पूर्वी चंपारण में गंडक का कहर: निचले इलाकों में घुसा पानी, मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में गंडक नदी का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी निचले इलाकों में फैल चुका है और प्रशासन राहत व बचाव की तैयारियों में जुटा है। सोमवार, 28 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद हालात का जायज़ा लिया।

मुख्यमंत्री ने क्या देखा?

मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से पूर्वी चंपारण के हुसैनी प्रखंड पहुँचे और डुमरिया घाट पुल तथा आसपास के इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी थे, जिन्होंने मोतिहारी से सटे क्षेत्रों और गोपालगंज के डुमरियाघाट का भी जायज़ा लिया। मुख्यमंत्री ने वैशाली, सारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय प्रशासन की तैयारियों की समीक्षा के साथ निर्देश दिए कि बाढ़ संभावित और प्रभावित इलाकों में राहत शिविर बनाए जाएँ और लोगों तक हर ज़रूरी मदद बिना देरी पहुँचे। राहत शिविरों और सामुदायिक रसोई के ज़रिए भोजन और ज़रूरी सुविधाएँ उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए।

गंडक क्यों बनी चिंता का कारण?

गंडक नदी उत्तर बिहार की उन नदियों में है जो बरसात के मौसम में अक्सर विकराल रूप ले लेती हैं। इस बार भी नदी के उफान से पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के निचले क्षेत्र पानी में डूब गए हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने उत्तर बिहार के 12 ज़िलों, जिनमें पूर्वी चंपारण भी शामिल है, के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। यानी आने वाले दिनों में और बारिश हुई तो जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रहेगा।

पड़ोसी ज़िले में टूटा तटबंध, बढ़ी आशंका

पश्चिमी चंपारण (बेतिया) में गंडक के बाएँ चंपारण तटबंध में फुलियाखांड़ गाँव के पास करीब 59.60 किलोमीटर पर पानी के ऊपर से बहने (ओवरटॉपिंग) और रिसाव (पाइपिंग) के कारण लगभग पाँच मीटर चौड़ाई में क्षति की सूचना है। इसके बाद इलाके के कई गाँवों में पानी घुस गया। इसका असर पूर्वी चंपारण पर भी पड़ने की आशंका है। पहाड़पुर प्रखंड के दर्जनों गाँवों में पानी पहुँचने का खतरा जताया गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर से बेतिया-गोपालगंज मुख्य पथ के भी जलमग्न होने की आशंका है।

ज़मीन पर हालात

बाढ़ग्रस्त इलाकों से आ रही खबरों के मुताबिक कई परिवार घर छोड़कर तिरपाल के नीचे शरण लेने को मजबूर हैं। मवेशी भी सड़क किनारे खुले में हैं। कुछ जगहों पर तटबंधों पर शरण ली गई है। प्रशासन की ओर से राहत सामग्री बाँटी जा रही है। राहत शिविरों में शुद्ध पेयजल और पका हुआ गर्म भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत कार्य तेज़ करने की माँग की है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि जलस्तर बढ़ने के बावजूद तटबंध की सुरक्षा और लगातार गश्त के ठोस इंतज़ाम नहीं किए गए।

यह पहली बार नहीं है

पूर्वी चंपारण के लिए बाढ़ नई बात नहीं है। 2007 की बाढ़ को संयुक्त राष्ट्र ने बिहार की याद में सबसे भयावह बताया था, जिसमें 19 ज़िले प्रभावित हुए और पूर्वी चंपारण भी उनमें शामिल था। 2019 में भी उत्तर बिहार के 13 ज़िले बाढ़ की चपेट में आए, जिनमें पूर्वी चंपारण शामिल था। 2020 में गंडक का तटबंध टूटने से भवानीपुर जैसे इलाके प्रभावित हुए थे। हर साल की यह पुनरावृत्ति तटबंधों की मज़बूती और समय पर रखरखाव पर सवाल खड़े करती है।

बाढ़ के समय क्या सावधानी रखें?

  • पानी बढ़ने की सूचना मिलते ही परिवार, बुज़ुर्गों और बच्चों को पहले ऊँची और सुरक्षित जगह पर ले जाएँ।
  • बाढ़ के पानी में न चलें और न बच्चों को खेलने दें। बिजली के तारों और खंभों से दूर रहें।
  • पीने का पानी उबालकर या क्लोरीन की गोली डालकर ही इस्तेमाल करें।
  • ज़रूरी दस्तावेज़, दवाइयाँ और सूखा राशन एक थैली में तैयार रखें।
  • मवेशियों को खुला छोड़ने के बजाय ऊँचे स्थान पर बाँधें।
  • किसी भी सहायता के लिए अंचल कार्यालय या जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से संपर्क करें और अफ़वाहों पर भरोसा न करें।

आगे क्या?

अगले कुछ दिन बेहद अहम हैं। अगर ऊपरी इलाकों और नेपाल क्षेत्र में बारिश जारी रही तो गंडक का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन के सामने चुनौती है कि तटबंधों की निगरानी कड़ी हो, राहत समय पर पहुँचे और लोगों को सुरक्षित निकाला जाए। बाढ़ हर साल आती है, पर स्थायी समाधान तभी निकलेगा जब तटबंधों की मरम्मत और पूर्व-चेतावनी की व्यवस्था समय रहते मज़बूत की जाए।

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By Kanchan

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