Pyre Movie Review: प्यार, अकेलेपन और पलायन की कहानी है विनोद कापड़ी की फिल्म ‘चिता’, जानें कैसी है फिल्म

हिमालय की ऊंची पहाड़ियों के बीच बसा एक ऐसा गांव, जहां कभी लोगों की चहल-पहल हुआ करती थी, लेकिन अब वहां कुछ बुजुर्ग ही रह गए हैं। बच्चे और युवा बेहतर रोजगार और जीवन की तलाश में शहरों की ओर जा चुके हैं। पीछे छूट गए हैं पुराने घर, पहाड़ों की खामोशी और अपनों के लौटने का इंतजार। निर्देशक विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’ (Pyre), जिसे हिंदी में ‘चिता’ नाम दिया गया है, इसी सामाजिक और भावनात्मक वास्तविकता को पर्दे पर उतारती है।

Pyre Movie

30 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म प्रेम, बुढ़ापे, अकेलेपन और उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन की कहानी कहती है। इसमें मुख्य भूमिकाएं पदम सिंह और हीरा देवी ने निभाई हैं। दोनों कलाकार पेशेवर अभिनेता नहीं हैं, लेकिन उनका स्वाभाविक अभिनय फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आता है।

Pyre Movie Review: क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के एक दूरस्थ पहाड़ी गांव में रहने वाले बुजुर्ग दंपती पदम सिंह और तुलसी के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों ने अपनी पूरी जिंदगी इसी गांव में बिताई है। उनके आसपास का सामाजिक जीवन धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है, क्योंकि युवा पीढ़ी रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर चुकी है।

दंपती का इकलौता बेटा हरिया लगभग 28 साल पहले मुंबई चला गया था। लंबे इंतजार के बाद एक दिन उसका पत्र आता है, जिसमें वह घर लौटने की बात कहता है। इस खबर से दोनों के जीवन में फिर से उम्मीद जागती है। तुलसी गांव वालों के लिए दावत की तैयारी करने लगती है, जबकि पदम सिंह भी बेटे के स्वागत को लेकर खुश दिखाई देते हैं।

लेकिन बेटे के आने का इंतजार बार-बार लंबा होता जाता है। इसी बीच उनकी उम्र, खराब स्वास्थ्य और गांव में घटते लोगों की संख्या उनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है।

पदम सिंह और हीरा देवी का अभिनय है फिल्म की जान

फिल्म की सबसे खास बात इसके मुख्य कलाकारों का स्वाभाविक अभिनय है। पदम सिंह और हीरा देवी की वास्तविक जिंदगी जैसी सहजता उनके किरदारों में दिखाई देती है। उनके बीच होने वाली छोटी-छोटी नोकझोंक, एक-दूसरे को चिढ़ाना और साधारण बातचीत रिश्ते की गहराई को सामने लाती है।

दोनों के बीच प्रेम का इजहार बड़े संवादों या भावुक दृश्यों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी गतिविधियों से होता है। पत्नी की तबीयत खराब होने पर पदम सिंह की चिंता और उनकी देखभाल इस रिश्ते को और भावुक बनाती है।

PYRE Film Review: पहाड़ों पर रहने वालों के मार्मिक जीवन का कटु चित्रण...''

फिल्म की यही खूबी है कि यह प्रेम को केवल युवावस्था के रोमांस तक सीमित नहीं रखती, बल्कि दिखाती है कि दशकों साथ बिताने के बाद भी दो लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव कितना मजबूत हो सकता है।

उत्तराखंड के Ghost Villages और पलायन की गंभीर समस्या

‘पायर’ केवल एक बुजुर्ग दंपती की प्रेम कहानी नहीं है। यह उत्तराखंड के उन गांवों की भी कहानी है, जो लगातार पलायन के कारण खाली होते जा रहे हैं।

फिल्म में स्वास्थ्य सुविधाओं, परिवहन और सामाजिक सहयोग की कमी को भी दिखाया गया है। तुलसी की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल पहुंचाना आसान नहीं होता। आसपास के लोगों की मदद और उपलब्ध संसाधनों के सहारे ही दंपती अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर पाते हैं।

पदम सिंह अपने पड़ोसियों को रोकने के लिए उन्हें बकरियां तक दे देते हैं। यह छोटा-सा प्रसंग दिखाता है कि उनके लिए पड़ोसी केवल आसपास रहने वाले लोग नहीं, बल्कि बचे हुए सामाजिक जीवन का आखिरी सहारा हैं।

सिनेमैटोग्राफी और निर्देशन में क्या है खास?

निर्देशक विनोद कापड़ी ने इस फिल्म में तेज रफ्तार कहानी और बड़े नाटकीय दृश्यों के बजाय धीमी और अवलोकनपरक शैली अपनाई है। पहाड़ों के विस्तृत दृश्य, बदलता मौसम, बारिश की आवाज और गांव की खामोशी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते हैं।

फिल्म रिव्यू: 'पायर' - पहाड़ों के पलायन और अकेलेपन की मार्मिक दास्तान | Zoom TV

सिनेमैटोग्राफर मानस भट्टाचार्य की कैमरा संरचना बुजुर्ग दंपती के अकेलेपन को प्रभावी ढंग से सामने लाती है। वहीं, मायकेल डैना का संगीत और जर्मन संपादक पेट्रीसिया रोमल का संपादन फिल्म के भावनात्मक वातावरण को मजबूत करते हैं।

फिल्म की एक सीमा की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। समीक्षा के अनुसार, निर्देशक ने वास्तविक और स्थानीय कहानी को प्रस्तुत करने के लिए विश्व सिनेमा की शैली अपनाई है, लेकिन कुछ दृश्यों में फिल्म का सिनेमाई अंदाज अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया हुआ महसूस होता है। यानी इसकी स्थानीय कहानी और सिनेमाई प्रस्तुति के बीच कभी-कभी दूरी दिखाई देती है।

Pyre Movie Review: फिल्म की खूबियां और कमजोरियां

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसके कलाकारों की सहजता, पहाड़ी जीवन का वास्तविक चित्रण और प्रेम की संवेदनशील प्रस्तुति है। दूसरी ओर, इसकी धीमी गति कुछ दर्शकों के लिए चुनौती बन सकती है।

फिल्म की भावनात्मक गहराई और मुख्य कलाकारों के अभिनय की सराहना की गई है, हालांकि चरम दृश्यों में जरूरत से ज्यादा लिखे गए संवादों को कमजोर पक्ष बताया गया है।  इसके शांत वातावरण और मानवीय रिश्तों की प्रशंसा करते हुए कुछ हिस्सों में दोहराव की बात कही है।

कुल मिलाकर, ‘पायर’ उन दर्शकों के लिए एक संवेदनशील फिल्म है, जिन्हें धीमी गति वाली यथार्थवादी कहानियां पसंद हैं। यह केवल दो बुजुर्गों के रिश्ते की कहानी नहीं, बल्कि उन परिवारों और गांवों की पीड़ा भी दिखाती है, जहां बेहतर भविष्य की तलाश में निकली पीढ़ी अपने पीछे बुजुर्गों को अकेला छोड़ जाती है।

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द्वारा Kanchan

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