नोएल टाटा: ₹25,000 करोड़ के प्रस्ताव पर बड़ा कदम, टाटा संस की लिस्टिंग रोकने के लिए तैयार किया नया प्लान

टाटा समूह (Tata Group) में नेतृत्व और भविष्य की कारोबारी रणनीति को लेकर चल रही खींचतान के बीच टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) ने दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव टाटा संस (Tata Sons) के बोर्ड के सामने रखे हैं। इनमें शापूरजी पालोनजी समूह (SP Group) की हिस्सेदारी खरीदने के लिए 25,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था और टाटा संस का पुनर्गठन करके उसे शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचाने का विकल्प शामिल है। 30 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, नोएल टाटा चाहते हैं कि दोनों प्रस्तावों पर 26 नवंबर की बोर्ड बैठक में विस्तृत चर्चा और विचार किया जाए। हालांकि, अभी इनमें से किसी प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है।

बोर्ड को लिखे दो पत्रों में क्या है खास?

नोएल टाटा ने 29 अक्टूबर को टाटा संस के कंपनी सचिव को दो अलग-अलग पत्र भेजे थे। इनमें उन्होंने प्रबंधन से दोनों प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी, कानूनी राय, वित्तीय व्यवस्था, मूल्यांकन और लागू करने की समयसीमा बोर्ड के सामने रखने को कहा है।

पहला प्रस्ताव टाटा संस के पुनर्गठन से जुड़ा है, जबकि दूसरा शापूरजी पालोनजी समूह की हिस्सेदारी खरीदने की संभावित योजना से संबंधित है।

₹25,000 करोड़ में खरीदी जा सकती है SP Group की हिस्सेदारी

शापूरजी पालोनजी समूह के पास टाटा संस की लगभग 18.38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। समूह ने अपनी हिस्सेदारी से बाहर निकलने के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये की मांग की है।

प्रस्तावित योजना के तहत टाटा संस अपने शेयरों की चुनिंदा पूंजी कटौती (Capital Reduction) करके एसपी समूह के शेयर खरीद सकती है। इसके लिए शेयरों का उचित बाजार मूल्य किसी मर्चेंट बैंकर या पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता से निर्धारित कराने का प्रस्ताव है।

इस योजना की कुछ प्रमुख बातें हैं:

  • एसपी समूह को लगभग 25,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा सकता है।
  • भुगतान 18 महीनों के भीतर दो या उससे अधिक किस्तों में करने का प्रस्ताव है।

  • इसके लिए टाटा संस के आंतरिक नकदी प्रवाह और सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
  • नई कंपनियों में बाहरी निवेश और कुछ कारोबारों की भविष्य में शेयर बाजार में हिस्सेदारी बिक्री भी संभावित विकल्प हैं।

हालांकि, इस व्यवस्था के लिए शेयरधारकों की मंजूरी, एसपी समूह की सहमति, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) की स्वीकृति और अन्य नियामकीय अनुमतियां जरूरी होंगी।

टाटा संस  की लिस्टिंग रोकने के लिए क्या है नया प्लान?

नोएल टाटा का दूसरा प्रस्ताव टाटा संस की कारोबारी और नियामकीय संरचना बदलने से संबंधित है। इसके तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स सॉल्यूशंस (TESS) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) का टाटा संस में विलय करने का सुझाव दिया गया है।

यह प्रस्ताव सिर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से 28 सितंबर को सामने आया था। दोनों ट्रस्टों के पास मिलकर टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

इस पुनर्गठन का उद्देश्य टाटा संस को केवल निवेश रखने वाली कंपनी के बजाय परिचालन कारोबार वाली कंपनी के रूप में स्थापित करना है। इससे कंपनी की नियामकीय श्रेणी बदलने और अनिवार्य शेयर बाजार लिस्टिंग से बचने का रास्ता निकल सकता है।

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 11 सितंबर 2026 को टाटा संस की अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी पंजीकरण स्वेच्छा से वापस करने की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद कंपनी पर उच्च स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Upper Layer NBFC) से जुड़े नियम लागू रहने का सवाल फिर महत्वपूर्ण हो गया।

प्रस्ताव के अनुसार, पुनर्गठन से पहले आरबीआई की अनुमति ली जाएगी। इसके बाद ही अन्य कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जा सकेंगी। यह अभी एक संभावित समाधान है, लिस्टिंग से छूट मिलने की अंतिम मंजूरी नहीं।

नोएल टाटा और एन चंद्रशेखरन के बीच क्यों बढ़ी चर्चा?

टाटा समूह के मौजूदा विवाद में नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

दोनों के बीच 25 अक्टूबर को मतभेद दूर करने के उद्देश्य से बैठक हुई थी। इस बातचीत में टाटा संस की लिस्टिंग, एसपी समूह की हिस्सेदारी खरीदने और चंद्रशेखरन के कार्यकाल जैसे विषयों पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।

नोएल टाटा ने सितंबर में टाटा संस बोर्ड की उस प्रक्रिया का भी विरोध किया था, जिसके तहत एन चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 से पांच साल का एक और कार्यकाल देने की मंजूरी मिली थी। उन्होंने बैठक के मतदान और प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज भी मांगे थे।

हालांकि, दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना है। इस पूरे मामले को अभी किसी अंतिम नेतृत्व परिवर्तन या समझौते के रूप में देखना सही नहीं होगा।

12 नवंबर को छह कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे नोएल टाटा

इस बीच नोएल टाटा के कारोबारी पदों में भी बदलाव होने वाला है। 12 नवंबर 2026 को 70 वर्ष पूरे करने के बाद वह टाटा समूह की छह प्रमुख कंपनियों के बोर्ड से हटेंगे।

इनमें ट्रेंट, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल में गैर-कार्यकारी चेयरमैन के पद शामिल हैं। इसके अलावा वह टाटा स्टील और टाइटन कंपनी के उपाध्यक्ष पद भी छोड़ेंगे।

यह बदलाव समूह की निर्धारित सेवानिवृत्ति नीति के तहत हो रहा है और इसे मौजूदा बोर्ड विवाद से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। वह टाटा संस के बोर्ड में ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि निदेशक और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने रहेंगे।

कौन हैं नोएल टाटा?

नोएल नवल टाटा टाटा समूह के अनुभवी कारोबारी और रतन टाटा के सौतेले भाई हैं। वह चार दशक से अधिक समय से टाटा समूह से जुड़े हुए हैं। अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।

उन्होंने लंबे समय तक ट्रेंट और टाटा इंटरनेशनल का नेतृत्व किया। टाटा इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक रहते हुए उन्होंने कंपनी का कारोबार 50 करोड़ डॉलर से बढ़ाकर 300 करोड़ डॉलर से अधिक तक पहुंचाया था।

अब उनके सामने टाटा संस की नियामकीय स्थिति, एसपी समूह की हिस्सेदारी और समूह के भविष्य के नेतृत्व से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की चुनौती है। आने वाली 26 नवंबर की बोर्ड बैठक इन प्रस्तावों की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है।

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द्वारा Kanchan

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