पूर्व जिला न्यायाधीश ने 2018 की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को दी चुनौती, 16 नवंबर को अगली सुनवाई

Jabalpur High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश आर.के. श्रीवास ने अपनी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले को चुनौती दी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सेवा नियमों में बदलाव करके उन्हें सेवानिवृत्त करने का आधार तैयार किया गया था। 16 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट की युगलपीठ ने मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्याय मित्र नियुक्त किया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को होगी।

आठ साल पुराने फैसले को दी चुनौती

याचिका के अनुसार, आर.के. श्रीवास ने वर्ष 2000 में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया था। वर्ष 2016 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत करके जिला न्यायाधीश के प्रारंभिक स्तर पर नियुक्त किया गया था।

जबलपुर:पूर्व जिला न्यायाधीश ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति को दी चुनौती, नियम बदलने पर उठाए सवाल,16 नवंबर को सुनवाई - Jabalpur: Former District Judge Challenges ...

याचिकाकर्ता का कहना है कि उच्च न्यायिक सेवा में आने के बाद लगभग डेढ़ वर्ष के दौरान उनका चार बार स्थानांतरण हुआ। इस अवधि में उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई और उन्हें निलंबित किया गया। अंततः अप्रैल 2018 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ की सिफारिश पर उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई।

सेवा नियमों में बदलाव पर क्या है आपत्ति?

श्रीवास की याचिका में कहा गया है कि उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति से करीब एक महीने पहले मार्च 2018 में सेवा नियमों में संशोधन किया गया था। उनके अनुसार, इस बदलाव के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि 20 वर्ष से घटाकर 10 वर्ष कर दी गई, जबकि 50 वर्ष की आयु की शर्त बनी रही।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि निचली न्यायपालिका में उनकी सेवा अवधि को उच्च न्यायिक सेवा की अवधि के साथ जोड़कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता था। उन्होंने अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट का भी हवाला दिया है और दावा किया है कि उनके सेवा रिकॉर्ड में बी और सी ग्रेड दर्ज थे, जिन्हें उन्होंने अच्छा या बहुत अच्छा बताया है।

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ये याचिका में लगाए गए आरोप और याचिकाकर्ता के तर्क हैं। अदालत ने अभी इन दावों पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।

हाई कोर्ट ने न्याय मित्र क्यों नियुक्त किया?

न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत श्रीवास्तव को न्याय मित्र नियुक्त किया है। न्याय मित्र का काम अदालत को मामले के कानूनी पहलुओं और लागू नियमों को समझने में सहायता देना होता है।

अब सुनवाई के दौरान सेवा नियमों के संशोधन, अनिवार्य सेवानिवृत्ति की पात्रता और संबंधित प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर विचार किया जा सकता है। मामले में अगली तारीख 16 नवंबर तय की गई है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल हाई कोर्ट के सामने यह मामला विचाराधीन है। अगली सुनवाई में कानूनी पहलुओं पर आगे विचार होगा। अभी यह कहना सही नहीं होगा कि अदालत ने सेवानिवृत्ति के फैसले को गलत घोषित कर दिया है या उसे रद्द करने का आदेश दिया है।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें न्यायिक अधिकारियों की सेवा शर्तों, अनिवार्य सेवानिवृत्ति के नियमों और प्रशासनिक फैसलों की वैधानिकता से जुड़े प्रश्न उठाए गए हैं। अदालत का अंतिम निर्णय आने के बाद ही इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होगी।

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By Kanchan

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