कौन हैं टेवोल्डे गेब्रेमारियम? एयर इंडिया के CEO ने बताया कब लौटेगी कंपनी मुनाफे में, नए विमानों की भी तैयारी
एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) टेवोल्डे गेब्रेमारियम इन दिनों भारतीय विमानन क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि एयर इंडिया बहुत जल्द दोबारा मुनाफे में लौट सकती है। इसके साथ ही कंपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का विस्तार करने के लिए लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले बड़े विमानों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एविएशन इंडिया कार्यक्रम में उन्होंने कंपनी की भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने अक्टूबर 2026 में एयर इंडिया के CEO और प्रबंध निदेशक का पद औपचारिक रूप से संभाला था।
टेवोल्डे गेब्रेमारियम: एयर इंडिया के नए CEO कौन हैं?
टेवोल्डे गेब्रेमारियम इथियोपिया के अनुभवी विमानन क्षेत्र के अधिकारी हैं। उन्हें अंतरराष्ट्रीय विमानन उद्योग में चार दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने वर्ष 1985 में इथियोपियन एयरलाइंस के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी।
शुरुआत में उन्होंने कंपनी के कार्गो और एयरपोर्ट सेवाओं से जुड़े विभागों में काम किया। इसके बाद भारत, सऊदी अरब और उत्तरी अमेरिका में अलग-अलग नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2004 में उन्हें मार्केटिंग एवं सेल्स का कार्यकारी अधिकारी बनाया गया और 2006 में वह कंपनी के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) बने।
1 जनवरी 2011 को उन्होंने इथियोपियन एयरलाइंस समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। वह मार्च 2022 तक इस पद पर रहे। वर्तमान में वह टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया का नेतृत्व कर रहे हैं।
इथियोपियन एयरलाइंस को अफ्रीका की बड़ी एयरलाइन बनाने में निभाई भूमिका
टेवोल्डे गेब्रेमारियम के नेतृत्व में इथियोपियन एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना कारोबार बढ़ाया। उनके कार्यकाल में कंपनी का वार्षिक राजस्व लगभग 1 अरब डॉलर से बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया था।
इस दौरान एयरलाइन के विमानों की संख्या 33 से बढ़कर 130 तक पहुंची और यात्रियों की संख्या लगभग 30 लाख से बढ़कर 1.2 करोड़ हो गई। ये आंकड़े कोविड महामारी से पहले की स्थिति के हैं।
उन्होंने एयरलाइन के साथ कार्गो टर्मिनल, रखरखाव सुविधाओं, विमानन प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास पर भी काम किया। कोविड महामारी के दौरान कंपनी ने यात्री उड़ानों में आई बाधाओं के बावजूद कार्गो और मानवीय सहायता से जुड़ी सेवाएं जारी रखीं।
एयर इंडिया के लिए क्या है टेवोल्डे गेब्रेमारियम का प्लान?
एयर इंडिया इस समय अपने परिचालन, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में टेवोल्डे के सामने कंपनी को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने की चुनौती है।
3 नवंबर को उन्होंने बताया कि एयर इंडिया अपने वाइड-बॉडी विमानों की संख्या बढ़ाना चाहती है। वाइड-बॉडी विमान ऐसे बड़े यात्री विमान होते हैं, जिनमें लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अधिक यात्रियों और सामान को ले जाने की क्षमता होती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने नए विमानों की संभावनाओं पर बोइंग और एयरबस के साथ बातचीत की है। हालांकि, कंपनी कितने नए विमानों का ऑर्डर देना चाहती है, इसकी संख्या अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
टेवोल्डे का मानना है कि नए और अधिक ईंधन-कुशल विमान मिलने से एयरलाइन को अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर विस्तार करने और परिचालन लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
एयर इंडिया को किन चुनौतियों का करना होगा सामना?
टाटा समूह के स्वामित्व में आने के बाद एयर इंडिया ने अपने बेड़े के आधुनिकीकरण, विमान के केबिन में सुधार और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के विस्तार के लिए कई अरब डॉलर की परिवर्तन योजना शुरू की है।
हालांकि, कंपनी के सामने अभी भी कई चुनौतियां हैं। पुराने विमानों के संचालन की ऊंची लागत, भू-राजनीतिक तनाव, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और वैश्विक विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा इसके परिचालन को प्रभावित कर रहे हैं।
विमानन सुरक्षा और समय पर उड़ानों का संचालन भी कंपनी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। टेवोल्डे ने कर्मचारियों से सुरक्षा मानकों, परिचालन विश्वसनीयता और खर्चों पर नियंत्रण को संगठन की कार्यसंस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया है।
शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय अनुभव
टेवोल्डे गेब्रेमारियम ने इथियोपिया की अदीस अबाबा यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन की ओपन यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री हासिल की।
इथियोपियन एयरलाइंस से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने डेल्टा एयरलाइंस और इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) के साथ वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार के रूप में भी काम किया।
अब एयर इंडिया की कमान संभाल रहे टेवोल्डे के सामने भारतीय विमानन क्षेत्र में कंपनी की वैश्विक पहचान मजबूत करने की जिम्मेदारी है। उनकी रणनीति का असर एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और यात्रियों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है।
