US and Iran War 2026: मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य संघर्ष, ऊर्जा संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

 

वर्ष 2026 में मध्य पूर्व का राजनीतिक परिदृश्य एक अभूतपूर्व और गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के सैन्य तथा सामरिक ठिकानों पर की गई सैन्य कार्रवाइयों के बाद US and Iran war का संकट पूरे क्षेत्र में गहरा गया है। इस संघर्ष ने केवल पश्चिमी एशिया की क्षेत्रीय स्थिरता को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि वैश्विक शेयर बाजारों, ऊर्जा आपूर्ति और आपूर्ति श्रृंखला को भी हिलाकर रख दिया है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों से चला आ रहा भू-राजनीतिक तनाव अब एक प्रत्यक्ष और व्यापक सैन्य टकराव का रूप ले चुका है, जिससे दुनिया भर के राष्ट्र चिंतित हैं।

US-Iran War
US-Iran War
US and Iran war की पृष्ठभूमि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी अनिश्चितताओं, क्षेत्रीय गुटबाजी और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ते हमलों से जुड़ी है। वर्ष 2026 की शुरुआत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए बड़े हवाई हमलों के बाद तेहरान ने कड़ा रुख अपनाया। ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों तथा सहयोगियों को निशाना बनाया गया।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष के कारण अमेरिकी सैन्य अभियानों और हथियारों के भंडार पर गहरा असर पड़ा है। इस युद्ध में अब तक 37.5 बिलियन डॉलर से अधिक की सैन्य सामग्री और मिसाइलों की खपत हो चुकी है। इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों की सक्रियता ने सऊदी अरब और लाल सागर के व्यापारिक मार्गों को भी गंभीर संकट में डाल दिया है।
US and Iran war के कारण वैश्विक बाजार और सैन्य संतुलन पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। नीचे दी गई तालिका में इस युद्ध के प्रमुख आयामों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है:
तुलनात्मक मानक (Parameter)
अमेरिकी पक्ष एवं सहयोगी (US & Allies)
ईरानी पक्ष एवं क्षेत्रीय समूह (Iran & Proxies)
सैन्य व वित्तीय खर्च
$37.5 बिलियन से अधिक का प्रत्यक्ष रक्षा खर्च
महत्वपूर्ण सैन्य व बुनियादी ढांचे की क्षति
ऊर्जा व व्यापार मार्ग
लाल सागर व खाड़ी में नौसैनिक सुरक्षा गश्त
हारमुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक पोतों पर नियंत्रण
रणनीतिक लक्ष्य
परमाणु कार्यक्रम रोकना व क्षेत्रीय नियंत्रण
राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा व अमेरिकी दबाव का विरोध
आर्थिक प्रभाव
मुद्रास्फीति और रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी
आर्थिक प्रतिबंध और ऊर्जा निर्यात में रुकावट
इस सैन्य संघर्ष का सबसे भयावह असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला हारमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) दुनिया के कुल कच्चे तेल परिवहन का लगभग एक-पांचवां हिस्सा संचालित करता है।
युद्ध की तीव्रता बढ़ने और जलमार्ग पर मिसाइल तथा ड्रोन हमलों के खतरे के कारण व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (कच्चे तेल) की कीमतें $107 से $110 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। सऊदी अरब की प्रमुख ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए हमलों ने आपूर्ति संकट को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे भारत सहित कई आयात-निर्भर देशों में ईंधन की कीमतें बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
2026 Iran war | Oil, Explained, United States, Israel, Strait of Hormuz, Map, & Conflict | Britannica
बढ़ते सैन्य तनाव और आर्थिक तबाही के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापित करने के प्रयास भी जारी हैं। संयुक्त राष्ट्र, पाकिस्तान और कई मध्य-पूर्वी देशों की मध्यस्थता से संघर्षविराम की बातचीत शुरू करने की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि, परमाणु संवर्धन पर रोक, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और हारमुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता जैसे मूलभूत मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
US and Iran war केवल दो देशों के बीच का सशस्त्र संघर्ष नहीं है, बल्कि यह आधुनिक विश्व की आर्थिक और ऊर्जा व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि समय रहते कूटनीतिक माध्यमों से शांति वार्ता को आकार नहीं दिया गया, तो यह संकट दुनिया को एक लंबे आर्थिक मंदी और अनिश्चितता के दौर में धकेल सकता है।

द्वारा Kanchan