अमेरिका में आव्रजन एजेंसियों (ICE) और टेक कंपनियों के बीच करोड़ों डॉलर के तकनीकी करारों पर बढ़ा विवाद।

डेटा, एआई और डिपोर्टेशन: अमेरिकी आव्रजन एजेंसी ICE और ‘बिग टेक’ कंपनियों के बीच करोड़ों डॉलर के करारों पर बढ़ा नैतिक विवाद

अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और पालांटिर के क्लाउड व एआई टूल्स से चल रहा डिपोर्टेशन अभियान; टेक कर्मचारियों और मानवाधिकार संगठनों ने ‘#NoTechForICE’ मुहिम चलाकर करारों को रद्द करने की मांग की।

संयुक्त राज्य अमेरिका में आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (U.S. Immigration and Customs Enforcement – ICE) द्वारा चलाए जा रहे व्यापक आव्रजन-प्रवर्तन और डिपोर्टेशन अभियानों के पीछे सिलिकॉन वैली की दिग्गज टेक कंपनियों का डिजिटल ढांचा मुख्य आधार बन गया है। विभिन्न खोजी रिपोर्टों और सार्वजनिक दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि पालांटिर (Palantir Technologies), अमेज़न (Amazon Web Services), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), गूगल (Google) और थॉमसन रॉयटर्स जैसी प्रमुख टेक कंपनियों ने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और ICE के साथ करोड़ों डॉलर के अनुबंध किए हैं। हालांकि, इन तकनीकों के जरिए अप्रवासियों की निगरानी और गिरफ्तारी पर टेक कंपनियों के अपने ही कर्मचारियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गंभीर नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सरकार अपने $44 बिलियन के होमलैंड सिक्योरिटी बजट का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा केवल डेटा मैनेजमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च कर रही है। जहां पालांटिर जैसी डेटा एनालिटिक्स कंपनियां ‘ELITE’ (एन्हांस्ड लीड्स आइडेंटिफिकेशन एंड टारगेटिंग फॉर एनफोर्समेंट) और ‘ImmigrationOS’ जैसे प्रेडिक्टिव सॉफ्टवेयर विकसित कर रही हैं, वहीं अमेज़न (AWS) और माइक्रोसॉफ्ट (Azure) इन विशाल डेटाबेस को सुरक्षित क्लाउड होस्टिंग प्रदान कर रहे हैं। दूसरी ओर, ‘#NoTechForICE’ और ‘ICEout.tech’ अभियानों के तहत गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के सैकड़ों सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने अपनी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEOs) को पत्र लिखकर मानव अधिकारों के हनन में इस्तेमाल हो रही इन तकनीकों के करारों को तुरंत रद्द करने की मांग की है।

1. पालांटिर, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट: ICE को कैसे मिल रही है तकनीकी ताकत?

सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियां अमेरिकी आव्रजन एजेंसियों को कई तरह के एडवांस टूल्स मुहैया करा रही हैं:

  • पालांटिर का ‘ImmigrationOS’ और ‘ELITE’ सिस्टम: पालांटिर ने हाल ही में ICE के साथ $30 मिलियन का नया अनुबंध किया है, जिसके तहत ‘ImmigrationOS’ और ‘ELITE’ नामक एआई सिस्टम बनाए गए हैं। यह तकनीक सरकारी डेटाबेस, प्राइवेट डेटा ब्रोकर और ओपन इंटरनेट के जरिए संदिग्ध अप्रवासियों के ठिकाने, पते और डिपोर्टेशन टारगेट को रीयल-टाइम में ट्रैक करती है।
  • अमेज़न (AWS) और माइक्रोसॉफ्ट (Azure) क्लाउड: आव्रजन एजेंसियों के विशाल बायोमेट्रिक और केस मैनेजमेंट डेटाबेस अमेज़न वेब सर्विसेज और माइक्रोसॉफ्ट के सरकारी क्लाउड सर्वरों पर होस्ट किए गए हैं। इन करारों का कुल मूल्य सौ मिलियन डॉलर से अधिक बताया गया है।
  • थॉमसन रॉयटर्स का 10 लाख लोगों का सर्विलांस डेटा: थॉमसन रॉयटर्स और अन्य डेटा ठेकेदारों ने ICE को $125 मिलियन का ऐसा सिस्टम प्रदान किया है, जो रीयल-टाइम में 10 लाख से अधिक व्यक्तियों की डिजिटल गतिविधियों और बैकग्राउंड पर नजर रख सकता है।

