वैश्विक व्यापार में निष्पक्षता और बराबरी का संदेश: भारत ने डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण के खिलाफ WTO-अनुरूप उपायों की मांग की; जी-20 में पीयूष गोयल का बड़ा बयान
अमेरिका के मिल्वौकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों के सम्मेलन में भारत ने रखा पक्ष; कहा—सप्लाई चेन विविधीकरण के नाम पर विकासशील देशों पर न थोपी जाएं असंवैधानिक शर्तें।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में निष्पक्ष, पारदर्शी और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था की पैरवी करते हुए भारत ने स्पष्ट किया है कि दुनिया भर में अनुचित व्यापार बाधाओं, डंपिंग (Dumping) और प्रेडेटरी प्राइसिंग (अनुचित मूल्य निर्धारण) की चुनौतियों से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदम विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के पूर्णतः अनुरूप होने चाहिए। अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य स्थित मिल्वौकी में आयोजित जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक (G20 Trade Ministers’ Meeting) के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसी भी देश की ओर से एकतरफा प्रतिबंध लगाने के बजाय डब्ल्यूटीओ के स्थापित बहुपक्षीय तंत्र का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
जी-20 सम्मेलन में ‘संरचनात्मक अतिरिक्त उत्पादन क्षमता’ (Structural Excess Capacity) और आपूर्ति श्रृंखला पर आयोजित सत्र में पीयूष गोयल ने भारत का रुख मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि कुछ अर्थव्यवस्थाओं में गुप्त सब्सिडी (Hidden Subsidies) और सरकारी संरक्षण के कारण जब कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में विनिर्माण केंद्रित हो जाता है, तो उससे वैश्विक बाजारों में डंपिंग और कृत्रिम रूप से कम कीमतों पर सामान बेचने का संकट खड़ा होता है। भारत इस चिंता को साझा करता है, लेकिन इसका समाधान एकतरफा शुल्क लगाने के बजाय डब्ल्यूटीओ के एंटी-डंपिंग (Anti-Dumping Duties) और काउंटरवेलिंग कर्तव्यों (Countervailing Duties) जैसे साक्ष्य-आधारित और न्यायिक समीक्षा के दायरे में आने वाले तंत्रों के माध्यम से ही संभव है।
1. अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर भारत की स्थिति: 1.4 अरब आबादी की मांग
सम्मेलन के दौरान जी-20 प्रेसीडेंसी द्वारा उठाए गए स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी के मुद्दे पर पीयूष गोयल ने भारत की स्थिति स्पष्ट की:
- घरेलू मांग संचालित अर्थव्यवस्था: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जो अपनी 1.4 अरब आबादी की घरेलू जरूरतों और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए विनिर्माण कर रहा है।
- कोई ‘एक्सेस कैपेसिटी’ नहीं: जी-20 द्वारा चिन्हित क्षेत्रों में भारत के पास कोई अवांछित या बाजार को बिगाड़ने वाली अतिरिक्त क्षमता (Structural Excess Capacity) नहीं है।
- विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला (Trusted Supply Chain): भारत डिजाइन से लेकर अंतिम उत्पाद तक संपूर्ण विनिर्माण मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर रहा है और वैश्विक सप्लाई चेन में एक पारदर्शी व भरोसेमंद भागीदार के रूप में उभर रहा है।
2. जी-20 में भारत द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु (Key Pillars of India’s Statement)
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों पर भारत के प्रमुख रुख का तुलनात्मक अवलोकन:
| नीतिगत क्षेत्र (Policy Focus) | भारत का रुख व मांग (India’s Stance & Demand) | मुख्य उद्देश्य (Core Objective) |
|---|---|---|
| डंपिंग व प्रेडेटरी प्राइसिंग | डब्ल्यूटीओ-अनुरूप एंटी-डंपिंग व काउंटरवेलिंग ड्यूटी लागू हो | एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों व टैरिफ युद्ध को रोकना |
| विकासशील देशों का अधिकार | नीतिगत स्थान (Policy Space) और विशेष व्यवहार बरकरार रहे | विकासशील देशों के औद्योगिक विकास का बचाव |
| मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) | पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार प्रणाली का संरक्षण | सबसे छोटे और बड़े व्यापारी को समान अवसर |
| डब्ल्यूटीओ सुधार | दो-स्तरीय विवाद समाधान प्रणाली (Dispute Settlement) की बहाली | अपीलीय निकाय को पुनः सक्रिय कर निष्पक्ष न्याय |
3. सप्लाई चेन विविधीकरण और विकासशील देशों की चिंताएं
पीयूष गोयल ने पश्चिमी देशों द्वारा सप्लाई चेन के पुनर्गठन के नाम पर उठाए जा रहे कदमों पर सचेत किया:
- विविधीकरण के नाम पर मनमानी नहीं: आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण (Diversification) एक वैध उद्देश्य है, लेकिन इसे डब्ल्यूटीओ नियमों से बाहर जाने या विकासशील देशों पर आर्थिक समायोजन का बोझ डालने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।
- सहमति-आधारित निर्णय: डब्ल्यूटीओ के भीतर कोई भी निर्णय सर्वसम्मति (Consensus-Based Decision Making) से ही लिया जाना चाहिए, ताकि वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के हितों की रक्षा हो सके।
- जबरन श्रम (Forced Labour) पर रुख: भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जबरन श्रम के पूर्ण उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है (भारतीय संविधान का अनुच्छेद 23 इसे प्रतिबंधित करता है), लेकिन इसके नाम पर किसी पूरे देश या क्षेत्र पर बिना साक्ष्य के एकतरफा प्रतिबंध लगाना अनुचित है।
निष्कर्ष
जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में भारत का संदेश स्पष्ट है—वैश्विक व्यापार का संतुलन किसी एकतरफा नीति या व्यापार युद्ध से नहीं, बल्कि नियम-आधारित बहुपक्षीय संस्थाओं की मजबूती से ही संभव है। डब्ल्यूटीओ के सिद्धांतों का पालन करते हुए डंपिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण पर लगाम लगाना तथा विकासशील देशों को उनके औद्योगीकरण का पूरा अधिकार देना ही एक न्यायसंगत और टिकाऊ वैश्विक अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करेगा।
