चुनाव आयोग ने धांधली के दावों को खारिज किया, इज़राइल चुनाव के नतीजे पक्के हुए; नेतन्याहू की सत्ता पर संकट
इज़राइल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। देश के केंद्रीय चुनाव आयोग ने चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच के बाद अंतिम नतीजों को मंजूरी दे दी है। आयोग को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे साबित हो कि मतदान की निष्पक्षता प्रभावित हुई या चुनाव परिणाम बदल गए। यह फैसला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उन आरोपों के बीच आया है, जिनमें उन्होंने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद किसी भी राजनीतिक गठबंधन को सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं मिला है।
चुनाव आयोग ने जांच के बाद क्या कहा?
इज़राइल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को चुनाव के आधिकारिक परिणामों को मंजूरी दी। आयोग ने कुल 9,069 मतदान केंद्रों की जांच की। इस दौरान राजनीतिक दलों और आम नागरिकों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों की समीक्षा की गई।
आयोग के मुताबिक, जांच में ऐसी कोई अनियमितता सामने नहीं आई, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर असर पड़ा हो या अंतिम नतीजे बदल गए हों। आयोग के कार्यवाहक महानिदेशक डीन लिव्ने ने कहा कि प्रत्येक शिकायत की अलग-अलग और विस्तार से जांच की गई है। घोषित नतीजे मतदाताओं की वास्तविक पसंद को दर्शाते हैं।
चुनाव आयोग के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नोआम सोहलबर्ग ने भी स्पष्ट किया कि कुछ संदेहों की जांच अभी जारी है, लेकिन उनसे पूरे चुनाव परिणाम पर सवाल नहीं उठता।
नेतन्याहू ने चुनाव में धांधली के क्या आरोप लगाए थे?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी के समर्थकों ने चुनाव के बाद अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर मतदाताओं को प्रभावित करने और कथित विदेशी सहायता से चुनाव जीतने के आरोप लगाए थे।
नेतन्याहू का दावा था कि अरब पार्टियों ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है। उनकी पार्टी ने चुनाव में कथित अनियमितताओं और विदेशी हस्तक्षेप की जांच कराने की मांग भी उठाई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग की जांच में इन आरोपों को साबित करने वाला कोई प्रमाण नहीं मिला। आयोग की मंजूरी के दौरान लिकुड और शास पार्टी के प्रतिनिधियों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया और तटस्थ रहे। वहीं विपक्षी प्रतिनिधियों ने परिणामों के समर्थन में मतदान किया।
इज़राइल चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
इज़राइल की 120 सदस्यीय संसद को नेसेट कहा जाता है। यहां सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी होता है।
27 अक्टूबर को हुए चुनाव के अंतिम परिणामों के अनुसार सीटों का बंटवारा इस प्रकार रहा:
| राजनीतिक गठबंधन | सीटें |
|---|---|
| बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन | 53 |
| गादी आइजेनकोट का विपक्षी गठबंधन | 48 |
| अरब नेतृत्व वाली पार्टियां | 19 |
| कुल | 120 |
इस चुनाव में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों रा’आम और जॉइंट लिस्ट ने कुल 19 सीटें हासिल कीं। यह उनका अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। दूसरी ओर नेतन्याहू के गठबंधन को सबसे ज्यादा सीटें मिलने के बावजूद सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का समर्थन नहीं मिला।
राष्ट्रपति इसाक हर्जोग के सामने सरकार गठन की चुनौती
चुनाव आयोग ने अंतिम परिणाम राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंप दिए हैं। अब राष्ट्रपति अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं से बातचीत करेंगे और यह तय करेंगे कि किस नेता को नई सरकार बनाने का पहला अवसर दिया जाए।
राष्ट्रपति को ऐसे उम्मीदवार का चयन करना होगा, जिसके पास संसद में बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना हो। इसके बाद संबंधित नेता को गठबंधन सरकार बनाने के लिए 28 दिन का समय मिलेगा। जरूरत पड़ने पर 14 दिनों का अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है।
विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का समर्थन मिलने की संभावना है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए गठबंधन की बातचीत आसान नहीं होगी।
विदेशी हस्तक्षेप की जांच अभी भी जारी
चुनाव आयोग द्वारा धांधली के आरोपों को खारिज करने के बावजूद इज़राइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े कुछ आरोपों की अलग से जांच कर रही है।
एजेंसी ने विदेशी स्रोतों से कथित रूप से धन पहुंचने और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिशों से संबंधित सूचनाएं साझा की हैं। हालांकि, इस मामले में अभी विस्तृत प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। आयोग का कहना है कि इन संदेहों की जांच जारी रहने के बावजूद चुनाव के प्रमाणित नतीजों पर इसका असर नहीं पड़ता।
इज़राइल के इस चुनाव ने देश की राजनीति में नई स्थिति पैदा कर दी है। चुनाव आयोग ने परिणामों को मंजूरी दे दी है, लेकिन नई सरकार का गठन अभी बाकी है। आने वाले दिनों में राष्ट्रपति की राजनीतिक दलों के साथ बातचीत और गठबंधन बनाने की कोशिशें तय करेंगी कि इज़राइल का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा।

