‘जबलपुर में ट्रैफिक सुधारने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी’: एमपी हाई कोर्ट की प्रशासन को फटकार, विशेषज्ञों की समिति बनाने के निर्देश
बदहाल ट्रैफिक सिग्नलों, रोजाना लग रहे जाम और सड़कों पर अवैध अतिक्रमण से नाराज हुआ हाई कोर्ट; 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर मुख्य पीठ) ने संस्कारधानी जबलपुर शहर की खस्ताहाल यातायात व्यवस्था, बंद पड़े ट्रैफिक सिग्नलों, अमानक स्पीड ब्रेकरों और सड़कों पर पसरे अवैध अतिक्रमण को लेकर राज्य सरकार और स्थानीय नगर निगम व पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। शहर की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के संबंध में दायर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की पीठ ने दोटूक टिप्पणी की कि “जबलपुर शहर में ट्रैफिक प्रबंधन को सुधारने के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है, अधिकारी केवल तारीखों पर तारीखें मांगने के बजाय अपनी जिम्मेदारियों को समझें।”
जबलपुर मध्य प्रदेश का एक प्रमुख महापौराणिक और वाणिज्यिक केंद्र है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ती वाहनों की संख्या, योजनाहीन निर्माण कार्य, और प्रमुख चौराहों (जैसे रसल चौक, नौदरा ब्रिज, छोटी ओमती, दमोह नाका और मदन महल) पर लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम ने आम नागरिकों का जीना मुहाल कर दिया है। शहर में करोड़ों रुपये खर्च कर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल अक्सर बंद या खराब रहते हैं। हाई कोर्ट में दायर याचिका में इन सभी अव्यवस्थाओं को उजागर करते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
1. ‘अधिकारी अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी समझें’: हाई कोर्ट का कड़ा रुख
हाई कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के दौरान नगर निगम कमिश्नर, ट्रैफिक पुलिस और जिला प्रशासन के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया:
- सिर्फ आश्वासनों से नहीं चलेगा काम: अदालत ने कहा कि समय-समय पर पेश की जाने वाली प्रशासनिक रिपोर्टों और कागजी दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। नागरिक रोज घंटों ट्रैफिक जाम में फंस रहे हैं।
- अतिक्रमण मुक्त सड़कों का संकल्प: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य सड़कों, बाजारों और चौराहों पर हुआ अवैध अतिक्रमण ही ट्रैफिक जाम की सबसे बड़ी वजह है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन को आपसी समन्वय स्थापित कर सड़कों को स्थाई रूप से अतिक्रमण मुक्त बनाना होगा।
- अमानक स्पीड ब्रेकर बने दुर्घटना का कारण: अदालत ने शहर में बिना किसी तकनीकी मानक के बनाए गए अमानक स्पीड ब्रेकरों पर भी सख्त रुख अपनाया और उन्हें नियमानुसार सुधारने के निर्देश दिए।
2. ट्रैफिक विशेषज्ञों की समिति (Expert Committee) गठित करने का निर्देश
अदालत ने केवल नाराजगी ही नहीं जताई, बल्कि शहर में स्थाई ट्रैफिक समाधान के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए:
- विशेषज्ञों का समावेश: हाई कोर्ट ने शासन और जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि जबलपुर के ट्रैफिक प्रबंधन के लिए नगर नियोजकों (Urban Planners), ट्रैफिक विशेषज्ञों और सिविल इंजीनियरों की एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए।
- वैज्ञानिक मास्टर प्लान: यह समिति शहर के प्रमुख चौराहों, सँकरे रास्तों (Bottlenecks), पार्किंग स्थलों और सिग्नल टाइमिंग का वैज्ञानिक अध्ययन करेगी और एक व्यावहारिक ट्रैफिक मास्टर प्लान तैयार करेगी।
- तकनीकी सुधार: बंद पड़े स्मार्ट सिग्नलों को तत्काल चालू करने और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तथा सीसीटीवी कैमरों की मदद से ई-चालान व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए।
3. 28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई, मांगी गई प्रगति रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस जनहित याचिका की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में तय की है:
- कार्रवाई रिपोर्ट (Action Taken Report) तलब: कोर्ट ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक (यातायात) और नगर निगम से आगामी सुनवाई तक की गई ठोस कार्रवाई की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट शपथ पत्र पर पेश करने के निर्देश दिए हैं।
निष्कर्ष
सुचारू यातायात और सुरक्षित सड़कें किसी भी विकसित शहर की मूलभूत पहचान होती हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह कड़ा रुख जबलपुर के नागरिकों के लिए राहत की किरण लेकर आया है। अब देखना यह होगा कि हाई कोर्ट की इस सख्त हिदायत के बाद स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस नींद से जागकर धरातल पर कोई ठोस बदलाव लाती है या फिर व्यवस्था केवल कागजी बहसों तक ही सीमित रहती है।
