‘सतलुज’ के निर्देशक हनी त्रेहान ने CBFC की नई एडवाइजरी को बताया कायरता और तानाशाही, अभिव्यक्ति की आजादी पर उठाए सवाल

फिल्मों की रिलीज और सेंसर प्रमाणन को लेकर चल रही बहस के बीच फिल्म निर्देशक हनी त्रेहान ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की नई एडवाइजरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ के निर्देशक ने नई गाइडलाइंस को देश में कायरता और तानाशाही का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति लोकतांत्रिक रवैया नहीं है।

हनी त्रेहान:सीबीएफसी की नई गाइडलाइंस पर फूटा 'सतलुज' के निर्देशक का गुस्सा, अभिव्यक्ति की आजादी पर उठाए सवाल - Satluj Director Honey Trehan Angry On Cbfc New ...

हनी त्रेहान की यह प्रतिक्रिया 26 अक्टूबर 2026 को जारी CBFC की नई एडवाइजरी के बाद आई है। बोर्ड ने फिल्म निर्माताओं के लिए पांच नए निर्देश जारी किए हैं। इनमें अधूरी फिल्मों को प्रमाणन के लिए स्वीकार नहीं करना, प्रचार में इस्तेमाल किए गए फिल्म के नाम को अंतिम नहीं मानना और घोषित रिलीज तारीख के आधार पर जल्दी प्रमाणपत्र जारी नहीं करना शामिल है।

हनी त्रेहान ने CBFC की नई एडवाइजरी पर क्या कहा?

हनी त्रेहान ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से नई गाइडलाइंस पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा कि ये निर्देश देश में कायरता और तानाशाही को रेखांकित करते हैं, न कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को।

उनकी इस प्रतिक्रिया के पीछे फिल्म प्रमाणन को लेकर उनका व्यक्तिगत अनुभव भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी फिल्म ‘सतलुज’ को प्रमाणन प्रक्रिया में लगभग तीन साल तक इंतजार करना पड़ा था। इसलिए नई एडवाइजरी सामने आने के बाद उन्होंने फिल्मकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता और सेंसर बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

CBFC की नई एडवाइजरी में क्या हैं पांच प्रमुख निर्देश?

26 अक्टूबर 2026 को जारी एडवाइजरी में CBFC ने फिल्म प्रमाणन की प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख बातें स्पष्ट की हैं।

  1. अधूरी फिल्म स्वीकार नहीं होगी: फिल्म निर्माताओं को प्रमाणन के लिए पूरी और अंतिम फिल्म जमा करनी होगी। इसमें अंतिम दृश्य, शीर्षक, श्रेय सूची, संवादों के उपशीर्षक, संगीत, ध्वनि मिश्रण और जरूरी अस्वीकरण शामिल होने चाहिए।
  2. फिल्म का नाम बदल सकता है: प्रचार सामग्री, पोस्टर, टीजर या आवेदन में दिए गए नाम को अंतिम स्वीकृति नहीं माना जाएगा। परीक्षण या पुनरीक्षण समिति फिल्म के नाम की समीक्षा करके उसमें बदलाव कर सकती है।
  3. रिलीज तारीख से जल्दी प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा: निर्माता द्वारा घोषित सिनेमाघर रिलीज या टीजर लॉन्च की तारीख को प्रमाणन प्रक्रिया तेज करने का आधार नहीं बनाया जाएगा।
  4. अधूरे आवेदन पर प्रक्रिया शुरू नहीं होगी: सभी जरूरी दस्तावेज और औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही आवेदन को प्राप्त माना जाएगा। उस तारीख से फिल्म को जांच की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
  5. पहले से योजना बनाकर आवेदन करना होगा: निर्माताओं को सलाह दी गई है कि वे प्रस्तावित रिलीज से पर्याप्त समय पहले फिल्म जमा करें, ताकि जांच, समीक्षा और जरूरी बदलावों के लिए समय मिल सके।

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बोर्ड के अनुसार, ये निर्देश सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और सिनेमैटोग्राफ प्रमाणन नियम, 2024 के तहत जारी किए गए हैं।

‘Satluj’ फिल्म को लेकर क्यों हुआ था विवाद?

हनी त्रेहान की फिल्म ‘सतलुज’ पहले ‘घल्लूघारा’ नाम से बनाई गई थी। बाद में इसका नाम ‘पंजाब 95’ रखा गया। फिल्म सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, जिसमें दिलजीत दोसांझ ने मुख्य भूमिका निभाई है।

फिल्म को प्रमाणन दिलाने के लिए निर्माताओं को लगभग तीन साल तक इंतजार करना पड़ा। हनी त्रेहान के अनुसार, शुरुआत में बोर्ड की ओर से 21 कट सुझाए गए थे। बाद में बातचीत के दौरान इनकी संख्या 127 तक पहुंच गई। निर्माताओं ने इन बदलावों पर असहमति जताई और कानूनी रास्ता भी अपनाया।

आखिरकार 3 जुलाई 2026 को फिल्म को ‘सतलुज’ नाम से ZEE5 पर बिना कट के जारी किया गया। हालांकि, दो दिनों के भीतर इसे भारत में मंच से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम के दौरान केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आई थीं।

क्या नई गाइडलाइंस से फिल्मकारों की रचनात्मक स्वतंत्रता प्रभावित होगी?

CBFC की नई एडवाइजरी के बाद फिल्म उद्योग में प्रमाणन प्रक्रिया और रचनात्मक स्वतंत्रता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ बोर्ड का कहना है कि अधूरी फिल्मों और अपूर्ण दस्तावेजों के कारण प्रमाणन प्रक्रिया प्रभावित होती है, इसलिए अंतिम सामग्री पहले से जमा कराना जरूरी है।

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दूसरी तरफ फिल्मकारों की चिंता है कि फिल्म के शीर्षक और निर्धारित रिलीज तारीख को अंतिम नहीं मानने से प्रचार अभियान, वितरण और सिनेमाघरों की बुकिंग प्रभावित हो सकती है।

हनी त्रेहान की आपत्ति इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। फिलहाल CBFC की ओर से उनके बयान पर कोई अलग आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि नई एडवाइजरी का पालन करते हुए फिल्म निर्माता और बोर्ड भविष्य में प्रमाणन प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

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By Kanchan

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