सत्य निकेतन हादसा: किरण बेदी ने हाई कोर्ट का किया रुख, केंद्र सरकार ने जताई आपत्ति - Lalluram

सत्य निकेतन हादसा: किरण बेदी को याचिका में पक्षकार बनाने पर केंद्र का विरोध, हाईकोर्ट बोला- ‘उनका अनुभव आ सकता है काम’

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए इमारत हादसे को लेकर दायर जनहित याचिका में अब पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर इस मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है, लेकिन केंद्र सरकार ने उनकी इस मांग का विरोध किया है, जिसके बाद अब यह मामला अदालत में और दिलचस्प मोड़ ले चुका है।

क्या है पूरा मामला

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी (पेइंग गेस्ट) की इमारत गिरने की घटना हुई थी, जिसमें छोटे शहरों से बेहतर भविष्य का सपना लेकर आए कई छात्रों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद एडवोकेट अनिकेत कुमार गुप्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की, जिसमें मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने और दिल्ली में सभी पीजी आवासों व हॉस्टलों का संरचनात्मक ऑडिट कराने की मांग की गई है। इससे पहले 7 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे, ताकि यह पता चल सके कि दुर्घटनाग्रस्त इमारत के पास वैध निर्माण अनुमति थी या नहीं। अदालत ने नगर निगम से यह भी स्पष्ट करने को कहा था कि दिल्ली में चल रहे पीजी हॉस्टलों के लिए कोई वैधानिक या कार्यकारी नियम मौजूद हैं या नहीं।

किरण बेदी ने सत्य निकेतन के छात्रों के पीजी भवन ढहने के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

किरण बेदी ने की खुद को पक्षकार बनाने की मांग

इसी बीच किरण बेदी ने इस जनहित याचिका में खुद को पक्षकार बनाए जाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में आवेदन दिया है। उनका कहना है कि एक प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर उनका लंबा अनुभव इस गंभीर मामले में मददगार साबित हो सकता है।

हाईकोर्ट का सकारात्मक रुख

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने किरण बेदी की याचिका पर सकारात्मक टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि किरण बेदी देश की एक जिम्मेदार नागरिक हैं, उनके पास व्यापक प्रशासनिक अनुभव है, और यह मामला व्यापक जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए उनके अनुभव का सकारात्मक इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत ने विधि अधिकारी से सीधे पूछा कि वे इस पर क्या जवाब दाखिल करेंगे।

केंद्र सरकार ने जताई आपत्ति

केंद्र, दिल्ली सरकार और एमसीडी की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने हालांकि किरण बेदी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वे किरण बेदी का “बहुत सम्मान” करते हैं, लेकिन हस्तक्षेप के लिए दी गई उनकी याचिका से ऐसा प्रतीत होता है कि वे इस मामले में पहले से ही किसी निष्कर्ष पर पहुंच चुकी हैं, यानी वे इस मुद्दे पर पहले से पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं। इस आधार पर केंद्र सरकार ने अदालत से अपनी औपचारिक आपत्तियां दाखिल करने के लिए समय मांगा, और अदालत ने उन्हें जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

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आगे की सुनवाई पर टिकीं नजरें

फिलहाल इस मामले में आगे की सुनवाई की तारीख का इंतजार है, जहां यह तय होगा कि किरण बेदी को औपचारिक रूप से इस जनहित याचिका में पक्षकार बनाया जाता है या नहीं। यह मामला सिर्फ एक इमारत हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दिल्ली में चल रहे तमाम पीजी और हॉस्टल भवनों की सुरक्षा मानकों को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। अदालत की तरफ से मांगी गई उच्चस्तरीय जांच रिपोर्ट और संरचनात्मक ऑडिट की मांग से आने वाले समय में दिल्ली में छात्रावास और पीजी सुरक्षा को लेकर नई नीतियां भी सामने आ सकती हैं।

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द्वारा Kanchan

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