जबलपुर के कछपुरा रेलवे गुड्स शेड की धूल पर NGT सख्त, रेलवे समेत अधिकारियों से मांगा जवाब; 8 जनवरी को अगली सुनवाई

मध्य प्रदेश के जबलपुर में कछपुरा रेलवे गुड्स शेड से फैल रहे धूल प्रदूषण का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यहां सीमेंट, कोयला, खाद और लौह अयस्क की लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने रेलवे और अन्य संबंधित विभागों से जवाब मांगा है। अधिकरण की भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने 30 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान शेष प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

जबलपुर समाचार: कछपुरा गुड्स शेड में धूल प्रदूषण का क्या है पूरा मामला?

जबलपुर के कछपुरा रेलवे गुड्स शेड में मालगाड़ियों के माध्यम से सीमेंट, कोयला, खाद और लौह अयस्क जैसी सामग्री का परिवहन किया जाता है। इन सामग्रियों की लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान बड़ी मात्रा में धूल उड़ने की शिकायत सामने आई है।

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याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि रेलवे परिसर के आसपास स्थित आवासीय क्षेत्रों, स्कूल और गुलौआ तालाब के आसपास रहने वाले लोगों को इस धूल से परेशानी हो रही है। उनका दावा है कि गुड्स शेड के आसपास रहने वाले करीब 50 हजार लोग इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने अधिकरण में शिकायत की थी कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहले दिए गए निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। इसी के बाद मामले में अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया।

NGT ने रेलवे और अन्य विभागों को क्या निर्देश दिए?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ ने 30 अक्टूबर को हुई सुनवाई में दर्ज किया कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से एक प्रतिवादी का जवाब पहले ही दाखिल किया जा चुका है।

अधिकरण ने शेष प्रतिवादियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले को अगली सुनवाई के लिए 8 जनवरी 2027 की तारीख दी गई है।

यह मामला निष्पादन आवेदन संख्या 08/2026 (CZ) से संबंधित है, जो मूल आवेदन संख्या 39/2025 (CZ) के अंतर्गत दायर किया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि NGT ने फिलहाल गुड्स शेड को बंद करने का आदेश नहीं दिया है और न ही 30 अक्टूबर के आदेश में प्रदूषण उल्लंघन को अंतिम रूप से प्रमाणित किया है।

पहले भी NGT दे चुका है प्रदूषण नियंत्रण के निर्देश

कछपुरा गुड्स शेड का मामला नया नहीं है। इससे पहले 7 अप्रैल 2025 को भी राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे।

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अधिकरण ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गुड्स शेड के आसपास समय-समय पर हवा की गुणवत्ता की निगरानी करने को कहा था। रेलवे को भी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए गए थे।

इन दिशा-निर्देशों में धूल नियंत्रित करने के लिए ढकी हुई भंडारण व्यवस्था, पानी का छिड़काव, पक्की सड़कें, हवा की दिशा में अवरोधक और हरित पट्टी विकसित करने जैसे उपाय शामिल हैं।

अधिकरण ने यह भी कहा था कि यदि हवा की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से नीचे जाती है तो संबंधित विभागों को सुधारात्मक कदम उठाने होंगे।

जबलपुर के लोगों के स्वास्थ्य पर क्या होगा असर?

कछपुरा रेलवे गुड्स शेड के आसपास रहने वाले लोगों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है। सीमेंट और कोयले जैसी सामग्री से उड़ने वाली धूल लंबे समय तक वातावरण में मौजूद रहने पर श्वसन संबंधी परेशानी पैदा कर सकती है।

खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इससे अधिक परेशानी हो सकती है।

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याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त उपाय नहीं किए जा रहे हैं। हालांकि, इस मामले में ताजा वायु गुणवत्ता के आंकड़े और प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़े प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।

8 जनवरी 2027 को होगी अगली सुनवाई

NGT ने रेलवे और अन्य संबंधित विभागों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद 8 जनवरी 2027 को मामले की अगली सुनवाई होगी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रेलवे और संबंधित विभाग प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों के संबंध में क्या जानकारी प्रस्तुत करते हैं। अधिकरण के अगले फैसले से कछपुरा गुड्स शेड के आसपास रहने वाले लोगों को राहत मिलने की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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द्वारा Kanchan