₹43 करोड़ का मध्य प्रदेश धान परिवहन घोटाला: जबलपुर हाईकोर्ट में EOW ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट; फर्जी ऑटो और बाइक से ढोया गया था अनाज
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाई. कोगजे की पीठ के समक्ष 90 एफआईआर का खुलासा; 28 जिलों में फैला है फर्जीवाड़ा, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की जनहित याचिका पर सुनवाई।
जबलपुर (विशेष प्रतिनिधि):
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित और बड़े प्रशासनिक घोटालों में शामिल ₹43.03 करोड़ के धान खरीद व परिवहन घोटाले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर मुख्य पीठ) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश भर के 28 जिलों में फैले इस व्यापक फर्जीवाड़े की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगलपीठ के समक्ष पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की। EOW द्वारा अदालत को सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, इस घोटाले में राज्य भर में अब तक 90 आपराधिक मामले (FIR) दर्ज किए जा चुके हैं।
क्या है धान परिवहन घोटाला? (Background & PIL)
यह पूरा मामला जबलपुर की स्वयंसेवी संस्था नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच (नागुमामं) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से उजागर हुआ था। याचिका में साक्ष्यों के साथ आरोप लगाया गया था कि मध्य प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों व
ठेकेदारों की मिलीभगत से एथेनॉल निर्माण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए भेजे जाने वाले सरकारी धान के परिवहन में करोड़ों रुपये का घपला किया गया। कागजों पर धान का परिवहन दिखाकर ठेकेदारों को सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
फर्जीवाड़े का अनोखा तरीका: बाइक और ऑटो से ढोया गया हजारों टन धान
EOW और तत्कालीन जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा की गई प्राथमिक जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले थे। परिवहन के लिए जिन वाहनों के नंबर रजिस्टरों और चालानों में दर्ज किए गए थे, उनका जब परिवहन विभाग (RTO) के डेटाबेस से मिलान किया गया, तो वे नंबर स्कूटर, मोटरसाइकिल, ऑटो-रिक्शा, यात्री बसों, ऑटोमैटिक थ्रेशर और निजी कारों के निकले। कागजों पर यह दिखाया गया कि हजारों क्विंटल धान बाइक और ऑटो पर लादकर एक जिले से दूसरे जिले के गोदामों तक पहुंचाया गया था।
| घटक (Aspect) | विवरण एवं आंकड़े (Details & Figures) |
|---|---|
| घोटाले की अनुमानित राशि | ₹43.03 करोड़ (28 जिलों में फैला सिंडिकेट) |
| दर्ज एफआईआर की संख्या | 90 FIR (EOW द्वारा विभिन्न जिलों में दर्ज) |
| याचिकाकर्ता संगठन | नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर |
| घोटाले का तरीका | दोपहिया, ऑटो व कार के नंबरों पर फर्जी परिवहन चालान जनरेट करना |
हाईकोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई
उच्च न्यायालय की युगलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग तथा नागरिक आपूर्ति निगम को 6 सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब (Detailed Affidavit) दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। याचिकाकर्ता संगठन ने मांग की है कि इस घोटाले में शामिल सभी दोषी अधिकारियों, राइस मिलरों और परिवहन ठेकेदारों से गबन की गई राशि की शत-प्रतिशत वसूली की जाए तथा फर्जीवाड़े में शामिल फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।


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