प्रिया सरोज ने UN में उठाया संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के कदाचार का मुद्दा, भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति दोहराई

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी की युवा सांसद प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत का पक्ष रखते हुए संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक कृत्यों के खिलाफ सख्त जवाबदेही की मांग की। मछलीशहर से लोकसभा सदस्य प्रिया सरोज ने अपने वक्तव्य में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों से जुड़े कथित अपराधों और कदाचार के मामलों में भारत की नीति शून्य सहिष्णुता की है। उन्होंने जांच, कानूनी कार्रवाई और पीड़ितों की सुरक्षा को मजबूत बनाने पर जोर दिया।

MP Priya Saroj delivered India's national statement at the UNGA's 81st Session of the Sixth Committee on the criminal accountability of UN officials and experts on mission. She reaffirmed India's zer

10 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, प्रिया सरोज भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में अमेरिका के न्यूयॉर्क दौरे पर थीं। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हिंदी दिवस समारोह में भी भाग लिया और कई राजनयिकों तथा संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों से मुलाकात की।

UNGA में प्रिया सरोज ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत की ओर से वक्तव्य देते हुए प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों के आपराधिक कृत्यों के मामलों में प्रभावी जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संयुक्त राष्ट्र और सदस्य देशों के बीच बेहतर सहयोग होना चाहिए। जहां आवश्यक हो, वहां संबंधित देशों को समय पर जांच और अभियोजन की कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा तथा सभी संबंधित व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जवाबदेही की प्रभावी व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने यौन शोषण और उत्पीड़न के पीड़ितों की सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र के कोष में सदस्य देशों के निरंतर योगदान की जरूरत पर भी जोर दिया।

क्या है संयुक्त राष्ट्र की छठी समिति?

संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति मुख्य रूप से कानूनी मामलों पर विचार करती है। अंतरराष्ट्रीय कानून, कानूनी सहयोग और विभिन्न वैश्विक समझौतों से जुड़े विषय इसके कार्यक्षेत्र में आते हैं।

मछलीशहर सांसद प्रिया सरोज ने न्यूयार्क में भारत का बढ़ाया मान, संयुक्त राष्ट्र महासभा के हिंदी दिवस समारोह में लिया हिस्सा - machhlishahr mp priya ...

प्रिया सरोज ने एजेंडा आइटम 75 के तहत संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन पर तैनात विशेषज्ञों की आपराधिक जवाबदेही के मुद्दे पर भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत किया। यह विषय अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून के पालन से संबंधित है।

उन्होंने भारत की उस नीति को दोहराया, जिसके अनुसार संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कर्मचारियों के आपराधिक कृत्यों के मामलों में भी निष्पक्ष जांच और लागू कानूनों के तहत कार्रवाई आवश्यक है।

न्यूयॉर्क में हिंदी दिवस समारोह में भी हुईं शामिल

अपने अमेरिका दौरे के दौरान प्रिया सरोज ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान आयोजित किया गया था।

सांसद Priya Saroj ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की छठी समिति में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और मिशन विशेषज्ञों की आपराधिक जवाबदेही ...

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में रवांडा के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत मार्टिन के. नगोगा और संयुक्त राष्ट्र के कंट्रोलर चंद्रमौली रामनाथन से भी मुलाकात की। इन बैठकों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक प्रशासन से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई।

प्रिया सरोज ने अपने दौरे के अनुभव साझा करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंच पर भागीदारी से भारत का दृष्टिकोण रखने और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को समझने का अवसर मिलता है।

कौन हैं प्रिया सरोज?

प्रिया सरोज उत्तर प्रदेश के मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं। वह वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जीतकर संसद पहुंचीं। वह वरिष्ठ समाजवादी नेता और पूर्व सांसद तूफानी सरोज की बेटी हैं तथा कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं।

लोकसभा में प्रिया सरोज विभिन्न जनहित और विकास से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं। उनकी हालिया अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने उन्हें संसद से बाहर वैश्विक मंच पर भी भारत का पक्ष रखने का अवसर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र में उनकी भागीदारी का महत्व केवल एक सांसद के विदेश दौरे तक सीमित नहीं है। जवाबदेही, पीड़ितों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दे वैश्विक संस्थाओं के कामकाज में भरोसा बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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द्वारा Kanchan

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