FII Selling: जुलाई-अगस्त में खरीदारी के बाद सितंबर में विदेशी निवेशकों ने फिर बदला रुख, घरेलू निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

 

FII Selling: सितंबर में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार की चिंता बढ़ा दी है। 19 सितंबर 2026 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने एक्सचेंज के जरिए करीब ₹23,676 करोड़ के शेयर बेच दिए हैं। ग्लोबल मार्केट में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार के प्रति कमजोर हुआ है।

जुलाई-अगस्त की खरीदारी के बाद सितंबर में फिर बिकवाली

FII Selling का असर सितंबर में भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। साल की शुरुआत से जून तक विदेशी निवेशक लगातार भारतीय इक्विटी से पैसा निकाल रहे थे। मार्च में ही करीब ₹1.15 लाख करोड़ की भारी बिकवाली दर्ज की गई थी। इसके बाद अप्रैल, मई और जून में भी विदेशी पूंजी का आउटफ्लो जारी रहा।

हालांकि जुलाई और अगस्त में तस्वीर कुछ बदली। इन दो महीनों में विदेशी निवेशकों ने मिलकर करीब ₹21 हजार करोड़ से ज्यादा की खरीदारी की। इससे बाजार में उम्मीद बनी कि विदेशी पूंजी का प्रवाह अब दोबारा मजबूत हो सकता है। लेकिन सितंबर के आंकड़ों ने एक बार फिर इस उम्मीद पर दबाव बढ़ा दिया है।

IPO Market में विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार

दिलचस्प बात यह है कि विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली कर रहे हैं, लेकिन IPO यानी प्राइमरी मार्केट में उनकी दिलचस्पी बनी हुई है। 19 सितंबर तक विदेशी निवेशकों ने प्राइमरी मार्केट में करीब ₹2,703 करोड़ का निवेश किया है।

पूरे साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2026 में अब तक प्राइमरी मार्केट में विदेशी निवेशकों की ओर से करीब ₹48,550 करोड़ का निवेश किया जा चुका है। यानी विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों की नई लिस्टिंग और पब्लिक इश्यू में अवसर तलाश रहे हैं, जबकि पहले से लिस्टेड शेयरों में उनका रुख ज्यादा सतर्क दिखाई दे रहा है।

चॉइस वेल्थ के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौर के मुताबिक, विदेशी निवेशक सेकेंडरी मार्केट से दूरी बना रहे हैं, लेकिन नई कंपनियों की लिस्टिंग में उनकी दिलचस्पी बनी हुई है। यही वजह है कि कैश मार्केट में दबाव के बावजूद IPO मार्केट में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

विदेशी निवेशक क्यों बेच रहे हैं भारतीय शेयर?

विदेशी निवेशकों की सितंबर की बिकवाली के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर्स बताए जा रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और करेंसी से जुड़ी चिंताएं प्रमुख हैं।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों के लिए अमेरिकी फिक्स्ड-इनकम एसेट्स ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों में मौजूद जोखिम वाले निवेश को कम करके अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी बॉन्ड की ओर रुख कर सकते हैं।

इसके अलावा ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी बनी हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में क्रूड महंगा होने पर आयात बिल बढ़ सकता है, जिसका असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपये की कीमत पर पड़ सकता है।

घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DIIs बाजार के लिए बड़ा सपोर्ट बने हुए हैं। हालिया कैश मार्केट के आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के मुकाबले घरेलू निवेशकों की खरीदारी मजबूत रही है।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च पबित्रो मुखर्जी के मुताबिक, विदेशी निवेशक लगातार पांचवें हफ्ते नेट सेलर रहे। वहीं घरेलू निवेशकों ने करीब ₹11,232 करोड़ की खरीदारी की। सितंबर में अब तक घरेलू निवेशकों की कुल खरीदारी करीब ₹36,219 करोड़ बताई गई है।

इस घरेलू सपोर्ट की वजह से विदेशी बिकवाली के बावजूद निफ्टी में बहुत बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है। हालांकि, निफ्टी अगस्त के क्लोजिंग स्तर से करीब 3% नीचे कारोबार कर रहा है। इसका मतलब है कि घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को सहारा जरूर दिया है, लेकिन विदेशी पूंजी की निकासी से पैदा हुए दबाव को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सका है।

क्या आगे भी जारी रह सकती है FII Selling?

विदेशी निवेशकों का अगला रुख ग्लोबल बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और रुपये की चाल जैसे कई फैक्टर्स पर निर्भर कर सकता है। वहीं घरेलू म्यूचुअल फंड और संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार को सपोर्ट दे सकती है।

फिलहाल तस्वीर यह है कि विदेशी निवेशक भारतीय सेकेंडरी मार्केट में सतर्क नजर आ रहे हैं, जबकि IPO और प्राइमरी मार्केट में उनका भरोसा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में ग्लोबल मार्केट के संकेत और विदेशी पूंजी का फ्लो भारतीय शेयर बाजार की दिशा के लिए अहम रहेंगे।

Summary

सितंबर 2026 में FII Selling ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 19 सितंबर तक विदेशी निवेशकों ने करीब ₹23,676 करोड़ के शेयर बेचे हैं। इसके पीछे ग्लोबल टेंशन, क्रूड ऑयल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी और IPO मार्केट में विदेशी निवेश की दिलचस्पी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है।

द्वारा admin

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