जमीन के मालिकाना हक से मुक्ति: महाराष्ट्र ने लागू किया ‘महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम 2026’, देश का पहला राज्य बना
अब बिना जमीन के भी महिलाओं को मिलेगा स्वतंत्र ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’; सरकारी सब्सिडी, संस्थागत ऋण, फसल बीमा और कृषि योजनाओं का सीधा लाभ।
कृषि क्षेत्र में महिलाओं की वास्तविक और विशाल भागीदारी को औपचारिक पहचान देने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026′ (Act No. XLVI of 2026) को अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत अब कृषि भूमि का मालिकाना हक (Land Ownership) न होने के बावजूद महिलाओं को स्वतंत्र रूप से ‘किसान’ का कानूनी दर्जा और ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’ (Woman Farmer Certificate) प्रदान किया जाएगा। महाराष्ट्र ऐसा कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
भारत के ग्रामीण इलाकों में लगभग 11 करोड़ से अधिक महिलाएं (कुल ग्रामीण महिला कार्यबल का करीब 75%) खेती, पशुपालन और संबद्ध गतिविधियों में जुड़ी हुई हैं। हालांकि, भूमि राजस्व अभिलेख (Land Records) मुख्य रूप से पुरुषों के नाम पर होने के कारण महिलाओं को कृषि आंकड़ों और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं में औपचारिक पहचान नहीं मिल पाती थी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026’ (International Year of the Woman Farmer) के अवसर पर लागू किया गया यह कानून ‘किसान’ की परिभाषा को जमीन के मालिकाना हक के बजाय उसके द्वारा किए जाने वाले वास्तविक कार्य (Activity-based Definition) से जोड़ता है।
1. ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’ से हटेंगी अड़चनें
कानून के तहत वर्ष में कम से कम एक कृषि सत्र (Crop Season) में खेती या संबद्ध कार्य करने वाली सभी महिलाओं को कानूनी मान्यता दी जाएगी:
- व्यापक दायरा: इस कानून में भूमिहीन महिला किसानों, भूमिहीन पशुपालकों, कृषि श्रमिकों (Agricultural Labourers), बागान मजदूरों, मत्स्य पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियों में जुटी महिलाओं को शामिल किया गया है।
- सर्टिफिकेट जारी करने की व्यवस्था: ग्राम सभा, नगर पंचायत और तालुका कृषि अधिकारी के माध्यम से ‘महिला किसान प्रमाणपत्र’ जारी किए जाएंगे।
- कल्याणकारी योजनाओं तक सीधी पहुंच: इस प्रमाणपत्र के जरिए महिलाएं बिना किसी पुरुष अभिभावक या जमीन के दस्तावेज के सरकारी सब्सिडी, फसल बीमा, कृषि प्रशिक्षण, बीज-उर्वरक अनुदान और बैंकों से रियायती दरों पर संस्थागत ऋण (Institutional Credit) प्राप्त कर सकेंगी।
2. संस्थागत ढांचा और डिजिटल रजिस्ट्री की स्थापना
कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य स्तर पर कई संस्थागत तंत्र स्थापित किए जा रहे हैं:
- डिजिटल महिला किसान डेटाबेस: राज्य की सभी प्रमाणित महिला किसानों का एक केंद्रीकृत डिजिटल रजिस्टर (Centralized Digital Registry) तैयार किया जाएगा, ताकि योजनाओं का सीधा हस्तांतरण (DBT) पारदर्शी तरीके से हो सके।
- महाराष्ट्र राज्य महिला किसान कोष: महिला किसानों के कौशल विकास, आजीविका संवर्धन और आपातकालीन सहायता के लिए एक समर्पित राज्य कोष का गठन किया गया है।
- निगरानी समिति और सेल: कानून के क्रियान्वयन और महिला किसानों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए राज्यस्तरीय निगरानी समिति (State Monitoring Committee) और ‘महिला किसान सशक्तिकरण सेल’ बनाए गए हैं।
निष्कर्ष
‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि भारतीय कृषि क्षेत्र में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी मोड़ है। यह कानून उन लाखों अदृश्य महिला हाथों को सामाजिक सम्मान और आर्थिक अधिकार प्रदान करेगा, जो देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में दिन-रात योगदान देती हैं।

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