कौन हैं धिनिदि देसिंघु? 16 साल की भारतीय तैराक ने रचा इतिहास, युवा ओलंपिक में जीता ऐतिहासिक कांस्य पदक
भारतीय तैराकी के लिए 2026 का साल ऐतिहासिक उपलब्धि लेकर आया है। बेंगलुरु की 16 वर्षीय तैराक धिनिदि देसिंघु ने सेनेगल के डकार में आयोजित युवा ओलंपिक खेलों में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 56.27 सेकेंड का समय निकालकर तीसरा स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के साथ वह युवा ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय तैराक बन गई हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी बेहतर किया है।
धिनिदि देसिंघु: युवा ओलंपिक में रचा इतिहास
2 नवंबर 2026 को आयोजित महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा के फाइनल में धिनिदि ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 56.27 सेकेंड में अपनी रेस पूरी कर कांस्य पदक अपने नाम किया।
इस मुकाबले में क्रोएशिया की एना बोबानोविच ने 55.89 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि न्यूजीलैंड की एलिसा लॉसन 56.13 सेकेंड के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
धिनिदि की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह युवा ओलंपिक में तैराकी का पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले किसी भारतीय तैराक ने इस प्रतियोगिता में पदक हासिल नहीं किया था।
तोड़ा अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड
धिनिदि ने कांस्य पदक जीतने के साथ महिलाओं की 100 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा का राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। फाइनल में उन्होंने 56.27 सेकेंड का समय निकाला, जबकि उनका पिछला राष्ट्रीय रिकॉर्ड 56.57 सेकेंड था।
उन्होंने यह पिछला रिकॉर्ड जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित सीनियर नेशनल चैंपियनशिप के दौरान बनाया था।
दिलचस्प बात यह है कि फाइनल रेस के शुरुआती 50 मीटर पूरे होने पर धिनिदि पांचवें स्थान पर थीं। हालांकि, आखिरी 50 मीटर में उन्होंने अपनी गति बढ़ाई और दो अन्य प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ते हुए कांस्य पदक हासिल कर लिया।
कौन हैं धिनिदि देसिंघु?
धिनिदि देसिंघु कर्नाटक के बेंगलुरु की रहने वाली भारतीय तैराक हैं। उनका जन्म 17 मई 2010 को हुआ था। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय तैराकी में अपनी पहचान बना ली है।
धिनिदि मुख्य रूप से फ्रीस्टाइल स्पर्धाओं में हिस्सा लेती हैं। उनके प्रशिक्षक निहार अमीन हैं और वह बेंगलुरु के डॉल्फिन एक्वेटिक्स में प्रशिक्षण लेती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बचपन में धिनिदि को पानी से डर लगता था। उनके माता-पिता ने उन्हें तैराकी से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। शुरुआत में मनोरंजन और आत्मविश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू हुई यह गतिविधि धीरे-धीरे उनके करियर का हिस्सा बन गई।
14 साल की उम्र में खेल चुकी हैं पेरिस ओलंपिक
धिनिदि देसिंघु इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उन्होंने 2024 के पेरिस ओलंपिक में महिलाओं की 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में हिस्सा लिया था।
उस समय उनकी उम्र महज 14 साल थी और वह पेरिस ओलंपिक में भारतीय दल की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी थीं। उन्हें सार्वभौमिकता कोटे के माध्यम से ओलंपिक में जगह मिली थी।
दो साल बाद डकार युवा ओलंपिक में पदक जीतना उनके करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गया है। खास बात यह है कि वह अपनी मुख्य स्पर्धा 200 मीटर फ्रीस्टाइल में भी भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली हैं।
धिनिदि का अगला लक्ष्य क्या है?
धिनिदि का लक्ष्य केवल युवा प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं है। वह भविष्य में भारत के लिए सीनियर ओलंपिक में भी पदक जीतना चाहती हैं।
उनका मानना है कि भारतीय तैराकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी है। वह भविष्य में बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल और निशानेबाज अभिनव बिंद्रा की तरह अपने खेल में भारत के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करना चाहती हैं।
डकार में मिला कांस्य पदक भारतीय तैराकी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे देश के युवा खिलाड़ियों, खासकर लड़कियों को तैराकी जैसे खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है। अब सभी की निगाहें धिनिदि के आगामी मुकाबलों और भविष्य के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर रहेंगी।

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