‘गजब रात’ समीक्षा: मनोज बाजपेयी के दम पर टिकी एक रात की अपराध कथा, मध्यांतर के बाद ढीली पड़ी रफ्तार

नीरज पांडे की प्रस्तुति ‘गजब रात’ नेटफ्लिक्स पर 23 अक्टूबर 2026 से देखी जा सकती है। रितेश शाह के निर्देशन वाली यह फिल्म एक ही रात की कहानी है, जिसमें मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आते हैं। फिल्म में सस्पेंस और माहौल तो है, लेकिन कहानी का दूसरा भाग शुरुआत जैसी पकड़ बनाए नहीं रख पाता।

गजब रात में मनोज बाजपेयी और दिव्या दत्ता का सस्पेंस | Samachar Ei Samay

‘गजब रात’ की कहानी क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार कहानी दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास ‘लवली’ नाम के एक होटल पर पड़े छापे से शुरू होती है। भ्रष्ट और रंगीन मिजाज इंस्पेक्टर अजय निर्वित (मनोज बाजपेयी) थानाध्यक्ष प्रवीण राणा (राजीव गुप्ता) के आदेश पर वहां पहुंचता है। इसके बाद की रात में कई चौंकाने वाली घटनाएं होती हैं। समीक्षाओं के मुताबिक इस दौरान अजय अपनी रिश्वतखोरी रोककर एक लड़की को बचाने में जुट जाता है। रात का सच सामने आने पर शहर में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचने का खतरा बनता है। फिल्म का पहला नाम ‘घूसखोर पंडत’ था, जिसे बाद में बदलकर ‘गजब रात’ किया गया।

अभिनय: मनोज बाजपेयी सबसे आगे

लगभग सभी समीक्षाएं मनोज बाजपेयी के अभिनय की तारीफ करती हैं। नैतिक रूप से उलझे पुलिस अधिकारी के किरदार में वे गहरा हास्य, सड़क की समझदारी और भावनात्मक पहलू एक साथ जोड़ते हैं। एक समीक्षा में कहा गया कि वे कमजोर पटकथा से ऊपर उठकर प्रदर्शन करते हैं। फिल्म में अक्षय ओबेरॉय और दिव्या दत्ता भी अहम भूमिकाओं में हैं।

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निर्देशन और तकनीकी पक्ष

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका माहौल है। आधी रात के शहर की नियॉन रोशनी वाली परछाइयां पर्दे पर अच्छी लगती हैं। पहले हिस्से में रहस्य की परतें दिलचस्प ढंग से बुनी गई हैं। लेकिन समीक्षकों के अनुसार संपादन में ढीलापन है और दूसरा भाग खिंचा हुआ लगता है। संवाद ठीक-ठाक हैं, पर कुछ जगह जानकारी देने वाली पंक्तियां जबरन डाली हुई लगती हैं।

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समीक्षकों की रेटिंग में फर्क

समीक्षकों की राय बंटी हुई है। बॉलीवुड हंगामा ने फिल्म को पांच में से 2.5 अंक देते हुए इसे अच्छा लेकिन दूसरे भाग में लड़खड़ाने वाला थ्रिलर बताया। वहीं कोइमोई ने 3.5 अंक देते हुए कहा कि फिल्म तेज रफ्तार है और निराश नहीं करती। एक अन्य समीक्षा में कहा गया कि फिल्म का नाम जितना बड़ा वादा करता है, असर उतना नहीं छोड़ता।

देखें या नहीं?

अगर आप मनोज बाजपेयी के प्रशंसक हैं या एक रात में सिमटी अपराध कथाएं पसंद करते हैं, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है। हालांकि जिन्हें कसी हुई पटकथा और चौंकाने वाला अंत चाहिए, उन्हें थोड़ी निराशा हो सकती है। कुल मिलाकर ‘गजब रात’ सशक्त मुख्य कलाकार के सहारे चलने वाली औसत से थोड़ी ऊपर की फिल्म है।

दर्शकों की प्रतिक्रिया और आगे की रेटिंग आने पर खबर को अद्यतन किया जाएगा।

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द्वारा Kanchan

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