रबी सीजन से पहले यूरिया पर सरकार का दावा “स्टॉक पर्याप्त”, पर खेतों में कहीं कतारें, कहीं कालाबाज़ारी
रबी सीजन की बुवाई 1 अक्टूबर से शुरू हो रही है और किसानों की नज़र एक बार फिर यूरिया पर टिकी है। सरकार का कहना है कि देश में खाद का भंडार पर्याप्त है, लेकिन कई इलाक़ों से किल्लत, लंबी कतारों और तय दर से ज़्यादा दाम वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
सरकार का दावा: रिकॉर्ड स्तर पर शुरुआती स्टॉक
29 सितंबर को हुए राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन (रबी अभियान 2026-27) में उर्वरक विभाग ने बताया कि रबी की शुरुआत में खाद का शुरुआती स्टॉक अब तक के ऊँचे स्तर पर है। उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्रा के अनुसार 27 सितंबर तक यूरिया, डीएपी, एमओपी और कॉम्प्लेक्स खादों का कुल स्टॉक 145.46 लाख टन था। इसके अलावा 20.88 लाख टन एसएसपी भी उपलब्ध है। रास्ते में और बंदरगाहों पर मौजूद खाद जोड़ने पर कुल स्टॉक 206.35 लाख टन तक पहुँच सकता है।
यूरिया के आँकड़े
- 1 अप्रैल से 27 सितंबर 2026 तक यूरिया की मौसमी ज़रूरत 190.32 लाख टन थी, जबकि कुल उपलब्धता 249.69 लाख टन रही।
- इस दौरान डीबीटी के ज़रिए 182.20 लाख टन यूरिया बिका।
- 27 सितंबर तक राज्यों के पास 67.51 लाख टन यूरिया का स्टॉक बचा था।
- खरीफ सीजन में 32 यूरिया संयंत्रों ने क़रीब 149 लाख टन का उत्पादन किया।
रबी में कितनी खाद की ज़रूरत?
सरकार का अनुमान है कि रबी सीजन में देश में कुल 380.96 लाख टन खाद की माँग रहेगी। इसमें यूरिया की माँग सबसे ज़्यादा, 199.27 लाख टन रहने का अनुमान है। बाक़ी माँग इस तरह है:
- डीएपी: 55.07 लाख टन
- एमओपी: 16.4 लाख टन
- कॉम्प्लेक्स खाद: 79.12 लाख टन
- एसएसपी: 31.1 लाख टन
सब्सिडी पर क्या फ़ैसला?
उर्वरक सचिव के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के बीच खाद की क़ीमतों में बढ़ोतरी का असर किसानों पर न पड़े, इसलिए केंद्र ने उर्वरक सब्सिडी बढ़ाई है। रिपोर्टों में गैस महँगी होने के बावजूद यूरिया और डीएपी के भंडार पर्याप्त होने की बात भी कही गई है।
खेतों की हक़ीक़त क्या है?
सरकारी दावों के बीच ज़मीनी तस्वीर कई जगह अलग दिखती है।
कतारें और प्रदर्शन
राजस्थान के बूंदी में यूरिया की किल्लत से नाराज़ किसानों ने मेगा हाईवे पर चक्काजाम किया। उनका कहना था कि खाद न मिली तो बुवाई पिछड़ जाएगी। प्रशासन ने बचे हुए क़रीब 150 किसानों को अगली रैक में यूरिया देने की बात कही।
ज़्यादा दाम और ऑनलाइन बुकिंग की उलझन
बिहार में लगातार बारिश के बाद धान की फसल में जान लौटी, तो किसान यूरिया छिड़काव में जुट गए, पर बाज़ार में किल्लत और सरकारी दर से ज़्यादा क़ीमत वसूलने की शिकायतें मिलीं। सारण में ऑनलाइन खाद बुकिंग से परेशान किसानों ने पीओएस मशीन से बायोमेट्रिक सत्यापन या आधार ओटीपी के ज़रिए तुरंत वितरण की माँग की। मध्य प्रदेश में भी ई-टोकन और स्टॉक मिलान की व्यवस्था में किसानों की परेशानी सामने आई। एक केंद्र पर सर्वर की समस्या से वितरण रुका मिला।
किसान संगठनों की माँग
भारतीय राष्ट्रीय किसान महासभा ने केंद्रीय उर्वरक मंत्री को ज्ञापन भेजकर डीएपी और यूरिया का उत्पादन और स्टॉक बढ़ाने की माँग की है।
सरकार का रास्ता: नैनो यूरिया पर ज़ोर
सरकार किसानों को पारंपरिक यूरिया की जगह नैनो यूरिया और दूसरे विकल्प अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। हालाँकि किसानों के बीच इन विकल्पों की स्वीकार्यता और उपलब्धता को लेकर अलग-अलग राय है।
किसान क्या ध्यान रखें?
- खाद हमेशा सरकारी तय दर पर और रसीद के साथ ख़रीदें। ज़्यादा दाम माँगे जाने पर ज़िला कृषि अधिकारी से लिखित शिकायत करें।
- ई-टोकन या पंजीकरण की प्रक्रिया पहले से पूरी रखें और आधार तथा ज़मीन के दस्तावेज़ साथ रखें।
- बुवाई की योजना के अनुसार खाद का अग्रिम इंतज़ाम करें और अनावश्यक भंडारण से बचें, क्योंकि इससे दूसरों के लिए किल्लत बढ़ती है।
- फसल की ज़रूरत के हिसाब से ही यूरिया डालें। ज़्यादा डालने से लागत बढ़ती है और मिट्टी को नुक़सान हो सकता है।
आगे की राह
सरकार के आँकड़े पर्याप्त स्टॉक की ओर इशारा करते हैं, पर असली चुनौती आपूर्ति श्रृंखला और वितरण की है, यानी खाद सही समय पर, सही जगह और सही दाम पर किसान तक पहुँचे। रबी की बुवाई के शुरुआती हफ़्तों में यह परीक्षा सबसे कड़ी होगी।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सूचना के लिए है। आँकड़े सरकारी बयानों पर आधारित हैं और राज्य के अनुसार हालात अलग हो सकते हैं।)

