मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गहराया विवाद: चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद की खबरों के बाद हटाने की मांग तेज
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों पर दो अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा 14 बार आपत्ति जताने का दावा; विपक्ष ने आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल।
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC Gyanesh Kumar) ज्ञानेश कुमार एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के केंद्र में आ गए हैं। 23 सितंबर 2026 को कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीआई(एम) और पीडीपी सहित प्रमुख विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के पद से हटाने और उनके फैसलों की जांच कराने की मांग की है। यह विवाद तब भड़का जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) से संबंधित फैसलों पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
1988 बैच के केरल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और आईआईटी कानपुर के छात्र रहे ज्ञानेश कुमार ने फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। वर्तमान में वह देशभर में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण के लिए चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR-2026) अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग में बिना पूर्ण सहमति के एकतरफा निर्णय लिए गए, जिससे चुनाव आयोग की संवैधानिक निष्पक्षता प्रभावित हुई है।
1. चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद की रिपोर्ट और विपक्ष के आरोप
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयोग के दो अन्य चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों के दौरान मतदाता सूची संशोधन से संबंधित कई निर्णयों पर कम से कम 14 बार औपचारिक लिखित आपत्तियां जताई थीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ महत्वपूर्ण निर्णय उनकी बिना जानकारी या सहमति के लिए गए थे:
- वोटर सूची से नाम हटाना: चुनाव आयुक्तों ने विभिन्न राज्यों में प्रक्रियात्मक कमियों और मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने (Deletion of Names) पर सवाल उठाए थे।
- विपक्ष का रुख: विपक्षी नेताओं ने इसे “एकतरफा तानाशाही” (One-man autocracy) करार देते हुए कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग या हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए तथा एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगानी चाहिए।
2. वैश्विक मंच पर नेतृत्व: ‘इंटरनेशनल आईडीईए’ की अध्यक्षता
विवादों के बीच, ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि यह रही है कि भारत को वर्ष 2026 के लिए ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस’ (International IDEA) के परिषद का अध्यक्ष चुना गया है।
- वैश्विक लोकतांत्रिक अनुभव: स्वीडन के स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में ज्ञानेश कुमार ने इस अंतरराष्ट्रीय संस्था की अध्यक्षता संभाली थी।
- अनुभवों का आदान-प्रदान: भारत 90 करोड़ से अधिक मतदाताओं और विशाल चुनावी तंत्र के संचालन के अपने अनुभवों को दुनिया भर के 35 सदस्य देशों के साथ साझा कर रहा है।
निष्कर्ष
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ पर उठे सवाल भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक संस्थाओं की साख के लिए अत्यंत संवेदनशील हैं। जहां एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चुनाव आयोग को सराहना मिल रही है, वहीं घरेलू स्तर पर चुनाव आयोग के भीतर पारदर्शिता, पूर्ण सहमति और राजनीतिक दलों का विश्वास बहाल करना मुख्य निर्वाचन आयुक्त के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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