मन की संवेदनशीलता का सुराग: ‘NIMHANS’ के अध्ययन में बड़ा खुलासा; स्वभाव के 4 आयाम और बचपन की चुनौतियां तय करती हैं मानसिक बीमारी का जोखिम

1,162 लोगों पर किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया—नकारात्मक भावात्मकता, कम प्रयासपूर्ण नियंत्रण और बचपन के आघात मिलकर बढ़ाते हैं सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर और ओसीडी का खतरा।


मानसिक बीमारियां केवल अचानक उत्पन्न नहीं होतीं, बल्कि इनके बीज इंसान के व्यक्तित्व, स्वभाव और बचपन के अनुभवों में छुपे हो सकते हैं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS), बैंगलोर के वैज्ञानिकों और एडीबीएस-सीबीएम (ADBS-CBM Consortium) अनुसंधान दल ने अपने नवीनतम अध्ययन में यह साबित किया है। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘जर्नल ऑफ अफेक्टिव डिसऑर्डर्स’ (Journal of Affective Disorders) में प्रकाशित इस ऐतिहासिक शोध के अनुसार, वयस्क स्वभाव (Adult Temperament) के चार मुख्य आयाम और बचपन के प्रतिकूल अनुभव (Adverse Childhood Experiences – ACEs) आपस में मिलकर यह तय करते हैं कि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से कितना संवेदनशील होगा और उसमें डिप्रेशन, सिज़ोफ्रेनिया या ओसीडी जैसी गंभीर मानसिक स्थितियां विकसित होंगी या नहीं।

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डॉ. बीजू विश्वनाथ, डॉ. संजीव जैन और पी. दयालामूर्ती के नेतृत्व में NIMHANS के शोधकर्ताओं ने 393 परिवारों के 1,162 व्यक्तियों का व्यापक अध्ययन किया। इस सैंपल में सिज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर, ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) और अल्कोहल यूज़ डिसऑर्डर से पीड़ित 532 मरीज, उनके 457 स्वस्थ प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदार (First-Degree Relatives) और 173 सामान्य नागरिक शामिल थे। वैज्ञानिकों ने ‘एडल्ट टेम्परामेंट क्वेश्चनर’ (ATQ) और ‘एसीई इंटरनेशनल क्वेश्चनर’ के जरिए डेटा जुटाया और पाया कि रोगियों के प्रथम-श्रेणी के रिश्तेदारों में भी स्वभाव संबंधी विशेष जैविक लक्षण (Biological Markers) मौजूद थे, जो भविष्य के जोखिम का शुरुआती संकेत देते हैं।

1. स्वभाव के चार व्यापक आयाम: क्या कहते हैं ये लक्षण?

शोधकर्ताओं ने इंसान के वयस्क स्वभाव को चार प्रमुख श्रेणियों में बांटकर अध्ययन किया है:

  1. नकारात्मक भावात्मकता (Negative Affectivity – NA): इसमें व्यक्ति में डर, चिंता, उदासी, चिड़चिड़ापन और असुविधा महसूस करने की उच्च प्रवृत्ति होती है।
  2. बहिर्मुखता / उत्तेजना (Extraversion / Surgency – EV): यह सामाजिक मेलजोल, ऊर्जा का स्तर, उत्साह और सकारात्मक भावनाओं को व्यक्त करने की क्षमता से जुड़ा है।
  3. प्रयासपूर्ण नियंत्रण (Effortful Control – EC): ध्यान केंद्रित करने, आवेगों (Impulses) पर नियंत्रण रखने और विपरीत परिस्थितियों में अपनी भावनाओं को प्रबंधित करने की क्षमता।
  4. अभिविन्यास संवेदनशीलता (Orienting Sensitivity – OS): अपने आसपास के माहौल, सूक्ष्म संवेदी संकेतों, कला, संगीत और आंतरिक विचारों के प्रति असाधारण संवेदनशीलता।

