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विश्वकर्मा पूजा 2026: जानिए सृष्टि के प्रथम शिल्पी की पूजन तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और प्रामाणिक पूजन विधि

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मांड की रचना के पश्चात देवताओं को अपने निवास स्थान और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों की आवश्यकता हुई, तब भगवान ब्रह्मा जी के मानस पुत्र भगवान विश्वकर्मा का प्राकट्य हुआ। उन्होंने ही देवताओं के लिए अलौकिक देवलोक, भगवान श्री कृष्ण की दिव्य द्वारका नगरी, रावण की स्वर्ण लंका, इंद्रप्रस्थ और महाभारत काल के हस्तिनापुर का निर्माण किया। इतना ही नहीं, भगवान शिव का त्रिशूल, श्री हरि विष्णु का सुदर्शन चक्र और कुबेर का पुष्पक विमान भी उन्हीं की अद्भुत शिल्प कला की देन हैं।
इसी महान स्थापत्य और शिल्प कला के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए हर साल भाद्रपद मास की कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा 2026 का पर्व पूरे देश में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
अन्य हिंदू त्योहारों की तरह विश्वकर्मा जयंती चंद्रमा की तिथि पर आधारित न होकर सूर्य के संक्रमण (संक्रांति) पर निर्भर करती है। जब सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस दिन कन्या संक्रांति मनाई जाती है और इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है।

पंचांग गणना के अनुसार:

  • कन्या संक्रांति की तिथि: 17 सितंबर 2026 (गुरुवार)
  • सूर्य का राशि परिवर्तन समय: 17 सितंबर 2026 को प्रातः 07:58 बजे सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।
  • इसलिए शास्त्रानुसार विश्वकर्मा पूजा 2026 का पावन पर्व 17 सितंबर 2026 को ही मनाया जाएगा।

भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना के लिए प्रातः काल और मध्याह्न काल का समय अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। हालांकि, पूजा करते समय राहुकाल का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

मुहूर्त का प्रकार (Muhurat Window)
समय सीमा (Timings on 17 Sep 2026)
प्रातःकालीन मुख्य पूजन मुहूर्त
प्रातः 07:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त (अत्यंत शुभ)
दोपहर 01:20 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि एवं रवि योग
प्रातः 07:30 बजे से अपराह्न 04:23 बजे तक
⚠️ राहुकाल (इस समय पूजा न करें)
दोपहर 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक

विश्वकर्मा पूजा का यह पर्व विशेष रूप से इंजीनियरों, शिल्पकारों, कारखाने के मजदूरों, वाहन चालकों और तकनीक से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

इस दिन कार्यस्थलों और औजारों की पूजा निम्नलिखित विधि से की जाती है:

  1. सफाई और स्वच्छता: पूजा के दिन प्रातः काल उठकर स्नान करें और अपने कारखाने, दुकान, वर्कशॉप, गाड़ियों, कंप्यूटरों और सभी लोहे व स्टील के औजारों की अच्छी तरह सफाई करें।
  2. चौकी स्थापना: पूजा स्थल पर एक स्वच्छ चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  3. तिलक और अक्षत: भगवान विश्वकर्मा और सभी औजारों, मशीनों पर रोली, चंदन, हल्दी और कुमकुम से तिलक लगाएं और अक्षत (चावल) अर्पित करें।
  4. धूप, दीप और फूल: धूप-दीप जलाएं, सफेद व पीले फूल चढ़ाएं और फल व मिष्ठान का भोग लगाएं।
  5. यंत्र पूजन एवं मंत्र: हस्तशिल्प और यंत्रों पर अक्षत छिड़कते हुए ओम विश्वकर्मणे नमः (Om Vishwakarmane Namah) मंत्र का 108 बार जाप करें।
  6. आरती और प्रसाद वितरण: अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती गाएं, सुख-समृद्धि और दुर्घटनाओं से रक्षा की प्रार्थना करें और सभी सहयोगियों में प्रसाद बांटें। इस दिन मशीनों को विश्राम देने की परंपरा भी है।
आधुनिक दौर में विश्वकर्मा पूजा 2026 केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे श्रम, तकनीक और कार्यक्षेत्र के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन है। जब हम अपनी मशीनों, औजारों और तकनीक की सुरक्षा और देखभाल करते हैं, तो इससे कार्यकुशलता बढ़ती है और व्यापार में समृद्धि आती है। यह पर्व कारीगरों और मजदूरों के परिश्रम को नमन करने का एक पावन अवसर है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 का यह पावन पर्व हमें सिखाता है कि निर्माण और सृजन ही मानव सभ्यता के विकास का मूल आधार है। 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद आपके व्यापार, नौकरी और कौशल में निरंतर प्रगति और सफलता लाए।

द्वारा Kanchan