आवारा कुत्तों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की नज़र: 6 महीने में 15 हज़ार से ज़्यादा की नसबंदी, अब 3 नवंबर को होगी समीक्षा

आवारा कुत्तों के आतंक पर हाई कोर्ट सख्त, मध्‍य प्रदेश सरकार के उठाए कदमों की होगी समीक्षा

मध्य प्रदेश में आवारा कुत्तों का आतंक और डॉग बाइट के मामले लंबे समय से चिंता का कारण बने हुए हैं। अब जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इस मुद्दे पर राज्य सरकार के उठाए क़दमों की समीक्षा करने जा रहा है। सरकार ने अदालत को नसबंदी, टीकाकरण और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा से जुड़े आँकड़े सौंपे हैं।

सरकार ने हाईकोर्ट को क्या बताया?

राज्य सरकार ने अदालत में अपने कामों का ब्योरा पेश किया। इसके अनुसार पिछले छह महीनों में 15 हज़ार से ज़्यादा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण किया गया है।

सार्वजनिक स्थानों की निगरानी

  • पब्लिक प्लेस की निगरानी के लिए 1,62,622 नोडल अधिकारी बनाए गए हैं।
  • एक लाख से ज़्यादा परिसरों में फेंसिंग कराई गई है।

शेल्टर, दस्ते और वाहन

आवारा कुत्तों और मवेशियों पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में क्या-क्या कहा - BBC News हिंदी

  • 12 नगरीय निकायों में डॉग शेल्टर बनाए गए हैं।
  • 28 नगरीय निकायों में डॉग स्क्वाड गठित किए गए हैं।
  • 61 नगरीय निकायों को 81 डॉग कैचर वाहन दिए गए हैं।

हाईकोर्ट अब क्या करेगा?

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ इन क़दमों की समीक्षा करेगी। अगली सुनवाई 3 नवंबर को दोपहर ढाई बजे से होगी। समीक्षा के बाद हाईकोर्ट अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को भेजेगा, जहाँ इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को है।

मामला यहाँ तक कैसे पहुँचा?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की समस्या और उनसे जुड़ी बढ़ती हिंसक घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ...

आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 अगस्त 2025 और 7 नवंबर 2025 को कई निर्देश जारी किए थे। इसके बाद 19 मई 2026 को शीर्ष अदालत ने देश के सभी हाईकोर्ट को इस विषय पर स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने को कहा। इन निर्देशों में स्थानीय निकायों को संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों का समय-समय पर निरीक्षण करने को कहा गया, ताकि कुत्ते उन्हें स्थायी ठिकाना न बना लें। रेबीज वाले या रेबीज के संदेह वाले कुत्तों को शेल्टर होम में रखने के भी निर्देश थे।

भोपाल की घटना और हाईकोर्ट का रुख

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहले से भोपाल में एक बच्ची पर कुत्ते के हमले की घटना का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा था। उस हमले में बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। जुलाई 2026 में अदालत ने नगरीय निकाय और गृह विभाग को आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी कराने के निर्देश दिए और कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट माँगी थी।

आम लोगों के लिए क्या मायने?

  • स्कूल, अस्पताल और बाज़ार जैसे सार्वजनिक स्थलों पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है।
  • कुत्ते के काटने की स्थिति में तुरंत अस्पताल जाकर रेबीज का टीका लगवाना ज़रूरी है।
  • अपने इलाके में समस्या हो तो नगर निगम या नगरीय निकाय में शिकायत दर्ज कराएँ।

आगे की राह

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आँकड़े कागज़ पर उत्साहजनक दिखते हैं, पर असली परीक्षा यह है कि सड़कों पर हालात कितने बदले हैं। 3 नवंबर की सुनवाई में अदालत सरकार से ज़मीनी नतीजों पर भी सवाल कर सकती है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के लिए रिपोर्ट तैयार होगी।

(डिस्क्लेमर: यह लेख सूचना के लिए है। कुत्ते के काटने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।)

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By Kanchan