आदर्श चुनाव आचार संहिता क्या है? यूपी में विधान परिषद चुनाव के बीच जानें नियम, पाबंदियाँ और शिकायत का तरीक़ा
चुनाव की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) का नाम हर जगह गूँजने लगता है। इन दिनों उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव को लेकर संहिता लागू है। आइए समझें कि यह क्या है, किस पर लागू होती है और इसके उल्लंघन पर क्या हो सकता है।
आदर्श आचार संहिता क्या है?
यह चुनाव आयोग के जारी किए दिशा-निर्देशों का एक समूह है, जिसका उद्देश्य चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकार के व्यवहार को नियमित करना है। आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मिली शक्तियों से इसे लागू करता है। यह अपने आप में कोई क़ानून नहीं है, पर इसके पालन की निगरानी की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग के पास है।
कब से कब तक लागू रहती है?
संहिता उसी क्षण से प्रभावी हो जाती है, जब चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करता है। यह मतगणना और परिणाम घोषित होने तक लागू रहती है। आम तौर पर तारीख़ों की घोषणा और मतदान के पहले चरण के बीच तीन से छह हफ़्ते का अंतर रखा जाता है।
यूपी में अभी क्यों लागू है संहिता?
चुनाव आयोग ने 22 सितंबर 2026 को उत्तर प्रदेश विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई।
किन सीटों पर चुनाव?
- स्नातक निर्वाचन क्षेत्र (5): लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झाँसी
- शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र (6): लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फ़ैज़ाबाद
इन सीटों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर प्रदेश के सभी ज़िलों में संहिता के संगत प्रावधान लागू बताए गए हैं।
चुनाव का कार्यक्रम
- नामांकन की अंतिम तारीख़: 6 अक्टूबर 2026
- नामांकन की जाँच: 7 अक्टूबर
- नाम वापसी की अंतिम तारीख़: 9 अक्टूबर
- मतदान: 23 अक्टूबर, सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक
- मतगणना: 27 अक्टूबर
- चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की अंतिम तारीख़: 31 अक्टूबर
इसी महीने राज्यसभा की 10 सीटों के लिए भी 16 अक्टूबर को मतदान तय है। विधान परिषद की इन 11 सीटों के मतदाता स्नातक और शिक्षक वर्ग के पंजीकृत लोग हैं, जबकि राज्यसभा में निर्वाचित विधायक वोट देते हैं।
संहिता के मुख्य नियम
- सरकारी घोषणाओं पर रोक: सत्ताधारी दल या सरकार नई योजनाओं की घोषणा, शिलान्यास या उद्घाटन जैसे कदम उठाकर मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सकती।
- सरकारी साधनों का दुरुपयोग नहीं: अधिकारियों से बिना भेदभाव, सभी दलों से एक जैसा बर्ताव करने और सरकारी सुविधाओं का ग़लत इस्तेमाल रोकने के निर्देश होते हैं।
- निजी संपत्ति का उपयोग: मालिक की मंज़ूरी के बिना ज़मीन, इमारत या दीवारों पर झंडे, बैनर या पोस्टर नहीं लगाए जा सकते।
- जाति-धर्म के नाम पर वोट माँगना मना: सांप्रदायिक या जातिगत भावनाओं के आधार पर अपील करना संहिता का उल्लंघन माना जाता है।
- मतदाताओं को प्रलोभन नहीं: पैसे, उपहार या शराब जैसी चीज़ों से वोट खरीदने की कोशिश ग़ैरक़ानूनी है।
उल्लंघन होने पर क्या होता है?
संहिता ख़ुद क़ानून नहीं है, इसलिए इसके उल्लंघन पर चुनाव आयोग उम्मीदवार या दल को नोटिस दे सकता है, चेतावनी जारी कर सकता है या प्रचार पर रोक जैसी कार्रवाई कर सकता है। रिश्वत जैसे गंभीर मामलों में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और दंड क़ानूनों के तहत अलग से कार्रवाई हो सकती है।
शिकायत कैसे करें?
नागरिक और राजनीतिक दल चुनाव आयोग के सी-विजिल (C-Vigil) ऐप से भी संहिता के उल्लंघन की शिकायत कर सकते हैं। शिकायत में घटना की तस्वीर या वीडियो और स्थान की जानकारी देना काम को आसान बनाता है।
इस साल की पिछली संहिता कब हटी?
मार्च 2026 में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के चुनाव की घोषणा के साथ संहिता लागू हुई थी। चुनाव आयोग ने 7 मई 2026 को नतीजों के बाद इसे हटाने का आदेश जारी किया। पश्चिम बंगाल की फाल्टा सीट पर तब भी यह लागू रही थी।
आम मतदाता क्या करें?
- अपने इलाक़े में किसी भी प्रलोभन या दबाव की घटना दिखे तो सी-विजिल पर तुरंत जानकारी दें।
- स्नातक या शिक्षक वर्ग के मतदाता अपना नाम मतदाता सूची में जाँच लें।
- सोशल मीडिया पर फैली अफ़वाहों या फ़र्ज़ी ख़बरों की पुष्टि चुनाव आयोग की आधिकारिक सूचना से करें।
आगे क्या?
अक्टूबर के अंत में नतीजों के साथ इन सीटों पर संहिता हट जाएगी। उसके बाद 2027 की शुरुआत में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, तब यह फिर बड़े पैमाने पर लागू होगी।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सूचना के लिए है। चुनाव कार्यक्रम और नियम चुनाव आयोग की अधिसूचना के अनुसार बदल सकते हैं।)


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