अंकुर वारिकू: ₹25 लाख से 3-4 साल में ₹1 करोड़ बनाना चाहती थी महिला, अंकुर वारिकू ने समझाई निवेश की बड़ी गलती
उद्यमी, लेखक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर अंकुर वारिकू एक बार फिर अपनी वित्तीय सलाह को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने जल्दी अमीर बनने की चाह और निवेश में धैर्य की अहमियत पर बात की है। 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वारिकू ने एक महिला का ईमेल साझा किया, जिसके पास पहले से ₹25 लाख का निवेश कोष था। महिला अगले तीन से चार वर्षों में इसे बढ़ाकर ₹1 करोड़ करना चाहती थी।
वारिकू ने इस लक्ष्य को जल्द से जल्द अमीर बनने की मानसिकता का उदाहरण बताया। उनके मुताबिक, निवेश में केवल चक्रवृद्धि वृद्धि का सिद्धांत समझना पर्याप्त नहीं है। उसके परिणाम सामने आने के लिए जरूरी समय देने का धैर्य भी होना चाहिए।
₹25 लाख से ₹1 करोड़ तक पहुंचने का लक्ष्य
वारिकू के साथ साझा किए गए ईमेल में महिला ने बताया कि उसकी नौकरी स्थिर है, कमाई अच्छी है और वह पांच साल से अधिक समय से निवेश कर रही है। इस दौरान उसने ₹25 लाख का निवेश कोष तैयार किया था। अब वह अगले तीन से चार वर्षों में इसे ₹1 करोड़ तक पहुंचाना चाहती थी।
वारिकू ने उसकी अब तक की वित्तीय प्रगति को सराहनीय माना, लेकिन इतने कम समय में चार गुना पूंजी जुटाने की उम्मीद पर सवाल उठाया।
गौर करने वाली बात यह है कि ₹25 लाख को ₹1 करोड़ बनाने के लिए बिना अतिरिक्त निवेश के तीन साल में लगभग 58.7 प्रतिशत और चार साल में लगभग 41.4 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि प्रतिफल चाहिए होगा। ये गणितीय अनुमान हैं, किसी निवेश से मिलने वाले संभावित या सुनिश्चित रिटर्न का दावा नहीं।
Compounding को समझना ही काफी क्यों नहीं?
चक्रवृद्धि वृद्धि का अर्थ है कि निवेश पर मिलने वाला प्रतिफल आगे चलकर स्वयं भी प्रतिफल कमाने लगता है। लंबी अवधि में यह प्रक्रिया पूंजी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
वारिकू का कहना है कि बहुत से लोग Compounding का सिद्धांत जानते हैं, लेकिन उन्होंने इसके दीर्घकालिक प्रभाव को अपनी वित्तीय जिंदगी में अनुभव नहीं किया होता। इसी कारण शुरुआत में निवेश की वृद्धि धीमी लग सकती है और लोग जल्द नतीजे पाने के लिए जोखिम भरे विकल्प तलाशने लगते हैं।
उनके अनुसार, संपत्ति बनाने में समय और अनुशासन की अहम भूमिका है। लगातार निवेश करते रहना तथा अपने वित्तीय लक्ष्य के अनुरूप योजना बनाना जल्द अमीर बनने की कोशिश से अधिक उपयोगी हो सकता है।
जल्दी अमीर बनने की चाह कैसे बढ़ाती है जोखिम?
जब किसी निवेशक को लगता है कि उसकी पूंजी अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रही, तो वह बहुत अधिक रिटर्न देने का दावा करने वाली योजनाओं की ओर आकर्षित हो सकता है। ऐसी जल्दबाजी व्यक्ति को जोखिमों की पर्याप्त जांच किए बिना निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।
वारिकू ने चेताया कि तुरंत धन कमाने का लालच निवेशकों को अवास्तविक वादों और संभावित धोखाधड़ी के प्रति संवेदनशील बना सकता है। उन्होंने लॉटरी को तेजी से अमीर बनने का एक अप्रत्याशित रास्ता बताते हुए कहा कि वास्तविक संपत्ति निर्माण में आमतौर पर समय लगता है।
हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि हर निवेशक को एक जैसा समय या प्रतिफल मिलेगा। वास्तविक परिणाम निवेश की राशि, अवधि, बाजार की स्थितियों, जोखिम और नियमित अतिरिक्त निवेश जैसे कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
कौन हैं अंकुर वारिकू?
अंकुर वारिकू भारत के उद्यमी, लेखक, शिक्षक और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हैं। उनका जन्म और शुरुआती जीवन दिल्ली में बीता। उन्होंने अमेरिका में भौतिकी में पीएचडी की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन बाद में उसे छोड़कर भारत लौट आए और प्रबंधन की पढ़ाई की।
उन्होंने प्रबंधन सलाहकार के रूप में काम करने के बाद उद्यमिता की राह चुनी। वह Gaadi.com, Groupon India और nearbuy जैसी कंपनियों से जुड़े रहे। बाद में उन्होंने WebVeda के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा और कौशल विकास पर काम शुरू किया।
किताबों और ऑनलाइन शिक्षा से बनाई पहचान
वारिकू ने व्यक्तिगत विकास, करियर, पैसों और व्यवहार से जुड़े विषयों पर कई किताबें लिखी हैं। उनकी लोकप्रिय पुस्तकों में Do Epic Shit, Make Epic Money और Build an Epic Career शामिल हैं।
उनकी सामग्री खासकर युवाओं और कामकाजी लोगों के बीच लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें करियर की गलतियों, वित्तीय निर्णयों, आदतों और व्यक्तिगत विकास को सरल तरीके से समझाने की कोशिश की जाती है।
वर्ष 2026 में उन्होंने Monzy नाम का क्रेडिट कार्ड खोज और तुलना प्लेटफॉर्म भी शुरू किया। उनकी वेबसाइट के मुताबिक, इसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को उनके खर्च और जरूरतों के आधार पर उपयुक्त विकल्प समझने में मदद देना है।
निष्कर्ष
₹25 लाख को तीन से चार साल में ₹1 करोड़ बनाने की इच्छा पर वारिकू की टिप्पणी निवेश में धैर्य और वास्तविक अपेक्षाओं की अहमियत सामने लाती है। जल्दी अमीर बनने के लक्ष्य के बजाय अपनी आय, बचत, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार वित्तीय योजना बनाना अधिक समझदारी भरा तरीका है।
हालांकि, किसी एक वित्तीय लक्ष्य के लिए कोई सार्वभौमिक समय-सीमा तय नहीं की जा सकती। निवेश से जुड़े फैसले लेने से पहले अपने वित्तीय हालात और जोखिम को समझना जरूरी है।

[…] से पहले कांग्रेस वापसी की चर्चा अंकुर वारिकू: ₹25 लाख से ₹1 करोड़ बनाने क… नवरात्रि कब है 2026? 11 अक्टूबर से शुरू, […]