सेमीकंडक्टर क्रांति की ओर भारत का बड़ा कदम: आईआईटी दिल्ली ने बनाया देश का पहला स्वदेशी ‘माइक्रो-जीपीयू’, विदेशों पर घटेगी निर्भरता

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के छात्रों ने स्पार्टन-7 एफपीजीए प्लेटफॉर्म पर तैयार की प्रोग्रामेबल ग्राफिक्स चिप; ई-रिक्शा, नेविगेशन सिस्टम और ई-रीडर्स के लिए बेहद सस्ती व किफायती तकनीक।

IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने देश की पहली स्वदेशी माइक्रो-GPU विकसित की। यह उपलब्धि इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम कदम है।, IIT दिल्ली की स्वदेशी माइक्रो-GPU से EV, ...

‘आत्मनिर्भर भारत’ और राष्ट्रीय सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission) की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। आईआईटी दिल्ली के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने देश का पहला कार्यशील और प्रदर्शन योग्य स्वदेशी ‘माइक्रो-जीपीयू’ (micro-Graphics Processing Unit) विकसित किया है। सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में घोषित यह उपलब्धि भारत की विदेशी जीपीयू (GPU) चिप्स पर 100 प्रतिशत आयात निर्भरता को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी। प्रोफेसर जयदेव और प्रोफेसर कौशिक साहा के मार्गदर्शन में एम.टेक के विद्यार्थियों नम्मी आकाश और एम. रवि तेजा के नेतृत्व में यह शोध प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

वर्तमान में स्मार्टफोन, कंप्यूटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल डिस्प्ले वाले लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों में इस्तेमाल होने वाले जीपीयू विदेशों से आयात किए जाते हैं। आईआईटी दिल्ली द्वारा विकसित यह ‘माइक्रो-जीपीयू’ हाई-एंड एआई सर्वर के लिए नहीं, बल्कि कम लागत वाले एम्बेडेड (Embedded) और डिस्प्ले उपकरणों के लिए डिजाइन किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस कस्टम फ्लोटिंग-पॉइंट जीपीयू इंजन को ‘रजिस्टर ट्रांसफर लैंग्वेज’ (RTL) में तैयार किया है और इसे जाइलिंक्स स्पार्टन-7 एफपीजीए (Spartan-7 FPGA) बोर्ड पर सफलतापूर्वक चलाकर दिखाया है। अब इस तकनीक को वास्तविक सिलिकॉन चिप (ASIC) के रूप में निर्मित करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

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1. विदेशों पर घटेगी निर्भरता: क्या है ‘माइक्रो-जीपीयू’ और कैसे करता है काम?

ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) किसी भी स्क्रीन पर विजुअल्स, ग्राफिक्स और इंटरफेस को प्रदर्शित करने का काम करता है:

  • एफपीजीए (FPGA) प्रोटोटाइप: शोधकर्ताओं ने इस डिज़ाइन को पहले एफपीजीए बोर्ड पर टेस्ट किया है। एफपीजीए एक ऐसा री-कॉन्फ़िगर योग्य हार्डवेयर होता है, जिस पर चिप निर्माण (Fabrication) से पहले उसके डिजाइन का परीक्षण किया जाता है।
  • स्वदेशी आरटीएल (RTL) डिजाइन: पूरे जीपीयू आर्किटेक्चर का कोड भारत में ही लिखा गया है, जिसका अर्थ है कि इस तकनीक का इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) राइट्स पूरी तरह भारतीय शोधकर्ताओं के पास है।
  • कम लागत और कॉम्पैक्ट आकार: पारंपरिक भारी-भरकम और महंगे जीपीयू की तुलना में यह माइक्रो-जीपीयू बहुत कम बिजली खपत करता है और आकार में छोटा है, जो छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए एकदम उपयुक्त है।

2. ई-रिक्शा से लेकर मछुआरों की नावों तक: कहां-कहां होगा इस्तेमाल?

आईआईटी दिल्ली के इस स्वदेशी जीपीयू का मुख्य उद्देश्य डिजिटल डिवाइड (डिजिटल असमानता) को कम करना और आम नागरिकों के लिए सस्ती तकनीक उपलब्ध कराना है:

  • ई-रिक्शा और वाहन डैशबोर्ड: ई-रिक्शा, टू-व्हीलर और किफायती वाहनों के डिजिटल स्पीडोमीटर व नेविगेशन स्क्रीन में।
  • मछुआरों के लिए नेविगेशन टर्मिनल: अंतर्देशीय जलमार्गों और समुद्र में छोटी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के लिए कम लागत वाले जीपीएस व मैपिंग स्क्रीन में।
  • शिक्षा और ई-बुक रीडर्स: सरकारी व किफायती स्कूलों के बच्चों के लिए बनने वाले इलेक्ट्रॉनिक ई-बुक रीडर्स में।
  • औद्योगिक कंट्रोल पैनल: कारखानों और विनिर्माण इकाइयों में इस्तेमाल होने वाले लो-कॉस्ट ह्यूम-मशीन इंटरफेस (HMI) डिस्प्ले में।

3. भविष्य की योजना: 65nm नोड पर 8 से 16 कोर वाली वास्तविक चिप का निर्माण

शोध दल केवल प्रोटोटाइप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे वास्तविक कमर्शियल चिप में बदलने के लिए रोडमैप तैयार कर चुका है:

  1. 8 से 16 कोर आर्किटेक्चर: टीम अब इस डिजाइन को और शक्तिशाली बनाते हुए 8 से 16 कोर वाले वेक्टर-स्टाइल ग्राफिक्स प्रोसेसर में बदलने पर काम कर रही है।
  2. 65nm एसआईसी (ASIC) प्रक्रिया: एफपीजीए प्रदर्शन के बाद, इस डिजाइन को 65-नैनोमीटर (65nm) फैब्रिकेशन नोड पर एक समर्पित सिलिकॉन चिप (Application-Specific Integrated Circuit) के रूप में निर्मित किया जाएगा।
  3. सॉफ्टवेयर टूलचेन विकास: चिप के साथ-साथ भारतीय डेवलपर्स के लिए ऑप्टिमाइज्ड कंपाइलर और सॉफ्टवेयर टूल भी तैयार किए जा रहे हैं।

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निष्कर्ष

आईआईटी दिल्ली के युवा शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह स्वदेशी ‘माइक्रो-जीपीयू’ यह साबित करता है कि भारत केवल सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि हार्डवेयर और चिप डिजाइनिंग (Chip Design) के क्षेत्र में भी दुनिया का नेतृत्व करने में सक्षम है। जब यह स्वदेशी जीपीयू वाणिज्यिक रूप से बाजार में आएगा, तो न केवल इलेक्ट्रॉनिक सामान सस्ते होंगे, बल्कि देश की साइबर सुरक्षा और तकनीकी संप्रभुता को भी नया बल मिलेगा।

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द्वारा Kanchan