2. नैतिक दुविधा और टेक कर्मचारियों का विद्रोह: ‘#NoTechForICE’

अपनी ही कंपनियों द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर और एआई टूल्स का इस्तेमाल जब आव्रजन छापों और गिरफ्तारियों में होने लगा, तो टेक वर्करों में भारी असंतोष फैल गया:

  • कर्मचारियों का आंतरिक विरोध: पालांटिर, गूगल और अमेज़न के कर्मचारियों ने आंतरिक स्लैक (Slack) चैनलों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। पालांटिर के एक कर्मचारी ने लिखा कि “मेरी राय में इस नेटवर्क के जरिए आव्रजन एजेंसियां मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं।”
  • ‘ICEout.tech’ और मिहेंते (Mijente) का अभियान: ‘मिहेंते’ (Mijente) और नेशनल इमिग्रेशन प्रोजेक्ट जैसे नागरिक अधिकार संगठनों के साथ मिलकर 100 से अधिक टेक वर्करों ने ICEout.tech अभियान शुरू किया है।
  • सीईओ की चुप्पी: कर्मचारियों के भारी विरोध के बावजूद अमेज़न के सीईओ एंडी जैसी (Andy Jassy) और अन्य टेक दिग्गजों ने इन सरकारी करारों पर आधिकारिक रूप से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

3. गोपनीयता (Privacy) और मानवाधिकारों से जुड़े बड़े सवाल

आव्रजन प्रवर्तन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बिग डेटा का यह गठजोड़ कई कानूनी और संवैधानिक सवाल खड़े कर रहा है:

  1. बिना वारंट और प्रोफाइल-आधारित निगरानी: एआई एल्गोरिदम सार्वजनिक और निजी डेटा का विश्लेषण करके बिना किसी आपराधिक वारंट के लोगों के पते और लोकेशंस की भविष्यवाणी (Predictive Targeting) कर रहे हैं।
  2. ससपेक्टेड डेटा और तकनीकी त्रुटियां: यदि एआई सिस्टम में गलत या पुराना एड्रेस डेटा दर्ज हो जाता है, तो निर्दोष लोगों को भी डिपोर्टेशन और पूछताछ का सामना करना पड़ता है।
  3. कॉर्पोरेट मुनाफा बनाम सामाजिक जिम्मेदारी: विश्लेषकों का कहना है कि टेक कंपनियां सरकारी ठेकों से मिलने वाले भारी-भरकम मुनाफे के लिए अपने नैतिक मूल्यों और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) से समझौता कर रही हैं।

निष्कर्ष 

अमेरिकी आव्रजन एजेंसी ICE और सिलिकॉन वैली की टेक कंपनियों का यह गठजोड़ 21वीं सदी में तकनीक, शासन और मानवाधिकारों के बीच गहराते संघर्ष का एक बड़ा उदाहरण है। एक तरफ जहां सरकार और टेक कंपनियां इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ टेक कर्मचारियों, गोपनीयता कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि मानव अधिकारों की कीमत पर तकनीक का व्यावसायिक उपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और निगरानी तकनीकें अधिक उन्नत हो रही हैं, टेक कंपनियों पर अपने करारों में पारदर्शिता और नैतिकता सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बढ़ता रहेगा।

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By Kanchan

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