जूनियर विकटन पर मद्रास हाईकोर्ट की रोक, पलानी मंदिर भूमि विवाद में पूर्व मंत्री का नाम जोड़ने वाले लेख हटाने का आदेश
चेन्नई: तमिलनाडु की चर्चित तमिल पत्रिका जूनियर विकटन (Junior Vikatan) को पलानी मंदिर की जमीन से जुड़े कथित अनियमितता मामले में मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने पूर्व मंत्री आर. सक्करपानी को इस मामले से जोड़ने वाली विवादित सामग्री हटाने का अंतरिम आदेश दिया है। साथ ही, पत्रिका और संबंधित डिजिटल मंचों को अगली सुनवाई तक इसी तरह की सामग्री प्रकाशित करने से रोक दिया गया है। यह आदेश 9 अक्टूबर 2026 को सामने आया।
यह मामला पूर्व मंत्री आर. सक्करपानी की ओर से दायर मानहानि के मुकदमे से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रकाशित खबरों में उन्हें पलानी मंदिर की जमीन के कथित अवैध लेनदेन से जोड़कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया गया।
Junior Vikatan के खिलाफ अदालत ने क्या आदेश दिया?
मद्रास हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हेमंत चंदनगौदर ने मामले की सुनवाई करते हुए विवादित लेखों और वीडियो को ऑनलाइन तथा सोशल मीडिया मंचों से हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने पत्रिका, संबंधित पत्रकारों और अन्य पक्षों को पूर्व मंत्री को पलानी मंदिर भूमि विवाद से जोड़ने वाली समान सामग्री प्रकाशित करने से भी अंतरिम रूप से रोक दिया।
अदालत ने कहा कि यदि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान ऐसी सामग्री सार्वजनिक रूप से प्रसारित होती रहती है, तो इससे याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से पर्याप्त रूप से नहीं हो सकेगी।
यह अंतरिम आदेश 28 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहने के लिए दिया गया है, जब मामले में अगली सुनवाई निर्धारित है।
क्या है पलानी मंदिर जमीन विवाद?
तमिलनाडु के पलानी में स्थित अरुलमिगु दंडायुधपाणी स्वामी मंदिर से संबंधित जमीन के कथित अवैध पंजीकरण और हस्तांतरण की जांच चल रही है। जांच में मंदिर की जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज किए जाने के आरोपों की पड़ताल की जा रही है।
इसी मामले पर प्रकाशित खबरों में पूर्व मंत्री आर. सक्करपानी से कथित संबंध और बेनामी लेनदेन के दावे किए गए थे। सक्करपानी ने इन खबरों को अपनी प्रतिष्ठा के लिए नुकसानदेह बताते हुए अदालत का रुख किया।
हालांकि, अदालत का वर्तमान आदेश इस बात का अंतिम निर्णय नहीं है कि भूमि विवाद में लगाए गए आरोप सही हैं या गलत। यह मानहानि के मुकदमे के दौरान विवादित सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए दिया गया अंतरिम आदेश है।
आर. सक्करपानी ने क्यों दायर किया मानहानि का मुकदमा?
पूर्व मंत्री ने जूनियर विकटन, उससे जुड़े प्रकाशन संस्थानों, पत्रकारों और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। उनका पक्ष था कि खबरों में उन्हें कथित जमीन घोटाले से जोड़ने के कारण उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई।
अदालत ने प्रथम दृष्टया प्रतिष्ठा को संभावित नुकसान और विवादित सामग्री के प्रसार के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत दी। मुकदमे के अंतिम नतीजे पर निर्णय अभी बाकी है।
आगे क्या होगा?
अब मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी। उस समय अदालत मानहानि के मुकदमे और विवादित सामग्री से संबंधित पक्षों की दलीलों पर आगे विचार कर सकती है।
इस घटनाक्रम ने मीडिया की जवाबदेही, खोजी पत्रकारिता और सार्वजनिक व्यक्तियों की प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन पर एक बार फिर बहस शुरू कर दी है। फिलहाल, जूनियर विकटन पर लगी रोक अंतरिम है और मामले का अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है।

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