हिंदू-मुस्लिम एकता की अनोखी मिसाल: गफूरन बी के इंतकाल पर बिजनौर के मोहड़ा गांव ने स्थगित की रामलीला

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के धामपुर क्षेत्र में स्थित मोहड़ा गांव ने आपसी भाईचारे की एक मिसाल पेश की है। गांव की बुजुर्ग मुस्लिम महिला गफूरन बी के इंतकाल पर ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से रामलीला का मंचन एक दिन के लिए स्थगित कर दिया। यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि शोक और सम्मान की भावना से लिया गया। इसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है।

रामलीला रोक कर गम में शरीक हुए हिंदू समाज के लोग!, मोहड़ा गांव ने पेश की हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल।, 85 साल की गफूरन अम्मा के इंतकाल पर रामलीला मंचन रोक कर गांव के लोगों ने इंसानियत और भाईचारे का ...

क्या है पूरा मामला?

मोहड़ा गांव में मंगलवार से रामलीला का मंचन शुरू होना था। मंच सज चुका था और कलाकार भी तैयार थे। इसी बीच शनिवार (10 अक्टूबर) की शाम गांव की बुजुर्ग महिला गफूरन बी के इंतकाल की खबर आई। रिपोर्ट्स के अनुसार उनकी उम्र करीब 85 वर्ष थी।

गफूरन बी के निधन से पूरे गांव में शोक छा गया। ग्रामीणों ने महसूस किया कि एक ओर गांव में गम का माहौल हो और दूसरी ओर उत्सव मनाया जाए, यह उचित नहीं होगा। आपसी चर्चा के बाद रामलीला समिति और ग्रामीणों ने मंचन को एक दिन के लिए टालने का निर्णय लिया।

गांव की ‘बुआ’ थीं गफूरन बी

बिजनौर में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल! महिला के इंतकाल पर रोक दी गई रामलीला Bijnor Khabar Tv

गफूरन बी गांव में केवल एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला के रूप में नहीं जानी जाती थीं। गांव के सभी समुदायों के लोग उन्हें प्यार से ‘बुआ’ कहते थे और अपने परिवार की सदस्य की तरह उनका सम्मान करते थे। यही आपसी रिश्ता इस फैसले की सबसे बड़ी वजह बना।

ग्राम प्रधान ने क्या कहा?

गांव के प्रधान ऋषि कुमार ने बताया कि गफूरन बी उनके लिए बुआ जैसी थीं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि एक तरफ मय्यत रखी हो और दूसरी तरफ रामलीला हो, ऐसा कैसे हो सकता था। प्रधान के अनुसार रामलीला को स्थगित करने का फैसला एकता और बुजुर्ग के प्रति सम्मान के लिए लिया गया।

आस्था और रिश्तों का संगम

रामलीला हिंदू समाज की आस्था और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा आयोजन है, जबकि गफूरन बी मुस्लिम समुदाय से थीं। इसके बावजूद गांववालों ने धर्म से ऊपर उठकर इंसानी रिश्ते को अहमियत दी। उनका संदेश साफ है कि गांव की सांझी विरासत में दुख और सुख सबके साझा होते हैं। इस फैसले को पड़ोसी गांवों और सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा जा रहा है।

भाईचारे की सीख

Bijnor News: मुस्लिम महिला के निधन पर रामलीला स्थगित

ऐसी घटनाएं याद दिलाती हैं कि भारत के गांवों में आपसी रिश्ते आज भी धर्म और जाति की दीवारों से ज्यादा मजबूत हैं। मोहड़ा गांव का यह कदम छोटा जरूर है, लेकिन समाज को एक बड़ा संदेश देता है कि सम्मान और संवेदना किसी मजहब की मोहताज नहीं होती।

रामलीला का आयोजन एक दिन टालने के बाद आगे की तैयारियों और मंचन की जानकारी आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।

अन्य ख़बरें !

By Kanchan

One thought on “हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल: गफूरन बी के इंतकाल पर गांव ने रोकी रामलीला”

Comments are closed.