ट्रैक एंड फील्ड में भारत का दबदबा: 1951 से लेकर 2026 तक एशियाई खेल एथलेटिक्स का स्वर्णिम सफर; जानें रिकॉर्ड्स और महान विजेताओं की कहानी

नई दिल्ली 1951 से शुरू हुआ पदकों का सिलसिला; मिल्खा सिंह, पीटी उषा और नीरज चोपड़ा की विरासत को आगे बढ़ा रहे युवा एथलीट।

एशियाई खेल 2026, 26 सितंबर, लाइव अपडेट: भारत के परिणाम और पदक तालिका देखें

एशियाई खेलों (Asian Games) के इतिहास में यदि किसी एक खेल ने भारत का परचम सबसे ऊंचा लहराया है, तो वह है एथलेटिक्स (Athletics)। 1951 में नई दिल्ली में आयोजित पहले एशियाई खेलों से लेकर 2026 में जापान के आइची-नागोया में हो रहे 20वें संस्करण तक, भारतीय एथलीटों ने ट्रैक एंड फील्ड (Track & Field) स्पर्धाओं में 283 से अधिक पदक जीतकर इतिहास रचा है। ‘फ्लाइंग सिख’ मिल्खा सिंह और ‘पय्योली एक्सप्रेस’ पीटी उषा की ऐतिहासिक सफलताओं से शुरू हुआ यह सफर आज नीरज चोपड़ा, विथ्या रामराज, यशवीर सिंह और गुलवीर सिंह जैसे आधुनिक चैंपियनों के साथ नए आयाम छू रहा है।

एशियाई खेल 2026, 26 सितंबर, लाइव अपडेट: भारत के परिणाम और पदक तालिका देखें

ओलंपिक्स डॉट कॉम (Olympics.com) और एशियन एथलेटिक्स के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एशियाई खेलों में भारत द्वारा जीते गए कुल 770+ पदकों में से एक-तिहाई से अधिक पदक केवल एथलेटिक्स से आए हैं। हालिया एशियाई खेलों में भारतीय एथलीटों ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कई राष्ट्रीय और एशियाई रिकॉर्ड ध्वस्त किए हैं। 2026 आइची-नागोया एशियाई खेलों में भी भारत के युवा धावकों और थ्रोअर्स ने एक ही दिन में 6 पदक जीतकर इतिहास दोहराया है, जिसमें विथ्या रामराज द्वारा पीटी उषा का 42 साल पुराना 400 मीटर बाधा दौड़ का नेशनल रिकॉर्ड तोड़ना और पुरुषों की भाला फेंक (Javelin Throw) स्पर्धा में भारत का डबल पोडियम फिनिश शामिल है।

1. एशियन गेम्स में भारतीय एथलेटिक्स का इतिहास: मिल्खा सिंह से पीटी उषा तक

भारतीय एथलेटिक्स की नींव दो महान दिग्गजों के स्वर्णिम प्रदर्शन पर टिकी है:

  • मिल्खा सिंह (The Flying Sikh): 1958 टोक्यो एशियाई खेलों में 200 मीटर और 400 मीटर में दोहरा स्वर्ण जीतने के बाद, मिल्खा सिंह ने 1962 जकार्ता एशियाई खेलों में भी 400 मीटर और 4×400 मीटर रिले में दो और स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।
  • पीटी उषा (Payyoli Express): 1986 के सिओल एशियाई खेलों में पीटी उषा ने 4 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीतकर पूरे एशिया को स्तब्ध कर दिया था। कुल 11 एशियाई खेल पदकों (4 स्वर्ण, 7 रजत) के साथ पीटी उषा एशियाई खेलों की सबसे सफल भारतीय एथलीट हैं।
  • सचीन नाग और रोशन मिस्त्री: 1951 में सचिन नाग ने 100 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में पहला स्वर्ण जीता था, जबकि रोशन मिस्त्री एशियाई खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी थीं।

2. एशियाई खेल 2026 में नया कीर्तिमान: टूटा 42 साल पुराना रिकॉर्ड

2026 आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय एथलीटों ने फिर से ट्रैक एंड फील्ड में नया इतिहास रचा है:

एशियाई खेलों में भारत ने कब सबसे ज्यादा पदक जीते?

  • विथ्या रामराज का ऐतिहासिक कीर्तिमान: 400 मीटर बाधा दौड़ (Hurdles) में विथ्या रामराज ने पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड (National Record) तोड़ते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया।
  • भाला फेंक (Javelin) में डबल पोडियम: ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा की अनुपस्थिति में युवा एथलीट यशवीर सिंह (85.72m) ने रजत और रोहित यादव (84.35m) ने कांस्य पदक जीतकर पाकिस्तान के अरशद नदीम को पछाड़ते हुए दोहरा पदक जीता।
  • गुलवीर सिंह का दोहरा रजत: लंबी दूरी के धावक गुलवीर सिंह ने 1500 मीटर और 10,000 मीटर दोनों स्पर्धाओं में रजत पदक जीतकर इतिहास दोहराया।

3. हांगझोउ 2023 से नागोया 2026: भारतीय एथलेटिक्स का स्वर्णिम युग

एशियाई खेलों में भारतीय एथलेटिक्स की सफलता के पीछे बेहतर प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और जमीनी स्तर की प्रतिभाएं हैं:

  1. हांगझोउ 2023 का सर्वकालिक रिकॉर्ड: 2023 हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत ने 106 पदकों का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ था, जिसमें अकेले एथलेटिक्स से 29 पदक (6 स्वर्ण सहित) आए थे।
  2. पारुल चौधरी और मुरली श्रीशंकर का निरंतर दबदबा: 5000 मीटर में पारुल चौधरी और लॉन्ग जंप में मुरली श्रीशंकर की पदकों की हैट्रिक ने भारत को पदक तालिका में शीर्ष 5 के करीब बनाए रखा है।
  3. भविष्य की राह: एशियन गेम्स में एथलेटिक्स के इस शानदार प्रदर्शन ने भारतीय खिलाड़ियों को पेरिस और आगामी 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स के लिए नए आत्मविश्वास से भर दिया है।

Two centimetres and a countback: How Indian jumpers Ancy & Sarvesh missed out on gold medal in Asian Games

निष्कर्ष 

एशियाई खेलों में एथलेटिक्स केवल एक खेल नहीं, बल्कि भारतीय खेल इतिहास का गौरवशाली प्रतीक है। 1951 में नई दिल्ली से शुरू हुई यह यात्रा साबित करती है कि भारतीय एथलीटों में एशिया ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ने का पूरा सामर्थ्य है। मिल्खा सिंह और पीटी उषा की दिखाई राह पर चलते हुए आज की युवा पीढ़ी नए रिकॉर्ड बना रही है, जो भारत को एक वैश्विक स्पोर्ट्स सुपरपावर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

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द्वारा Kanchan

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