गाजियाबाद DM के हलफनामे से नाराज हाईकोर्ट, कहा- जवाब से संतुष्ट नहीं; 19 नवंबर को फिर पेश हों

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के जिलाधिकारी की ओर से दाखिल हलफनामे और जांच रिपोर्ट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने रिपोर्ट में गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां मिलने के बाद टिप्पणी की कि प्रथम दृष्टया मामले में शिकायत को दबाने का प्रयास दिखाई दे रहा है। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी रवींद्र कुमार मंदार के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए उन्हें अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

Allahabad High Court summoned Ghaziabad DM The court expressed displeasure over the functioning ANN | गाजियाबाद के DM की कार्यप्रणाली पर अदालत ने जताई नाराजगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया ...

30 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बिजेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से विस्तृत जांच कराने और अगली सुनवाई पर नई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।

गाजियाबाद DM शपथ पत्र: तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में मिली बड़ी खामी

सुनवाई के दौरान गाजियाबाद के जिलाधिकारी रवींद्र कुमार मंदार ने अदालत में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया था। इसमें उन्होंने बताया कि संबंधित शिकायत की जांच के लिए फरवरी 2026 में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने 17 फरवरी 2026 को अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी थी।

हालांकि, जब हाईकोर्ट ने हलफनामे के साथ संलग्न जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया तो उसमें एक महत्वपूर्ण कमी सामने आई। अदालत ने पाया कि रिपोर्ट पर केवल समिति के अध्यक्ष के हस्ताक्षर मौजूद थे, जबकि अन्य दो सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।

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समिति के इन दो सदस्यों में गाजियाबाद के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी और मुरादनगर के थाना प्रभारी शामिल थे।

अदालत ने सवाल उठाया कि जब जांच समिति में तीन सदस्य शामिल थे तो रिपोर्ट पर केवल अध्यक्ष के हस्ताक्षर कैसे थे? क्या अन्य दोनों सदस्यों ने जांच में भाग लिया था और क्या वे रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों से सहमत थे?

हाईकोर्ट ने DM की सफाई पर क्यों जताई नाराजगी?

रिपोर्ट में हस्ताक्षर नहीं होने का सवाल उठने पर जिलाधिकारी ने अदालत में अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट समिति के अध्यक्ष की ओर से प्रस्तुत की गई थी और अध्यक्ष के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट को ही समिति की रिपोर्ट माना जाना चाहिए।

हलफनामे में यह भी बताया गया था कि समिति से रिपोर्ट मिलने के बाद 25 फरवरी 2026 को मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के पास भेज दिया गया था।

इस पर हाईकोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि जिस अधिकारी के पास रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए भेजा गया, वह स्वयं जांच समिति के सदस्य थे। जब उनके हस्ताक्षर भी रिपोर्ट पर नहीं थे, तो रिपोर्ट उन्हीं के पास आगे की कार्रवाई के लिए क्यों भेजी गई?

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जिलाधिकारी की इस दलील से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी के जवाब से वह संतुष्ट नहीं है और याचिकाकर्ता की शिकायत में उठाए गए मुद्दों को दबाने का स्पष्ट प्रयास दिखाई देता है।

हाईकोर्ट ने नए सिरे से जांच के दिए आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने केवल मौजूदा रिपोर्ट पर सवाल उठाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी। पीठ ने निर्देश दिया कि संबंधित शिकायत की नए सिरे से गहन जांच की जाए।

अदालत के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:

  • शिकायत में लगाए गए आरोपों की विस्तार से जांच की जाए।
  • आरोपों के समर्थन में उपलब्ध सभी साक्ष्य एकत्र किए जाएं।
  • जुटाए गए साक्ष्यों का उचित मूल्यांकन किया जाए।
  • जांच पूरी होने के बाद नई रिपोर्ट तैयार की जाए।
  • नई जांच रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने प्रस्तुत की जाए।

इससे स्पष्ट है कि हाईकोर्ट अब मामले में केवल प्रशासनिक स्पष्टीकरण के बजाय शिकायत की वास्तविक जांच और उससे जुड़े साक्ष्यों को देखना चाहता है।

19 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे गाजियाबाद के DM

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी अदालत में उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी अपने दाखिल हलफनामे को लेकर खेद व्यक्त कर रहे हैं और अगली सुनवाई पर नया हलफनामा दाखिल करेंगे।

इसके बाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया।

अब 19 नवंबर 2026 को होने वाली सुनवाई में जिलाधिकारी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। साथ ही, अदालत के निर्देश के अनुसार नई जांच रिपोर्ट भी पेश की जानी है।

फिलहाल, हाईकोर्ट ने जांच रिपोर्ट की प्रक्रिया और जिलाधिकारी के जवाब पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए मूल आरोपों पर अदालत ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अब सभी की नजर 19 नवंबर की सुनवाई पर है, जिसमें नई जांच रिपोर्ट और जिलाधिकारी के नए हलफनामे के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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By Kanchan

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