जंतर-मंतर अब प्रदर्शन स्थल नहीं, दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड को दी मंजूरी
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को आधिकारिक निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। अब विरोध-प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को नए निर्धारित स्थलों के रूप में चुना गया है। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया, जिसकी जानकारी 12 अक्टूबर को सामने आई।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक दलों तथा विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन चर्चा में हैं। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी विवाद हुआ था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नए प्रदर्शन स्थलों से आम नागरिकों, छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की विरोध दर्ज कराने की प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा।
जंतर-मंतर की जगह अब कहां होंगे प्रदर्शन?
दिल्ली पुलिस की नई व्यवस्था के तहत तीन स्थानों को प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है।
1. रामलीला मैदान, दिल्ली: मध्य दिल्ली में स्थित रामलीला मैदान पहले भी बड़े राजनीतिक आयोजनों, जनसभाओं और धरना-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास होने के कारण यह राजधानी के बड़े सार्वजनिक आयोजनों के लिए जाना जाता है।
2. बुराड़ी मैदान: उत्तर दिल्ली में स्थित बुराड़ी मैदान को भी नए प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है। यह स्थान मध्य दिल्ली के प्रमुख सरकारी केंद्रों से अपेक्षाकृत दूर है। बड़े जमावड़ों के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है, हालांकि वास्तविक आयोजन अनुमति और लागू नियमों पर निर्भर करेंगे।
3. CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र में स्थित सीबीडी ग्राउंड को तीसरे निर्धारित स्थल के रूप में चुना गया है। इस फैसले के बाद CBD Ground Delhi और CBD मैदान जैसे शब्द भी दिल्ली में नए प्रदर्शन स्थल खोजने वालों के बीच चर्चा में हैं।
इन तीनों जगहों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाने हैं। इसलिए आयोजकों को नई व्यवस्था के तहत लागू होने वाली शर्तों और अनुमति की प्रक्रिया की जानकारी लेना आवश्यक होगा।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से क्यों हटाया गया?
दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों के प्रदर्शन और विरोध सभाओं के लिए वैकल्पिक स्थानों की जाँच करने हेतु एक समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर यह बदलाव किया गया है।
यह आदेश दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश संख्या 48/2022 में आंशिक संशोधन करता है। नए स्थलों पर प्रदर्शन की प्रक्रिया, अनुमति और अन्य शर्तों के संबंध में संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया जारी की जानी है।
हालाँकि, आदेश में बताए गए प्रशासनिक आधार और इस फैसले के व्यापक प्रभावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए कि दिल्ली में सभी तरह के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। बदलाव मुख्य रूप से आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थलों से संबंधित है।
तीन दशक से विरोध की आवाज बना था जंतर-मंतर
जंतर-मंतर केवल एक ऐतिहासिक खगोलीय वेधशाला के पास स्थित सड़क नहीं रहा है। वर्ष 1993 से यह राजधानी में जन आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा है। संसद और केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के अपेक्षाकृत करीब होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों को राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान मिलता रहा।
वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन, 2017 में तमिलनाडु के किसानों के धरने और 2019 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान जंतर-मंतर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2023 में भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों का धरना भी यहां आयोजित हुआ था।
हालांकि, इस स्थल को लेकर पहले भी विवाद रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने शोर और अस्वच्छता जैसी समस्याओं की शिकायत की थी। अक्टूबर 2017 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने यहां प्रदर्शनों पर रोक लगाने और वैकल्पिक स्थल पर स्थानांतरण का निर्देश देने की मांग उठाई थी। जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध के खिलाफ फैसला दिया, लेकिन आयोजन के तरीके और प्रतिभागियों की संख्या को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नए प्रदर्शन स्थलों से क्या बदलेगा?
जंतर-मंतर की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भौगोलिक स्थिति रही है। यह संसद और केंद्रीय सरकारी कार्यालयों के करीब है, इसलिए छोटे प्रदर्शन भी राजनीतिक और मीडिया का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। इसके विपरीत, बुराड़ी और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड जैसे स्थानों पर पहुँचने में कुछ प्रदर्शनकारियों को अधिक समय लग सकता है।
दूसरी ओर, बड़े मैदानों में भीड़ को व्यवस्थित करने, यातायात प्रभावित होने की आशंका कम करने और सुरक्षा प्रबंधन में प्रशासन को सुविधा मिल सकती है। इन लाभों का वास्तविक आकलन तभी हो सकेगा, जब नए स्थलों के लिए विस्तृत नियम और आयोजन संबंधी व्यवस्था सामने आएगी।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है और इसे विरोध दर्ज कराने के अधिकार पर हमला बताया है। इस प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि बहस केवल प्रदर्शन स्थल बदलने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि नए स्थानों पर नागरिक अपनी मांगों को कितनी आसानी से संबंधित अधिकारियों तक पहुँचा सकेंगे।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर भी रहेगी नजर
भारतीय संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति और शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के लिए कानून के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। ऐसे में प्रदर्शन स्थलों का निर्धारण प्रशासनिक जरूरतों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों, दोनों के बीच संतुलन का विषय है।
दिल्ली पुलिस के नए आदेश के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम तीनों स्थलों के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी करना होगा। इन नियमों से ही स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन की अनुमति कैसे मिलेगी और आयोजकों को किन शर्तों का पालन करना होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि जंतर-मंतर का आधिकारिक प्रदर्शन स्थल वाला दर्जा समाप्त कर दिया गया है। रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड अब दिल्ली में निर्धारित विरोध स्थलों की नई सूची में शामिल हैं। इस बदलाव का असर कितना व्यापक होगा, यह आने वाले दिनों में लागू होने वाली व्यवस्था और उसके क्रियान्वयन से तय होगा।

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