Four Dimensions of Childhood: Brain Mind Culture, and Time – FPR

2. बचपन के प्रतिकूल अनुभव (ACEs) और मानसिक बीमारियों का संबंध

अध्ययन के अनुसार, बचपन की प्रतिकूल परिस्थितियां किस तरह वयस्कों के दिमाग पर असर डालती हैं:

स्वभाव का आयाम / स्थिति सामान्य लक्षण (Characteristics) बचपन के आघात (ACEs) का प्रभाव मानसिक बीमारी का जोखिम
उच्च नकारात्मक भावात्मकता हर बात पर अत्यधिक चिंता व तनाव शारीरिक / भावनात्मक शोषण से तनाव कई गुना बढ़ता है डिप्रेशन, एंग्जायटी व ओसीडी का अत्यधिक खतरा
कम प्रयासपूर्ण नियंत्रण भावनाओं व व्यवहार पर काबू न रहना पारिवारिक अशांति से आत्म-नियंत्रण क्षमता घटती है अल्कोहल की लत व सिज़ोफ्रेनिया का जोखिम
उच्च अभिविन्यास संवेदनशीलता वातावरण के प्रति अति-संवेदनशील होना बचपन की उपेक्षा से मानसिक उलझन बढ़ती है बाइपोलर व मूड डिसऑर्डर की संभावना
उच्च बहिर्मुखता (सुरक्षा कवच) सामाजिक रूप से सक्रिय रहना सकारात्मक संबंध आघात के असर को कम करते हैं मानसिक मजबूती (Resilience) में वृद्धि

3. पहले दर्जे के रिश्तेदारों पर अध्ययन: शुरुआती रोकथाम (Preventive Healthcare) की नई उम्मीद

मानसिक बीमारी के बारे में मिथक और तथ्य

NIMHANS के इस अध्ययन की सबसे बड़ी खोज यह है कि मानसिक रोग से पीड़ित मरीजों के उन सगे-संबंधियों (भाइयों, बहनों व बच्चों) में भी स्वभाव के ये विशिष्ट गुण पाए गए, जो फिलहाल खुद स्वस्थ हैं:

  • अर्ली रिस्क मार्कर्स (Early Risk Markers): स्वभाव के इन पैटर्न से यह पहले ही पहचाना जा सकता है कि परिवार में किसे भविष्य में मानसिक बीमारी होने का अधिक खतरा है।
  • ट्रांसडायग्नोस्टिक दृष्टिकोण: यह अध्ययन केवल किसी एक बीमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साबित करता है कि कई अलग-अलग मानसिक विकारों की जड़ें स्वभाव और बचपन के समान तनावपूर्ण अनुभवों से जुड़ी होती हैं।

4. आगे की राह : मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में क्रांति

इस शोध के आधार पर चिकित्सा क्षेत्र में निम्नलिखित सुधार संभव होंगे:

  • स्कूल स्तर पर स्क्रीनिंग: बचपन में ही कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे बच्चों में ‘प्रयासपूर्ण नियंत्रण’ बढ़ाने के लिए थेरेपी और माइंडफुलनेस ट्रेनिंग।
  • पर्सनलाइज्ड थेरेपी (Personalized Therapy): वयस्कों के स्वभाव (जैसे अत्यधिक नकारात्मक भावात्मकता) को समझकर उनके लिए विशेष कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) तैयार करना।
  • पारिवारिक काउंसलिंग: जिन परिवारों में मानसिक बीमारी का इतिहास है, वहां शुरुआती उम्र में ही बच्चे को सुरक्षित और तनाव-मुक्त माहौल देना।

निष्कर्ष 

NIMHANS का यह अध्ययन हमें सिखाता है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं रातों-रात पैदा नहीं होतीं। हमारा स्वभाव और बचपन में झेली गई परिस्थितियां हमारे दिमाग की बुनावट और संवेदनशीलता को आकार देती हैं। स्वभाव के इन चार आयामों को समझकर और बचपन के आघातों को समय रहते पहचानकर, हम न केवल गंभीर मानसिक बीमारियों को रोक सकते हैं, बल्कि एक अधिक संवेदनशील और स्वस्थ समाज का निर्माण भी कर सकते हैं।

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By Kanchan