निखिल कामथ की चेतावनी, 2027 में स्टार्टअप्स के लिए मुश्किल हो सकती है फंडिंग; बोले, अभी जुटा लें पूंजी
जिरोधा के सह-संस्थापक निखिल कामथ ने चेतावनी दी है कि 2027 में स्टार्टअप कंपनियों के लिए निवेश जुटाना अधिक मुश्किल हो सकता है। 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के दौरान उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के क्षेत्र में निवेश और उससे होने वाली कमाई के बीच बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, इस स्थिति में आने वाले समय में निवेशकों से पूंजी जुटाने की शर्तें कठिन हो सकती हैं। उन्होंने उद्यमियों को सलाह दी कि जिन कंपनियों को आगे कारोबार बढ़ाने के लिए धन की जरूरत है, वे मौजूदा अवसरों का आकलन करके समय रहते धन जुटाने पर विचार करें। कामथ ने इस दौरान शेयर बाजार, संपत्ति की असमानता और भारत में नए सामाजिक मंच विकसित करने की संभावनाओं पर भी अपने विचार रखे।
2027 में स्टार्टअप्स के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?
कामथ ने कहा कि एआई उद्योग में हर साल लगभग एक लाख करोड़ डॉलर का निवेश हो रहा है, जबकि उद्यमों से मिलने वाला राजस्व उनके अनुमान के अनुसार करीब 100 से 200 अरब डॉलर है।
उनके मुताबिक, निवेश और राजस्व के बीच इतना बड़ा अंतर लंबे समय तक बना रहना मुश्किल हो सकता है। यदि निवेशकों को एआई कंपनियों से अपेक्षित कमाई नहीं दिखाई देती, तो वे नई कंपनियों में पैसा लगाने को लेकर अधिक सतर्क हो सकते हैं।
कामथ ने संकेत दिया कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बढ़ती ब्याज दरें भी निवेश की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं। उनका मानना है कि ऐसे माहौल में स्टार्टअप्स के लिए नई पूंजी जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, यह कामथ का बाजार संबंधी आकलन है, न कि 2027 में सभी स्टार्टअप्स की फंडिंग घटने का निश्चित पूर्वानुमान।
निखिल कामथ ने शेयर बाजार को लेकर क्या कहा?
कामथ ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं और दवा कंपनियों में कुछ ऐसे अवसर हैं, जहां कंपनियों के मूल्यांकन पर नए सिरे से विचार किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि उनका निवेश पोर्टफोलियो लगभग 90 प्रतिशत इक्विटी में है। यह उनका व्यक्तिगत निवेश संबंधी बयान है, इसे सभी निवेशकों के लिए उपयुक्त निवेश रणनीति नहीं माना जाना चाहिए।
जिरोधा के सह-संस्थापक ने प्रतिस्पर्धी निवेश मंच ग्रो के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत में शेयर बाजार में भाग लेने वाले लोगों की संख्या अभी कम है और देश को जिरोधा तथा ग्रो जैसे सैकड़ों कारोबारों की जरूरत है। उनके मुताबिक, अधिक प्रतिस्पर्धा और निवेशकों की व्यापक भागीदारी से बाजार का विस्तार हो सकता है।
वायदा कारोबार पर कर लगाने के तरीके में बदलाव की मांग
कामथ ने वायदा एवं विकल्प कारोबार यानी एफऐंडओ में खुदरा निवेशकों की स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि कारोबारियों के लिए नियम और व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें छोटे निवेशकों को बड़े और उच्च गति वाले कारोबारियों के मुकाबले समान अवसर मिलें।
उन्होंने उच्च गति वाले कारोबारियों को सर्वर के पास रखकर तेजी से आदेश निष्पादित करने की सुविधा यानी को-लोकेशन पर सवाल उठाए। उनका सुझाव था कि कराधान का आधार केवल लेनदेन की लागत नहीं, बल्कि वास्तविक आय होनी चाहिए।
कामथ का तर्क था कि खुदरा कारोबारियों के नुकसान में कर, शुल्क और लेनदेन की अन्य लागतों की भी भूमिका होती है। हालांकि, उनके इन सुझावों को लागू नियमों में बदलाव नहीं माना जा सकता।
क्या निखिल कामथ अपना सोशल मीडिया मंच बनाएंगे?
कामथ ने यह भी संकेत दिया कि वह पारंपरिक समाचार माध्यम शुरू करने के बजाय एक नए सामाजिक मंच के विकास में रुचि रखते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी टीम इस दिशा में अलग-अलग ऐप के विचारों पर प्रयोग कर रही है।
उनका मानना है कि वैश्विक कारोबार के अलग-अलग क्षेत्रों में अपने डिजिटल मंच विकसित करने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है और भारत में भी ऐसा अवसर मौजूद है। हालांकि, इस संभावित मंच के नाम, शुरुआत की तारीख या व्यावसायिक मॉडल की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कौन हैं निखिल कामथ?
निखिल कामथ भारतीय उद्यमी और निवेशक हैं। उन्होंने अपने बड़े भाई नितिन कामथ के साथ अगस्त 2010 में जिरोधा की स्थापना की थी। कंपनी ने कम लागत वाली शेयर दलाली सेवाओं और तकनीकी मंच के माध्यम से भारतीय निवेश बाजार में अपनी पहचान बनाई।
वह निवेश कंपनी ट्रू बीकन और निवेश मंच ग्रुहास से भी जुड़े हैं। इसके अलावा, उनका पॉडकास्ट ‘डब्ल्यूटीएफ इज’ उद्यमियों, निवेशकों और अन्य चर्चित हस्तियों के साथ बातचीत के लिए जाना जाता है।
हालिया बयान बताते हैं कि कामथ की दिलचस्पी केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है। वह एआई निवेश, उद्यमिता, संपत्ति की असमानता और भारत के डिजिटल कारोबार के भविष्य पर भी सक्रिय रूप से अपने विचार रख रहे हैं।

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