तेजा दशमी 2026: वीर तेजाजी के थानों पर उमड़ी भक्तों की भीड़, जानें कथा और परंपराएं
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में लोक-आस्था के प्रतीक वीर तेजाजी महाराज का पावन पर्व तेजा दशमी इस साल 21 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई गई। पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 सितंबर की शाम से शुरू होकर 21 सितंबर तक रही, जिसे वीर तेजाजी के निर्वाण दिवस के तौर पर मनाया जाता है। इस मौके पर तेजाजी के मंदिरों और थानों पर श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।
कौन थे वीर तेजाजी
वीर तेजाजी को राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में सत्य, वचनबद्धता और गो-रक्षा के प्रतीक लोक देवता के तौर पर पूजा जाता है। लोक कथाओं के अनुसार तेजाजी एक वीर योद्धा थे, जिन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना गायों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। मान्यता है कि एक बार गायों को छुड़ाने के दौरान नागिन ने उन्हें डसने की कोशिश की, लेकिन तेजाजी ने पहले अपना वचन निभाने और गायों को सुरक्षित पहुंचाने का आग्रह किया। अपने वचन और कर्तव्य के प्रति उनकी यही निष्ठा उन्हें लोक देवता के तौर पर पूजे जाने का कारण बनी।
सर्पदंश से सुरक्षा का प्रतीक धागा
तेजा दशमी से जुड़ी सबसे प्रचलित परंपरा है सर्पदंश से सुरक्षा के लिए तेजाजी के नाम का धागा बांधना। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति तेजाजी के नाम का यह पवित्र धागा (तांती) अपने हाथ में बांधता है, उसे सांप के काटने से प्राणों का कोई संकट नहीं होता। तेजा दशमी के दिन भक्त इस धागे को तेजाजी के स्थान (थान) पर खोलकर वहां अर्पित करते हैं, जो उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक तरीका माना जाता है।
कैसे मनाया जाता है यह पर्व
तेजा दशमी से एक दिन पहले, यानी नवमी तिथि की रात, तेजाजी के मंदिरों में रात्रि जागरण का आयोजन होता है, जिसमें भक्त भजन-कीर्तन के जरिए रातभर जागकर तेजाजी की आराधना करते हैं। इसके बाद दशमी तिथि को वीर तेजाजी के मंदिरों में भव्य मेलों का आयोजन किया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में कच्चा दूध, पानी से भरे कच्चे नारियल और चूरमे का भोग चढ़ाते हैं। इस दौरान तेजाजी की शोभायात्रा भी निकाली जाती है, जिसमें भक्त रंग-बिरंगी छतरियां चढ़ाकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कई स्थानों पर चूरमे का सामूहिक भंडारा भी आयोजित किया जाता है, जहां सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप भोजन कराया जाता है।
किन इलाकों में है खास महत्व
तेजा दशमी का पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। राजस्थान में तेजाजी से जुड़े खरनाल, सुरसुरा और परबतसर जैसे स्थानों पर सबसे बड़े और प्रसिद्ध मेले आयोजित होते हैं, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन मेलों में सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रम, पशु मेले और स्थानीय हस्तशिल्प की प्रदर्शनी भी देखने को मिलती है, जो इन आयोजनों को सामाजिक और आर्थिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
लोक आस्था का प्रतीक
तेजा दशमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की समृद्ध लोक परंपरा और सामूहिक आस्था का प्रतिबिंब भी है। वीर तेजाजी की कहानी वचनबद्धता, बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा के मूल्यों को आगे बढ़ाती है, जो आज भी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। हर साल इस पर्व के मौके पर जुटने वाली भीड़ यह दिखाती है कि सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत और प्रासंगिक बनी हुई है।

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