जगन मोहन रेड्डी का आरोप: आंध्र प्रदेश के निकाय चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन से रोका जा रहा
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने राज्य की चंद्रबाबू नायडू सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका जा रहा है, उन्हें धमकाया जा रहा है और उन पर हमले हो रहे हैं। यह बयान उन्होंने 16 अक्टूबर 2026 को ताडेपल्ली स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता में दिया। ये सभी आरोप जगन और उनकी पार्टी के हैं। सरकार का पक्ष अभी स्पष्ट नहीं है।
क्या हैं मुख्य आरोप?
जगन मोहन रेड्डी ने सवाल उठाया कि क्या राज्य में संविधान और कानून का शासन चल रहा है। उनके अनुसार लोकतंत्र में हर उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन विपक्षी उम्मीदवारों को कथित तौर पर नामांकन केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया।
उन्होंने दावा किया कि कडप्पा, पुंगनूर और तिरुपति में वाईएसआरसीपी के सांसदों और कार्यकर्ताओं को बाधाओं का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक कई जगह नामांकन पत्र जब्त किए गए या स्वीकार नहीं हुए, वाहनों पर हमले हुए और समर्थकों की पिटाई हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीडीपी के समर्थकों को समूह में पहुंचने की छूट मिली, जबकि नियमों में चार लोगों को साथ आने की इजाजत होने के बावजूद वाईएसआरसीपी कार्यकर्ताओं को केंद्रों में घुसने नहीं दिया गया।
सांसद पर हमले की निंदा
जगन ने पार्टी के लोकसभा नेता और राजमपेट के सांसद पेद्दा रेड्डी मिथुन रेड्डी पर हुए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने सांसद से फोन पर बातचीत कर उनका हालचाल भी जाना। इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नायडू ने राज्य को ‘जंगल राज’ बना दिया है और सत्ता पक्ष स्थानीय निकाय चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराना नहीं चाहता। उनके अनुसार गठबंधन सरकार के ढाई साल बाद जनता में नाराजगी बढ़ रही है और हार के डर से लोकतंत्र-विरोधी तरीके अपनाए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
जगन ने राज्य निर्वाचन आयोग और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या आयोग निष्पक्ष तरीके से काम कर रहा है और विपक्षी उम्मीदवारों को सुरक्षा देने में पुलिस क्यों नाकाम हो रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर रुख में बदलाव
एक और बात ने राजनीतिक गलियारों में ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार जगन ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून को पहले समर्थन देना उनकी पार्टी की गलती थी और अब उन्हें इस पर खेद है। उन्होंने मांग की कि इन नियुक्तियों पर सत्तारूढ़ राजनीतिक नेतृत्व का नियंत्रण न हो और चयन की जिम्मेदारी किसी निष्पक्ष संस्था को दी जाए। साथ ही उन्होंने चुनाव सुधारों की जरूरत बताई। इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या वाईएसआरसीपी का एनडीए से रिश्ता बदल रहा है। इस बारे में पार्टी ने कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
सरकार और टीडीपी का पक्ष
अभी तक मेरे देखे सार्वजनिक रिपोर्ट्स में सरकार या टीडीपी की ओर से इन विशिष्ट आरोपों पर विस्तृत जवाब नहीं मिला है। नामांकन में बाधा, धमकी और हमलों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी बाकी है। राज्य निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया और पुलिस जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
आगे क्या?
निकाय चुनाव की प्रक्रिया जारी रहने के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। पक्ष-विपक्ष के बयान और अधिकारियों की कार्रवाई आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।


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