संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे बढ़ी गोरेगांव-मुलुंड की जुड़वां सुरंग: 183 मीटर खुदाई पूरी, दूसरी मशीन ‘विहार’ भी जल्द शुरू
मुंबई के पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों को जोड़ने वाली गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (जीएमएलआर) परियोजना में बड़ी प्रगति हुई है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अनुसार संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे बन रही जुड़वां सुरंगों में अब तक 183 मीटर की खुदाई हो चुकी है। सुरंग खोदने वाली दूसरी मशीन ‘विहार’ का परीक्षण भी पूरा हो गया है और उसके अक्टूबर के अंत तक काम शुरू करने की उम्मीद है।
सुरंग का काम कहां तक पहुंचा?
पहली सुरंग खोदने वाली मशीन (टीबीएम) ‘तुलसी’ को 17 अगस्त 2026 को चालू किया गया था। यह औसतन रोजाना करीब 5.5 मीटर की रफ्तार से खुदाई कर रही है। अब तक सुरंग की दीवार को मजबूती देने वाले 87 स्थायी गोलाकार घेरे और 6 अस्थायी घेरे लगाए जा चुके हैं।
दूसरी मशीन ‘विहार’ ने अपना स्थल स्वीकृति परीक्षण पूरा कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार सभी तकनीकी जांच तय मानकों पर खरी उतरी हैं। अब उसे चालू करने और खुदाई शुरू करने की तैयारी चल रही है।
सुरंगों की खासियत
यह काम परियोजना के तीसरे चरण के (बी) हिस्से में बीएमसी करवा रही है। दोनों सुरंगें समानांतर चलेंगी और हर एक में तीन लेन होंगी। ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक सुरंग की लंबाई करीब 5.3 किलोमीटर है। ये गोरेगांव (पूर्व) की दादासाहेब फालके चित्रनगरी से मुलुंड (पश्चिम) के अमर नगर तक बन रही हैं और संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे से गुजरेंगी।
साल 2024 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस काम का भूमिपूजन किया था, तब सुरंग की लंबाई 4.70 किलोमीटर बताई गई थी। लंबाई के आंकड़ों में अंतर अलग-अलग रिपोर्टों में दिखता है, इसलिए अंतिम आंकड़ा बीएमसी की आधिकारिक विज्ञप्ति से मिलाना बेहतर रहेगा।
दिंडोशी से चित्रनगरी तक उड़ान पुल पूरा
इसी बीच बीएमसी ने गोरेगांव में दिंडोशी कोर्ट से दादासाहेब फालके चित्रनगरी को जोड़ने वाला 1.26 किलोमीटर लंबा उड़ान पुल भी पूरा कर लिया है। यह परियोजना के तीसरे चरण के अंतर्गत बना है। इसमें तीन-तीन लेन की व्यवस्था है और इसे पहले से ढले हुए कंक्रीट के खंडों से तैयार किया गया है।
इस परियोजना से क्या फायदा होगा?
जीएमएलआर का मकसद पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच एक वैकल्पिक मार्ग देना है। 2024 में बीएमसी ने बताया था कि इससे गोरेगांव से मुलुंड का सफर 75 मिनट की जगह करीब 25 मिनट में हो सकेगा। इससे जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर बोझ कम होने की उम्मीद है।
लागत, समय-सीमा और पर्यावरण की चिंताएं
उस समय की जानकारी के अनुसार जुड़वां सुरंग परियोजना की अनुमानित लागत 6,301.08 करोड़ रुपये थी। पूरी जीएमएलआर परियोजना का अनुमानित खर्च लगभग 14,000 करोड़ रुपये बताया गया था। तब सुरंग का काम अक्टूबर 2028 तक पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी। मौजूदा समय-सीमा और लागत की नई जानकारी बीएमसी से लेना जरूरी है।
यह परियोजना संवेदनशील हरित क्षेत्र से जुड़ी है। अक्टूबर 2025 में बीएमसी ने सर्वोच्च न्यायालय से और पेड़ काटने की अनुमति मांगी थी। इससे पहले 14 अगस्त को न्यायालय ने 95 पेड़ों को काटने की इजाजत दी थी। बीएमसी ने क्षतिपूरक वृक्षारोपण के नियमों का पालन करने का भरोसा दिया था।
सुरंग के काम की अगली प्रगति और ‘विहार’ के चालू होने की सूचना आने पर खबर को अद्यतन किया जाएगा।


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