किरण बेदी ने बिहार के IPS स्वर्ण प्रभात की तारीफ की, 2 साल में ₹52.66 करोड़ के ड्रग्स जब्त; 100 दोषियों को सजा
नई दिल्ली: भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) स्वर्ण प्रभात और उनकी टीम के नशा विरोधी अभियान की सराहना की है। इस अभियान के तहत पिछले दो वर्षों में लगभग 52.66 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए गए और 100 आरोपियों को अदालत से सजा दिलाई गई। किरण बेदी ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व की बात बताते हुए पुलिस टीम को बधाई दी।
यह अभियान इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें नशीले पदार्थों की बरामदगी और गिरफ्तारियों के साथ अदालत में प्रभावी पैरवी करके दोषियों को सजा दिलाने पर भी ध्यान दिया गया।
Kiran Bedi ने IPS Swarn Prabhat के लिए क्या कहा?
किरण बेदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्वर्ण प्रभात की सराहना करते हुए उन्हें और उनकी पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अभियान की सफलता के लिए दृढ़ संकल्प और नेक नीयत को महत्वपूर्ण बताया।
स्वर्ण प्रभात बिहार कैडर के 2017 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। पूर्वी चंपारण जिले की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने 16 सितंबर 2024 को नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान शुरू किया था। इसके बाद पुलिस ने तस्करी के मामलों में कार्रवाई तेज की और आरोपियों को सजा दिलाने के लिए जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पर जोर दिया।
किरण बेदी की यह प्रतिक्रिया पुलिसकर्मियों के उस काम को भी रेखांकित करती है, जिसमें अपराधियों को गिरफ्तार करने के साथ उनके खिलाफ अदालत में आरोप साबित करना महत्वपूर्ण होता है।
दो साल में 52.66 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ जब्त
पूर्वी चंपारण पुलिस के सितंबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, नशा विरोधी अभियान के दौरान कुल 531 मामले दर्ज किए गए और 669 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस अवधि में जब्त किए गए मादक पदार्थों का अनुमानित मूल्य 52.66 करोड़ रुपये रहा।
पुलिस के आंकड़ों में बरामदगी का विवरण इस प्रकार है:
- गांजा: लगभग 8,967 किलोग्राम, जिसकी अनुमानित कीमत 44.84 करोड़ रुपये बताई गई।
- चरस: लगभग 117.7 किलोग्राम, जिसकी कीमत करीब 2.94 करोड़ रुपये थी।
- अफीम: लगभग 52.5 किलोग्राम, जिसकी अनुमानित कीमत 63 लाख रुपये थी।
- स्मैक: लगभग 22.38 किलोग्राम, जिसकी कीमत करीब 2.91 करोड़ रुपये आंकी गई।
- ब्राउन शुगर: लगभग 2.68 किलोग्राम, जिसकी अनुमानित कीमत 1.34 करोड़ रुपये थी।
इसके अलावा पुलिस ने हशीश और हेरोइन भी बरामद की। ये आंकड़े अभियान की अवधि में दर्ज पुलिस कार्रवाई के हैं।
100 दोषियों को मिली सजा, कई मामलों में लंबी जेल
इस अभियान में पुलिस की एक प्रमुख उपलब्धि अदालतों से सजा दिलाना रही। सितंबर 2026 तक 100 आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका था। इनमें से 64 लोगों को सात साल या उससे अधिक की सजा मिली।
कुछ मामलों में अदालतों ने 15 से 18 साल तक के कारावास की सजा सुनाई। एक मामले में 26.434 किलोग्राम चरस की बरामदगी के बाद दोषी को 18 साल की कैद हुई, जबकि दूसरे मामले में 18.4 किलोग्राम चरस से जुड़े अपराध के लिए 15 साल की सजा सुनाई गई।
पुलिस के अनुसार, करीब 500 अन्य आरोपी अभी मुकदमों का सामना कर रहे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि अभियान में गिरफ्तारियों के साथ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
कौन हैं किरण बेदी?
किरण बेदी वर्ष 1972 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुई थीं और देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं। अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने यातायात प्रबंधन, पुलिस प्रशासन और जेल सुधार जैसे क्षेत्रों में काम किया। दिल्ली की तिहाड़ जेल में सुधारों से जुड़े उनके काम को विशेष पहचान मिली।
वह वर्ष 2016 से 2021 तक पुडुचेरी की उपराज्यपाल भी रहीं। सेवानिवृत्ति के बाद वह सामाजिक मुद्दों, पुलिस सुधार, महिला सशक्तीकरण और सार्वजनिक जवाबदेही पर अपनी राय रखती रही हैं।
स्वर्ण प्रभात के अभियान की सराहना करते हुए उनका संदेश एक महत्वपूर्ण बात पर जोर देता है: नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लड़ाई में केवल जब्ती और गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि मजबूत जांच और अदालत में दोष सिद्ध कराना भी जरूरी है।

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