते हैं। आगे की सुनवाई और अनुपालन की स्थिति सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।


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