अंकिता भंडारी केस : दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर विवाद, माता-पिता का 24 घंटे का अल्टीमेटम; दिल्ली में हिरासत के बाद रिहाई

नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। 19 वर्षीय अंकिता के माता-पिता ने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से उनकी नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की है। परिवार चाहता है कि कथित ‘VIP एंगल’ की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर आगे की कार्रवाई रोकी जाए।

अंकिता भंडारी केस: अचानक BJP नेता दुष्यंत कुमार गौतम क्यों चर्चा में आ गए?

14 अक्टूबर 2026 को अंकिता के माता-पिता ने दिल्ली के इंडिया गेट के पास धरना दिया। अगले दिन तड़के दिल्ली पुलिस ने उन्हें और कुछ अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में रिहा कर दिया। परिवार ने मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम के बाद अंकिता भंडारी मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।

 माता-पिता ने क्या मांग रखी?

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और मां सोनी देवी का कहना है कि उनकी बेटी की हत्या के मामले में कथित VIP की भूमिका की पूरी जांच होनी चाहिए। परिवार ने दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील की है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परिवार ने सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया और मांग पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। सोनी देवी ने यह भी कहा कि यदि उन्हें धरना देने की अनुमति नहीं मिलती है, तो वे घर पर ही भूख हड़ताल करेंगी।

धरने के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं ने परिवार की मांगों का समर्थन किया। हालांकि, इस राजनीतिक समर्थन और परिवार के आरोपों को मामले के न्यायिक निष्कर्ष से अलग समझना जरूरी है।

दुष्यंत कुमार गौतम पर क्या आरोप हैं?

अंकिता के परिवार और कुछ अन्य लोगों ने दुष्यंत कुमार गौतम का नाम कथित VIP एंगल से जुड़े आरोपों में लिया है। परिवार की मांग है कि इस पहलू की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो।

Ankita Bhandari Case: दिल्ली में रातभर प्रदर्शन के बाद अंकिता के माता-पिता रिहा, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति रद्द करने के लिए 24 घंटे का अल्टीमेटम – Suryodaya ...

गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया है और आरोप लगाने वाले कुछ लोगों के खिलाफ मानहानि की कानूनी कार्रवाई भी शुरू की है। दिल्ली हाईकोर्ट में दायर उनके मुकदमे में सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री को लेकर राहत मांगी गई थी।

अब तक उपलब्ध जानकारी में गौतम के खिलाफ अंकिता की हत्या में संलिप्तता साबित करने वाला कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इसलिए उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

CBI जांच में क्या हो रहा है?

जनवरी 2026 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले के कथित VIP एंगल की CBI जांच की सिफारिश की थी। इसके बाद एजेंसी को राज्य पुलिस की प्राथमिकी और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सहित संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए।

अंकिता के परिवार का कहना है कि उन्हें जांच की प्रगति और कथित VIP की भूमिका के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। वे चाहते हैं कि जांच में सामने आने वाले हर विश्वसनीय सुराग की पड़ताल की जाए।

फिलहाल सार्वजनिक रिपोर्टों से जांच के अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं होती। परिवार की मांग है कि जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर रोक लगाई जाए।

क्या था अंकिता भंडारी हत्याकांड?

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी और उनका शव कुछ दिन बाद चीला नहर से बरामद हुआ।

रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को इस मामले में दोषी ठहराया गया था। वर्ष 2025 में अदालत ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

दोषियों को सजा मिलने के बावजूद परिवार कथित VIP की भूमिका की जांच की मांग करता रहा है। दुष्यंत कुमार गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के बाद यह मांग फिर तेज हो गई है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल परिवार की मांग, CBI जांच की स्थिति और दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक तथा कानूनी बहस जारी है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई हिरासत और उसके बाद परिवार की रिहाई ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है।

आगे की स्थिति CBI जांच के निष्कर्ष, परिवार की मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। इस बीच, हत्याकांड में दोषियों को मिली सजा और कथित VIP एंगल की जांच को अलग-अलग मुद्दों के रूप में समझना जरूरी है।

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द्वारा Kanchan

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