इटली में शिक्षा और सांस्कृतिक एकीकरण पर बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्के पर बैन और विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने का किया ऐलान
रोम में आयोजित युवा सम्मेलन ‘फिनिक्स’ के मंच से मेलोनी ने नए कानूनों की घोषणा की; कक्षाओं में विदेशी छात्रों का अनुपात 30 प्रतिशत तय करने और उनके अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य करने का प्रस्ताव।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने देश की शिक्षा प्रणाली और सांस्कृतिक एकीकरण नीति में व्यापक बदलावों की घोषणा की है। रोम में अपनी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ के युवा संगठन ‘जियोवेन्तु नात्ज़ियोनाले’ द्वारा आयोजित ‘फिनिक्स’ (Fenix) सम्मेलन को संबोधित करते हुए मेलोनी ने घोषणा की कि इतालवी सरकार जल्द ही एक नया विधेयक प्रस्तुत करेगी। इस विधेयक के तहत इटली के सभी विद्यालयों में बुर्के और नकाब जैसे चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले धार्मिक परिधानों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और प्रत्येक कक्षा में विदेशी मूल के विद्यार्थियों की संख्या लगभग 30 प्रतिशत तक सीमित की जाएगी।
सितंबर 2026 में सामने आई यह नीतिगत घोषणा इटली में आव्रजन (इमिग्रेशन), शिक्षा और सांस्कृतिक एकीकरण की दिशा में मेलोनी सरकार का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का तर्क है कि कक्षाओं में विदेशी छात्रों की बहुलता से मूल इतालवी बच्चों के साथ-साथ विदेशी बच्चों का एकीकरण भी प्रभावित होता है। इस कानून के माध्यम से सरकार का लक्ष्य इतालवी भाषा, संस्कृति और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना है।
1. कक्षाओं में विदेशी छात्रों की सीमा: 30 प्रतिशत का दायरा
प्रधानमंत्री मेलोनी ने सम्मेलन में कहा कि यदि किसी कक्षा में एक या दो विदेशी बच्चे होते हैं, तो वे अपने सहपाठियों और शिक्षकों की सहायता से इतालवी भाषा सीखकर तेजी से मुख्यधारा में शामिल हो जाते हैं। हालांकि, जब किसी कक्षा में विदेशी बच्चों की संख्या बहुसंख्यक हो जाती है, तो वह एकीकरण नहीं बल्कि अलगाव बन जाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में इटली के स्कूलों में लगभग 9,30,000 गैर-इतालवी नागरिकता वाले छात्र अध्ययनरत हैं, जो कुल स्कूली छात्र संख्या का लगभग 11.6 प्रतिशत हैं। मेलोनी ने स्पष्ट किया कि कक्षाओं में सीमा तय करने का उद्देश्य किसी को वंचित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इतालवी बच्चे अपनी ही कक्षाओं में अल्पसंख्यक महसूस न करें।
2. स्कूलों में बुर्का व नकाब पर पूर्ण प्रतिबंध
नए प्रस्तावित विधेयक का एक अन्य प्रमुख बिंदु स्कूलों के भीतर चेहरे को ढकने वाले वस्त्रों पर प्रतिबंध लगाना है। मेलोनी ने जोर देकर कहा कि विद्यालय में प्रत्येक छात्र और छात्रा को बेपर्दा चेहरे के साथ आना होगा।
उन्होंने कहा कि इटली के समाज में किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक परंपरा के नाम पर किसी युवती या बालिका को अपना चेहरा छिपाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने इसे लैंगिक समानता और व्यक्तिगत पहचान के अधिकार से जोड़ते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता और सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है।
3. अभिभावकों के लिए इतालवी भाषा अनिवार्य और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सुधार
इस नीतिगत पैकेज में विदेशी छात्रों के अभिभावकों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। जिन विदेशी छात्रों को भाषा और समायोजन में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, उनके माता-पिता के लिए इतालवी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, “जो भी व्यक्ति इटली में आकर अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे हमारी भाषा सीखनी होगी, हमारी संस्कृति को समझना होगा और देश के नियमों का पालन करना होगा।”
इसके अतिरिक्त, सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली बहुविकल्पीय उत्तर (Multiple-Choice) वाली प्रवेश परीक्षा को भी समाप्त करने की योजना बनाई है, ताकि योग्यता के आधार पर सभी युवाओं को समान अवसर मिल सकें।
निष्कर्ष
मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) के समक्ष जल्द ही पेश होने वाला यह विधेयक इटली की संसद में चर्चा का विषय बनेगा। मेलोनी के इस कदम को जहां उनकी पार्टी के समर्थक इतालवी पहचान और संस्कृति की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, वहीं विपक्षी दल और कुछ नागरिक अधिकार संगठन इस पर व्यापक बहस की मांग कर रहे हैं। आने वाले हफ्तों में इस विधेयक के पारित होने के बाद यूरोपीय राजनीति में एकीकरण और धर्मनिरपेक्षता पर नए सिरे से चर्चा छिड़ना तय है।

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