दिव्या मित्तल का बड़ा ऐलान: IAS छोड़कर अब राजनीति में, कहा- किसी पार्टी से नहीं जुड़ेंगी
उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर अपने अगले कदम पर से पर्दा उठा दिया। उन्होंने बताया कि वे अब राजनीति में उतरेंगी, शुरुआत उत्तर प्रदेश से करेंगी, लेकिन किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी। सिविल सेवा छोड़ने के बाद से ही यह सवाल चर्चा में था कि वे आगे क्या करेंगी, सोशल मीडिया पर जारी वीडियो से आखिरकार यह सस्पेंस खत्म हुआ।
इस्तीफे से राजनीति तक का सफर
दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद इस्तीफे का ऐलान किया था। कुछ रिपोर्टों में यह तारीख 20 अगस्त भी बताई गई है, इसलिए सटीक तारीख को लेकर थोड़ा अंतर है। केंद्र सरकार ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया, जो 14 या 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ (अलग-अलग रिपोर्टों में यह तारीख भी थोड़ी अलग बताई गई है)। इस्तीफे के वक्त उन्होंने कहा था कि IAS की नौकरी उनके जीवन का सिर्फ एक चैप्टर है, पूरी जिंदगी नहीं। उन्होंने यह भी साफ किया था कि यह फैसला किसी दबाव या अचानक आए किसी मोमेंट का नतीजा नहीं, बल्कि अपनी प्राथमिकताओं, रुचियों और परिवार को ध्यान में रखकर लिया गया सोचा-समझा कदम है।
कौन हैं दिव्या मित्तल
दिव्या मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत रही है, उन्होंने IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया। इसके बाद वे अप्रैल 2007 से जुलाई 2008 तक लंदन में JPMorgan में एसोसिएट के तौर पर काम करती रहीं। एक अच्छी-खासी कॉरपोरेट नौकरी और पैकेज छोड़कर वे भारत लौटीं, और 2012 में पहले ही प्रयास में UPSC पास कर गुजरात कैडर में IPS बनीं। ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने अगले साल फिर परीक्षा दी और 2013 में उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी बन गईं। उनकी शादी गगनदीप सिंह से हुई है, जो खुद भी IAS अधिकारी हैं।
13 साल में 8 जिलों की जिम्मेदारी
अपने करियर में दिव्या मित्तल ने कई अहम पदों पर काम किया। वे गोंडा में चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर, कानपुर नगर में UPSIDC की ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और बरेली डेवलपमेंट अथॉरिटी की वाइस चेयरमैन रह चुकी हैं। इसके बाद उन्हें जिलाधिकारी (DM) के तौर पर संत कबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिम्मेदारी मिली। मिर्जापुर में DM रहते हुए 2022 में वे खासतौर पर चर्चा में आई थीं, जहां लापरवाह मातहत अधिकारियों पर उनकी सख्त कार्रवाई ने उन्हें पहचान दिलाई। इस्तीफे से पहले वे लखनऊ में राजस्व विभाग में स्पेशल सेक्रेट्री के पद पर तैनात थीं। दिलचस्प बात यह है कि 13 साल की सेवा और 8 जिलों में काम करने के बावजूद, उन्होंने अपने विदाई संदेश में खास तौर पर सिर्फ देवरिया और मिर्जापुर का ही जिक्र किया, और बताया कि इन दोनों जगहों से उन्हें सबसे ज्यादा सीख मिली।
अब आगे क्या
मंगलवार को जारी वीडियो में दिव्या मित्तल ने कहा कि जवाब देने में उन्हें कुछ समय इसलिए लगा क्योंकि वे खुद भी इस नए रास्ते के लिए तैयारी कर रही थीं। उन्होंने साफ किया कि वे राजनीति में उतरेंगी, शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी, लेकिन वे किसी मौजूदा राजनीतिक दल, चाहे वह भाजपा हो, सपा हो या कांग्रेस, किसी का भी हिस्सा नहीं बनेंगी। इससे यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि क्या वे अपना खुद का कोई मंच या संगठन बनाने की योजना बना रही हैं, हालांकि इस बारे में उन्होंने अभी विस्तार से कुछ नहीं बताया है।
नौकरशाही से राजनीति तक, एक चर्चित कदम
किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का बीच करियर में इस्तीफा देकर सीधे राजनीति में उतरना हमेशा से चर्चा का विषय रहा है, और दिव्या मित्तल का यह फैसला भी अलग नहीं है। उनकी सख्त प्रशासनिक छवि, खासकर मिर्जापुर में DM रहते हुए मिली पहचान, को देखते हुए राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर पहले से ही उत्सुकता बनी हुई थी। अब जब उन्होंने खुद अपनी दिशा साफ कर दी है, तो आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में किस तरह अपनी जगह बनाती हैं, और बिना किसी दल के सहारे उनकी यह राजनीतिक यात्रा किस रूप लेती है।

[…] […]