गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली प्रदर्शन के 7 मामलों से खुद को किया अलग, जानें वजह
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दिल्ली में हुए प्रदर्शनों से जुड़े सात मामलों की पैरवी से खुद को अलग कर लिया है। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने गुरुवार को सुनवाई के दौरान बार-बार व्यवधान आने और कथित तौर पर एक अन्य वरिष्ठ वकील द्वारा उनका माइक्रोफोन छीन लिए जाने के बाद यह फैसला किया। शंकरनारायणन ने अदालत की कार्यवाही में अनुशासन और गरिमा को लेकर चिंता जताई। ये मामले दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई, कथित अवैध हिरासत और प्रदर्शन के अधिकारों से जुड़े हैं।
क्यों मामलों से हटे गोपाल शंकरनारायणन?
गोपाल शंकरनारायणन ने पुष्टि की कि वह अब इन मामलों में पेश नहीं होंगे। उन्होंने अदालत में हुए घटनाक्रम पर असंतोष जताते हुए कहा कि अदालत की गरिमा उनके मामलों में पेश होने से अधिक महत्वपूर्ण है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान जब उन्होंने पीठ के सामने अपनी दलीलें रखने की कोशिश की, तो उन्हें बार-बार रोका गया। सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि उसी पक्ष की ओर से पेश एक वरिष्ठ महिला वकील ने कथित तौर पर उनका माइक्रोफोन छीन लिया। इसके बाद शंकरनारायणन सुनवाई पूरी होने से पहले अदालत कक्ष से बाहर निकल गए।
यह घटना संबंधित समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। अदालत की ओर से इस विवाद के प्रत्येक पहलू पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है।
किन मामलों की सुनवाई कर रहा था सुप्रीम कोर्ट?
15 अक्टूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली में प्रदर्शनों से संबंधित लगभग 46 याचिकाओं पर सुनवाई की थी। इन याचिकाओं में पुलिस की कथित ज्यादती, हिरासत, लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध, पत्रकारों के अधिकार और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाने जैसे मुद्दे शामिल थे।
गोपाल शंकरनारायणन इनमें से सात मामलों में याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हो रहे थे। उनका इन मामलों से हटना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन याचिकाओं में पुलिस कार्रवाई और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में क्या निर्देश दिए?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई याचिकाओं में केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किए। अदालत ने संबंधित एजेंसियों को सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया।
पीठ ने दोनों पक्षों के वकीलों के लिए समन्वयक अधिवक्ता नियुक्त किए। साथ ही, संबंधित वकीलों को overlapping यानी एक जैसे मुद्दों वाली याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में व्यवस्थित करने और 28 अक्टूबर तक यह प्रक्रिया पूरी करने को कहा, ताकि संबंधित पक्ष अपने जवाब दाखिल कर सकें।
दिल्ली के प्रदर्शनों से जुड़े मुख्य मामलों पर अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
कौन हैं गोपाल शंकरनारायणन?
गोपाल शंकरनारायणन भारत के सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वह संवैधानिक कानून, नागरिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक महत्व के मामलों में पैरवी कर चुके हैं। हाल के दिनों में वह दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रख रहे थे।
उनका यह निर्णय अदालतों में पेशेवर आचरण, वकीलों के बीच समन्वय और न्यायिक कार्यवाही के दौरान अनुशासन के महत्व को लेकर चर्चा का विषय बना है। हालांकि, उनके हटने से संबंधित सात मामलों की आगे की पैरवी कौन करेगा, इसकी जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है।
कुल मिलाकर, गोपाल शंकरनारायणन का सात मामलों से हटना दिल्ली के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी न्यायिक कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब इन मामलों में आगे की सुनवाई, केंद्र और दिल्ली पुलिस के जवाब तथा अदालत के अगले निर्देश महत्वपूर्ण होंगे।

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