गाजियाबाद में खेत में मूली लेने गईं तीन महिलाएं टूटी बिजली लाइन की चपेट में, दो की मौत; युवती गंभीर

गाजियाबाद में खेत में मूली लेने गईं तीन महिलाएं टूटी बिजली लाइन की चपेट में आ गईं। हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि 18 वर्षीय युवती गंभीर रूप से घायल हुई। घटना मंगलवार, 20 अक्टूबर की सुबह राजनगर एक्सटेंशन के पास भोवापुर क्षेत्र में हुई। पुलिस के अनुसार, तीनों महिलाएं सुबह करीब छह बजे खेत में सब्जियां लेने पहुंची थीं। वहां बिजली का तार टूटकर जमीन पर पड़ा था और उसकी चपेट में आने से तीनों को करंट लगा।

मृतकों की पहचान सत्यवती सिंह और रूबी सिंह के रूप में की गई है। घायल युवती देवश्री सिंह है, जो सत्यवती की बेटी बताई गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, रूबी सत्यवती की बहू थी।

तीनों मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र के खिरिया बाखरपुर गांव की रहने वाली थीं और इन दिनों राजनगर एक्सटेंशन में मिगसन सोसायटी के सामने झुग्गियों में रह रही थीं।

मृतकों की उम्र को लेकर प्रकाशित खबरों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में सत्यवती की उम्र 45 और रूबी की 22 वर्ष बताई गई, जबकि बाद की एक रिपोर्ट में उनकी उम्र क्रमशः 50 और 20 वर्ष लिखी गई है।

कैसे हुआ हादसा?

परिजनों के मुताबिक, खेत में मूली लेने के दौरान सबसे पहले रूबी बिजली के तार की चपेट में आई और गिर पड़ी। उसकी आवाज सुनकर सत्यवती उसे बचाने के लिए आगे बढ़ीं, लेकिन वह भी करंट की चपेट में आ गईं। देवश्री ने भी दोनों को बचाने की कोशिश की और उसे बिजली का झटका लगा। खेत में मौजूद कुछ लोगों ने मदद की।

रिपोर्ट के अनुसार, एक स्थानीय व्यक्ति ने कपड़े का इस्तेमाल कर युवती को तार से छुड़ाने में मदद की। इसके बाद तीनों को अस्पताल ले जाया गया।

 

 

अस्पताल में सत्यवती और रूबी को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि देवश्री का इलाज जारी है। पुलिस के शुरुआती बयान के अनुसार, युवती की हालत गंभीर थी; बाद की खबरों में उसकी स्थिति स्थिर बताई गई।

इसलिए उपचार के दौरान उसकी स्थिति पर अस्पताल या प्रशासन की पुष्टि को ही अंतिम माना जाना चाहिए।

 

घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आसपास के लोगों से पूछताछ की। अधिकारियों के सामने यह पता लगाने का सवाल है कि बिजली का तार कब और किन परिस्थितियों में टूटा था तथा उसके टूटने के बाद बिजली आपूर्ति क्यों जारी रही। बिजली विभाग के कर्मचारी घटना के बाद मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त तार की मरम्मत की।

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही है।

तार टूटने की वजह पर अलग-अलग दावे

घटना के कारण और तार की श्रेणी को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। शुरुआती खबरों में इसे हाईटेंशन लाइन बताया गया, जबकि बिजली विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ने एक समाचार रिपोर्ट में कम वोल्टेज वाली बिजली लाइन टूटने की बात कही। उनके अनुसार, सड़क निर्माण से जुड़े डंपर की वजह से तार टूटने की आशंका है। अधिकारी ने बताया कि स्थानीय लोगों के अनुसार, तार सोमवार रात को टूटा था।

वहीं, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारी ने कहा कि संबंधित सड़क परियोजना पूरी हो चुकी है और मामले की जांच कराई जाएगी। इन बयानों से तार टूटने की वजह अभी निर्णायक रूप से स्थापित नहीं होती। पुलिस और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही जिम्मेदारी और घटनाक्रम की पुष्टि हो सकेगी।

इस हादसे ने खेतों और आबादी के नजदीक बिजली की खुली या टूटी लाइन से पैदा होने वाले खतरे को फिर सामने ला दिया है। जमीन पर पड़ा बिजली का तार दूर से सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन उसमें करंट होने पर पास जाना या उसे छूना जानलेवा हो सकता है। ऐसे मामलों में लोगों को तार से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए, दूसरों को भी पास जाने से रोकना चाहिए और बिजली विभाग तथा पुलिस को तुरंत सूचना देनी चाहिए। तार को हटाने या करंट की चपेट में आए व्यक्ति को सीधे छूकर छुड़ाने की कोशिश जानलेवा हो सकती है। बचाव का प्रयास तभी किया जाना चाहिए, जब बिजली आपूर्ति सुरक्षित रूप से बंद होने की पुष्टि हो और प्रशिक्षित मदद उपलब्ध हो।

भोवापुर की घटना में दो महिलाओं की मौत के बाद अब जांच का मुख्य विषय टूटी लाइन की स्थिति, बिजली आपूर्ति और दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी तय करना है। घायल युवती का इलाज जारी है। बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि तार टूटने की सूचना पहले मिली थी या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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By Kanchan

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