11,000 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना: अरुणाचल प्रदेश कैबिनेट ने सर्वे के लिए उच्चस्तरीय समिति का किया गठन, स्थानीय चिंताओं को दूर करने पर जोर

वर्ष 2008 से ‘राष्ट्रीय महत्व की परियोजना’ घोषित; ग्रामीण विकास मंत्री ओजिंग तासिंग की अध्यक्षता में बनी समिति, पारदर्शी व शांतिपूर्ण सर्वे पर रहेगा फोकस।

 अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सियांग और अपर सियांग जिलों में प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (Siang Upper Multipurpose Project – SUMP) की पूर्व-संभाव्यता रिपोर्ट (Pre-Feasibility Report – PFR) सर्वे और संबंधित गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए एक सशक्त उच्चस्तरीय समिति (Empowered High-Level Committee) के गठन को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में 23-24 सितंबर 2026 को आयोजित कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, ताकि स्थानीय आबादी की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सर्वे कार्य को पारदर्शी, शांतिपूर्ण और जन-केंद्रित तरीके से पूरा किया जा सके।

लगभग 11,000 मेगावाट (MW) की अनुमानित क्षमता वाली यह परियोजना भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय जलविद्युत पहलों में से एक है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2008 में ही ‘राष्ट्रीय महत्व की परियोजना’ (National Project) घोषित किया गया था। सियांग-ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ नियंत्रण (Flood Moderation), जल व ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास की दृष्टि से यह रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, विस्थापन, आजीविका के नुकसान और पर्यावरणीय जोखिमों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों व संगठनों द्वारा जताई जा रही चिंताओं के बीच सरकार ने सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए इस समिति का गठन किया है।

1. सशक्त समिति का ढांचा और जन-संवाद पर जोर

कैबिनेट द्वारा गठित समिति स्थानीय समुदायों और परियोजना प्रभावित परिवारों (Project Affected Families – PAFs) के साथ निरंतर और पारदर्शी संवाद स्थापित करेगी:

  • समिति का नेतृत्व: इस सशक्त समिति की अध्यक्षता राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ओजिंग तासिंग करेंगे। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार व यिंगकियोंग-टूटिंग से विधायक अलो लिबांग और गेकू-मारियांग से विधायक ओनी पाभ्यांग इसके सदस्य होंगे।
  • भ्रामक जानकारियों को दूर करना: कैबिनेट ने माना कि परियोजना को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों से स्थानीय लोगों में आशंकाएं हैं, जिन्हें निरंतर और पारदर्शी संवाद के जरिए दूर किया जाएगा।

2. राष्ट्रीय सुरक्षा, बाढ़ नियंत्रण और पुनर्वास पैकेज

परियोजना के व्यापक सामाजिक और रणनीतिक प्रभावों को देखते हुए राज्य सरकार ने संतुलित विकास का आश्वासन दिया है:

  • बाढ़ नियंत्रण और जल सुरक्षा: सियांग (ब्रह्मपुत्र) नदी पर बनने वाली यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन ही नहीं करेगी, बल्कि मानसून के दौरान असम और निचले मैदानी इलाकों में बाढ़ के प्रकोप को कम करने में मदद करेगी।
  • मुआवजा व R&R फ्रेमवर्क: सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित परिवारों को न्यायसंगत मुआवजा, पुनर्वास व पुनर्व्यवस्थापन (Rehabilitation & Resettlement) ढांचा और विशेष विकास पैकेज प्रदान किए जाएंगे, तथा विकास के साथ-साथ स्थानीय जनजातीय परंपराओं का सम्मान किया जाएगा।

निष्कर्ष 

सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पूर्वोत्तर के विकास के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। कैबिनेट द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति यह सुनिश्चित करेगी कि विकास की इस बड़ी पहल में स्थानीय समुदायों की आवाज, आकांक्षाएं और भलाई सर्वोपरि रहें, ताकि क्षेत्र में शांति और आपसी विश्वास के साथ सर्वे प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

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द्वारा Kanchan

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