मैथ्यू आरोन वैनडाइक को अमेरिका लौटने की अनुमति, म्यांमार में ड्रोन प्रशिक्षण मामले में एनआईए ने मांगा 3 महीने का समय
म्यांमार में सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर हथियार और ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने के मामले में जांच का सामना कर रहे अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक को दिल्ली की अदालत ने अमेरिका लौटने की अनुमति दे दी है। 23 अक्टूबर 2026 को राउज एवेन्यू अदालत ने उन्हें अगले साल 24 फरवरी तक विदेश में रहने और अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की छूट दी। इसी मामले में आरोपी छह यूक्रेनी नागरिकों को भी विदेश में रहने की अनुमति बढ़ा दी गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत से जांच पूरी करने के लिए कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय मांगा है। वैनडाइक शुक्रवार को अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपने जब्त निजी सामान को वापस देने के लिए आवेदन भी किया, जिस पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
कौन हैं मैथ्यू आरोन वैनडाइक?
मैथ्यू आरोन वैनडाइक अमेरिकी नागरिक हैं। वह सुरक्षा विश्लेषक और ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ नामक संगठन के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं। इस संगठन का कहना है कि वह आतंकवादी और सशस्त्र समूहों के खतरे का सामना कर रहे समुदायों को सुरक्षा प्रशिक्षण, सलाह और सहायता उपलब्ध कराता है।
वैनडाइक ने अपने सार्वजनिक परिचय में 2011 की लीबियाई क्रांति में भाग लेने और युद्ध के दौरान बंदी बनाए जाने का अनुभव भी साझा किया है। मार्च 2026 में भारत में गिरफ्तारी के बाद उनका नाम म्यांमार से जुड़े हथियार प्रशिक्षण मामले के कारण अंतरराष्ट्रीय समाचारों में आया।
एनआईए ने किस मामले में गिरफ्तार किया था?
एनआईए ने 13 मार्च 2026 को वैनडाइक को कोलकाता हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था। उसी दिन छह यूक्रेनी नागरिकों को भी भारत के अलग-अलग हवाई अड्डों से हिरासत में लिया गया था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सातों विदेशी नागरिक पर्यटन वीजा पर भारत आए, पूर्वोत्तर के कुछ इलाकों में आवश्यक अनुमति के बिना गए और मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचे। वहां उन्होंने म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को हथियार और ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने से जुड़ी गतिविधियों में भाग लिया।
एनआईए ने शुरुआत में मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत भी जांच की थी। हालांकि, सितंबर में दायर आरोपपत्र में आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम, 2025 की धाराएं शामिल थीं, जबकि यूएपीए से जुड़े आरोपों की जांच जारी बताई गई।
ये आरोप हैं, जिन्हें अभी अदालत में अंतिम रूप से साबित नहीं किया गया है।
डिफॉल्ट जमानत कैसे मिली?
सितंबर में दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने वैनडाइक को डिफॉल्ट जमानत दी थी। अदालत ने कहा था कि जांच की निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद दाखिल आरोपपत्र अधूरा था और उसमें यूएपीए के तहत जांच पूरी नहीं हुई थी।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित अवधि में जांच और आरोपपत्र की प्रक्रिया पूरी न होने पर आरोपी को कुछ शर्तों के अधीन डिफॉल्ट जमानत का अधिकार मिल सकता है।
इसके बाद अदालत ने 24 सितंबर को वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को अपने-अपने देशों में परिवार से मिलने के लिए एक महीने की अनुमति दी थी। उन्हें 23 अक्टूबर को अदालत में उपस्थित होना था। वैनडाइक तय तारीख पर भारत लौटे और अदालत में पेश हुए।
24 फरवरी 2027 तक क्या होगा?
23 अक्टूबर की सुनवाई में एनआईए ने कहा कि मामले के कई पहलुओं की जांच बाकी है और साक्ष्य जुटाने के लिए कम से कम तीन महीने चाहिए। अदालत ने वैनडाइक को अमेरिका लौटने और अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से शामिल होने की अनुमति दी। छह यूक्रेनी सह-आरोपियों को भी फरवरी तक भारत से बाहर रहने और अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने की छूट मिली।
वैनडाइक ने अदालत में अपना जब्त निजी सामान लौटाने की मांग भी की है। इस आवेदन पर अभी सुनवाई बाकी है। अदालत ने मामले की अगली तारीख 24 फरवरी 2027 तय की है।
इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि मामला समाप्त हो गया है या आरोपों से उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया है। एनआईए की जांच जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया में ही मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

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